Search…

    Saved articles

    You have not yet added any article to your bookmarks!

    Browse articles

    GDPR Compliance

    We use cookies to ensure you get the best experience on our website. By continuing to use our site, you accept our use of cookies, Privacy Policies, and Terms of Service.

    Top trending News
    bharathunt
    bharathunt

    अयोध्या के रावण के तीनों बेटे बने राम-लक्ष्मण और सीता:पिता की मौत बाद रामायण पढ़कर बने कलाकार, गोरखपुर की रामलीला में लूट रहे वाह-वाही

    9 hours ago

    1

    0

    अयोध्या की रामलीला में रावण बनने वाले पिता के 3 मासूम बेटे गोरखपुर में राम-लक्ष्मण और सीता का रोल अदा कर रहे हैं। पिता की मौत के बाद बच्चों ने रामायण पढ़ी और उनके अंदर भी कलाकार बनने की इच्छा जागृत हुई। दो साल अयोध्या में दीक्षा लेकर तीनों अच्छे कलाकर बन गए। महज 12, 10 और 6 साल की उम्र में तीनों भाई के अभिनय का डंका बज रहा है। अब पढिए पूरी कहानी… अयोध्या के रहने वाले भूपेन्द्र मिश्रा (12), उपेंद्र मिश्रा (10) और सूर्य प्रकाश मिश्रा (6) गोरखपुर में होने वाली श्री रामलीला कमेटी वर्डघाट की ओर से 164वें रामलीला आयोजन में तीनों भाई अपनी कलाकारी के जरिए सबका मन मोह रहे हैं। राम के किरदार में भूपेन्द्र, उपेन्द्र लक्ष्मण और सूर्य प्रकाश मिश्रा सीता के किरदार में अपना अभिनय कर रहे हैं। ये तीनों भाई अयोध्या के श्री उमापति संस्कृति विद्यालय से अपनी संस्कृति की पढ़ाई कर रहे हैं। कम उम्र में ही पिता परमेश्वर कुमार मिश्रा का साया हटने के बाद से पत्नी रीता मिश्रा ने बच्चों का भरण पोषण की जिम्मेदारी उठाई। अयोध्या में उनकी मुलाकात गुरु रामचंद्र शृंगारी से हुई। उन्होंने बच्चों की शिक्षा दीक्षा दी। आज तीनों बच्चे अपने घर का खर्चा चला रहे हैं। तीन साल पहले पिता का निधन हो गया, लेकिन रामलीला से उनका जुड़ाव आज भी बच्चों के जीवन में जीवित है। मंच पर जब तीनों भाई अपने किरदारों में उतरते हैं, तो दर्शकों को रामायण के आदर्शों की झलक दिखाई देती है। लेकिन इन किरदारों के पीछे एक ऐसा परिवार है, जिसने कम उम्र में ही अपनों को खोने का दर्द महसूस किया है। तीनों भाइयों के पिता परमेश्वर मिश्रा का रामलीला से गहरा लगाव था। वो अयोध्या के रामलीला में वो रावण के किरदार को निभाते थे। परमेश्वर खाली समय में गाड़ी चलाकर परिवार का भरण पोषण करते थे। पिता के जाने के बाद उनका यही जुड़ाव बच्चों के जीवन का हिस्सा बन गया। आज तीनों भाई रामलीला में अभिनय कर उस परंपरा को आगे बढ़ा रहे हैं, जिससे उनके पिता का भावनात्मक रिश्ता था। बड़ा भाई भूपेंद्र बनते हैं राम, शास्त्री बनने का सपना तीनों भाइयों में सबसे बड़ा 12 वर्षीय भूपेंद्र मिश्रा हैं। बर्डघाट की रामलीला में वह श्रीराम की भूमिका निभाते है। श्रीराम का चरित्र मर्यादा, धैर्य और कर्तव्य का प्रतीक माना जाता है। भूपेंद्र जिस उम्र में अपने बचपन को जी रही है, उसी उम्र में वह मंच पर इस आदर्श चरित्र को जीवंत करने की जिम्मेदारी भी निभा रहे हैं। भूपेंद्र का सपना बड़ा होकर शास्त्री की पढ़ाई करना और पांडित्य को अपने जीवन का आधार बनाना है। संस्कृत की पढ़ाई से जुड़ाव इसी दिशा में एक कदम है। रामलीला में श्रीराम की भूमिका निभाते हुए वह