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    बच्ची की मौत और अव्यवस्था से आहत वरिष्ठ उपाध्यक्ष:पद से दिया इस्तीफा, केंद्रीय गणपति महोत्सव समन्वय समिति के दो अन्य उपाध्यक्षों ने भी छोड़े पद

    5 hours ago

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    बलरामपुर में गणपति महोत्सव के दौरान बढ़ती अव्यवस्था, तेज आवाज में डीजे, देर रात विसर्जन और हाल ही में एक बच्ची की मौत की घटना से आहत होकर केंद्रीय गणपति महोत्सव समन्वय समिति के वरिष्ठ उपाध्यक्ष डॉ. तुलशीष दूबे ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। उनके साथ समिति के उपाध्यक्ष अमरीश शुक्ला और अंकुर चौहान ने भी पद छोड़ने की बात कही है। डॉ. दूबे ने बताया कि बलरामपुर में पिछले 12-15 सालों से गणपति उत्सव बड़े उत्साह के साथ मनाया जा रहा है। समितियों की संख्या बढ़ने के बाद करीब दस साल पहले केंद्रीय गणपति महोत्सव समन्वय समिति का गठन इस मकसद से किया गया था कि सभी समितियों के बीच तालमेल बिठाकर उत्सव को व्यवस्थित और अनुशासित तरीके से कराया जा सके। वे इस समिति के संस्थापक उपाध्यक्ष रहे हैं। धार्मिक भावनाओं से ज्यादा प्रदर्शन हो रहा उन्होंने कहा कि जिस मकसद से समिति बनाई गई थी, अभी वह पूरा होता नहीं दिख रहा है। अलग-अलग समितियां खुद को सक्षम मानती हैं और केंद्रीय समन्वय समिति के सुझावों और अपीलों को गंभीरता से नहीं ले रही हैं। डॉ. दूबे के मुताबिक, समिति लगातार अपील करती रही कि डीजे की आवाज तय सीमा में रखी जाए, ताकि आम नागरिकों, विद्यार्थियों, बुजुर्गों और अन्य लोगों को परेशानी न हो। इसके बावजूद तेज आवाज में डीजे बजाने की प्रवृत्ति बढ़ती गई। उन्होंने कहा कि पूजा और आस्था के पर्व में धार्मिक भावनाओं से ज्यादा प्रदर्शन और प्रतिस्पर्धा हावी हो रही है। किसकी शोभायात्रा में अधिक तेज डीजे बजेगा और कौन अधिक देर तक विसर्जन करेगा, जैसे हालात बन रहे हैं। शोभा यात्राओं ने लोगों की मुश्किलें और बढ़ा दीं डॉ. दूबे ने कहा कि समिति लगातार यह कहती रही कि मूर्ति विसर्जन रात में न किया जाए और नदियों में अंधेरे में जाने से बचा जाए। इसके बावजूद कई समितियों द्वारा देर रात तक विसर्जन होता रहा। उन्होंने इस साल की विसर्जन शोभायात्रा का उदाहरण देते हुए कहा कि रात करीब 3 से 3:30 बजे तक समन्वय समिति के लोग मंच पर मौजूद रहे, लेकिन ज्यादातर समितियां वहां नहीं पहुंचीं। शुरुआत में पांच-छह मूर्तियों को भगवा ध्वज दिखाकर विसर्जन के लिए शोभायात्रा रवाना हुई, जबकि करीब डेढ़ से दो घंटे बाद बाकी समितियां पहुंचीं। इससे पूरी व्यवस्था प्रभावित हुई और नगरवासियों को भी परेशानी का सामना करना पड़ा। उन्होंने कहा कि उत्सव के दौरान नगर में कई बार 8-10 घंटे तक बिजली कटौती की स्थिति बनी रही। ऐसे में तेज आवाज और रोशनी वाली शोभा यात्राओं ने लोगों की मुश्किलें और बढ़ा दीं। उन्होंने एक घटना का जिक्र करते हुए बताया कि विसर्जन शोभायात्रा से पहले ही एक डीजे वाहन एक स्थानीय विद्यालय के सामने से बेहद तेज आवाज में गुजर रहा था, जबकि उस समय उसके साथ कोई शोभायात्रा भी नहीं थी। डॉ. दूबे ने इसे व्यवस्था के प्रति लापरवाही का उदाहरण बताया। ‘बच्ची की मौत ने झकझोर दिया’ डॉ. दूबे ने कहा कि मौजूदा परिस्थितियों से पहले ही वे लोग चिंतित थे, लेकिन एक बच्ची की दुखद मौत की घटना ने उन्हें भीतर तक आहत कर दिया। उन्होंने कहा कि ऐसी घटना के बाद समिति के सामने केवल शोक संवेदना व्यक्त करने की स्थिति रह जाती है, जबकि किसी परिवार ने अपना बच्चा खो दिया हो तो उसकी वास्तविक क्षतिपूर्ति संभव नहीं है। उन्होंने कहा कि यदि समन्वय समिति लोगों को सुरक्षित और व्यवस्थित तरीके से उत्सव मनाने के लिए प्रेरित ही नहीं कर पा रही है, तो ऐसे पद पर बने रहने का औचित्य वे स्वयं में नहीं देखते। डॉ. दूबे ने कहा कि समिति का गठन समाज को नई दिशा और बेहतर व्यवस्था देने तथा सभी समितियों को साथ लेकर चलने के उद्देश्य से किया गया था। लेकिन वर्तमान हालात में समन्वय का प्रयास अपेक्षित परिणाम नहीं दे पा रहा है। इसी कारण उन्होंने वरिष्ठ उपाध्यक्ष के पद से त्यागपत्र देने का निर्णय लिया।उनके मुताबिक, अमरीश शुक्ला और अंकुर चौहान ने भी मौजूदा परिस्थितियों में अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन कर पाने में असमर्थता जताते हुए पदों से इस्तीफा दिया है। डॉ. दूबे ने कहा कि गणपति महोत्सव आस्था, श्रद्धा और सामाजिक एकता का पर्व है। इसे प्रतिस्पर्धा, शोर और अव्यवस्था का माध्यम नहीं बनने देना चाहिए।
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