जिस चरित्र को लोगों के सामने प्रस्तुत करते हैं, उनके आदर्श अपने भविष्य के सपने से भी जुड़े नजर आते हैं। उपेंद्र के लिए रामलीला ही जीवन का रास्ता 10 वर्षीय उपेंद्र मिश्रा अपने बड़े भाई के साथ रामलीला में अहम भूमिका निभाते हैं। वह लक्ष्मण बनकर मंच पर आते हैं। लक्ष्मण का चरित्र भाई के प्रति समर्पण, निष्ठा और त्याग के लिए जाना जाता है। रामायण में लक्ष्मण का अपने बड़े भाई श्रीराम के प्रति समर्पण एक महत्वपूर्ण प्रसंग है। मंच पर उपेंद्र इसी रिश्ते को जीवंत करते है, जबकि वास्तविक जीवन में भी वह अपने बड़े भाई के साथ इस सांस्कृतिक परंपरा का हिस्सा बना हुआ है। उपेंद्र का सपना बड़ा होकर भी रामलीला से जुड़े रहने का है। वह इसे केवल अभिनय या मनोरंजन का माध्यम नहीं मानते, बल्कि लोगों तक रामायण के आदर्श पहुंचाने का रास्ता समझते हैं। उनकी इच्छा है कि वह जीवनभर रामलीला करता रहूँ और इसके माध्यम से लोगों को अच्छे संस्कारों और आदर्शों से जोड़ सकूं सबसे छोटा सूर्य प्रकाश डॉक्टर बनकर करना चाहता है सेवा तीनों भाइयों में सबसे छोटा आठ वर्षीय सूर्य प्रकाश मिश्रा हैं। वह रामलीला में माता सीता की भूमिका निभाते हैं। कम उम्र में ही वह मंच पर इस महत्वपूर्ण किरदार को निभा रहे हैं। जहां उनके दोनों बड़े भाइयों के सपने संस्कृत की पढ़ाई और रामलीला से जुड़े हैं, वहीं सूर्य प्रकाश बड़ा होकर डॉक्टर बनना चाहते हैं। उनका सपना रोगियों की सेवा करने का है। डॉक्टर बनकर लोगों का इलाज करना और उनके दर्द को दूर करने की इच्छा उनके भविष्य की कल्पना का हिस्सा है। अभी वह बचपन की उम्र में है, लेकिन उनके मन में अपने लिए एक लक्ष्य है। यही लक्ष्य उन्हे अपने दोनों भाइयों के साथ पढ़ाई और रामलीला के सफर में आगे बढ़ने की प्रेरणा देता है। रामलीला का यह 164 वां साल है श्री रामलीला कमेटी वर्डघाट के अध्यक्ष गणेश वर्मा बोले- गोरखपुर की इस रामलीला का इतिहास 1862 से पहले का बताया जाता है। पहले यहां खुले मैदान में रामलीला होती थी, लेकिन पिछले 50-60 वर्षों से मंच पर इसका मंचन किया जा रहा है। इस रामलीला की खास बात यह है कि इसका मंच मुक्तेश्वरनाथ मंदिर के ठीक सामने है। यहां अवधी और मिथिला की परंपराओं के मिश्रण के साथ रामलीला का मंचन होता है। कमेटी की परंपरा के अनुसार, भगवान राम, लक्ष्मण, भरत, शत्रुघ्न और सीता की भूमिका बाल स्वरूप में बच्चे निभाते हैं। इस बार कमेटी ने विशेष रूप से वेदपाठी और संस्कृत विद्यालय में पढ़ने वाले गुरुकुल के छात्रों को चुना है। राम, लक्ष्मण, भरत, शत्रुघ्न और सीता की भूमिका निभाने वाले सभी पांचों बच्चे छात्र हैं। इन बच्चों को अयोध्या के रामचंद्र श्रृंगारी जी महाराज रामलीला के मंचन का प्रशिक्षण देते रहे हैं। कमेटी का उद्देश्य पुरानी परंपरा को बनाए रखते हुए रामलीला की धार्मिक पवित्रता और सांस्कृतिक विरासत को आगे बढ़ाना है।
    Click here to Read more
    Prev Article
    राजू लोधी बने भाजपा पिछड़ा मोर्चा के बुलंदशहर जिलाध्यक्ष:प्रदेश नेतृत्व ने सौंपी नई जिम्मेदारी, कार्यकर्ताओं में खुशी
    Next Article
    वाराणसी में बनेगा स्वामी विवेकानंद का भव्य स्मारक:20.69 करोड़ का बजट जारी, अर्दली बाजार के गोपाल लाल विला के बहुरेंगे दिन

    Related न्यूज Updates:

    Comments (0)

      Leave a Comment