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    15 साल बाद मां बनीं 38 साल की महिला:KGMU में पोस्ट कोविड पहली सफल IVF डिलीवरी, 80 हजार आया खर्च

    23 minutes ago

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    KGMU के क्वीन मैरी हॉस्पिटल ने पोस्ट कोविड पहला IVF डिलीवरी कराने में सफलता हासिल की है। 15 साल से बच्चे का इंतजार कर रहीं 38 साल की मां ने 20 सितंबर को बेटी को जन्म दिया। जन्म के बाद बच्ची और मां दोनों स्वास्थ्य है और बहुत जल्द उनको अस्पताल से छुट्टी दे दी जाएगी। बड़ी बात ये है कि IVF कराने में महज 80 हजार के खर्च आया है। जो कॉरपोरेट हॉस्पिटल के मुकाबले कई गुना कम हैं। सफल IVF करने वाली प्रो.पुष्पलता शंखवार ने बताया कि अयोध्या निवासी दंपती करीब एक साल पहले KGMU में फर्टिलिटी का इलाज कराने पहुंचा। 15 साल पहले शादी हुई थी। शादी के बाद से कोई संतान नहीं हुई। उन्होंने पहले भी कई डॉक्टरों से इलाज कराया पर फायदा नहीं हुआ। यहां लैप्रोस्कोपी और हिस्टेरोस्कोपी की जांच में दोनों फैलोपियन ट्यूब बंद मिलीं। उन्हें खोलने की कोशिश की गई, लेकिन सफलता नहीं मिली। इसके बाद IVF की सलाह दी गई। खुद के एग और पति के स्पर्म से हुआ IVF डॉ.पुष्पलता शंखवार ने बताया कि IVF के दौरान महिला के खुद के एग और पति के स्पर्म का इस्तेमाल हुआ। 28 जनवरी को ओवम पिकअप किया गया और 31 जनवरी को फ्रेश एंब्रियो ट्रांसफर किया गया। दो एंब्रियो ट्रांसफर किए गए, जिनमें से एक विकसित होकर गर्भावस्था में बदला। गर्भावस्था के दौरान महिला की नियमित निगरानी की गई। करीब 30वें सप्ताह में पानी लीक होने पर उन्हें भर्ती किया गया। जांच में मेम्ब्रेन रप्चर के साथ संक्रमण मिला। डॉक्टरों ने संक्रमण का इलाज किया और एंटीबायोटिक्स के साथ लगातार निगरानी में गर्भावस्था को आगे बढ़ाया। बच्चे की धड़कन बिगड़ी तो सीजेरियन 20 सितंबर को प्रसव के दौरान बच्चे की धड़कन बिगड़ने लगी। इसके बाद सीजेरियन किया गया और बच्ची का जन्म हुआ। बच्ची का वजन करीब 1.93 किलो था। इनफर्टिलिटी से जूझ रहे मरीजों के लिए बड़ी उम्मीद विभागाध्यक्ष प्रो. अंजू अग्रवाल ने इसे क्वीन मैरी और पूरे विभाग के लिए उपलब्धि बताया। उन्होंने कहा कि कोविड से पहले भी अस्पताल में IVF से सफल गर्भधारण के मामले हुए थे, लेकिन कोविड के दौरान यह सुविधा बंद हो गई थी। अब यूनिट में फिर से निसंतान दंपतियों को आधुनिक उपचार उपलब्ध कराया जा रहा है। 1993 में शुरू हुई थी IVF यूनिट क्वीन मैरी में IVF यूनिट की शुरुआत 1993 में डॉ. लक्ष्मी सिंह ने की थी। पूर्व विभागाध्यक्ष डॉ. विनीता दास ने भी यूनिट को आगे बढ़ाया। कोविड महामारी के बाद यूनिट की सेवाएं प्रभावित हो गई थीं। अब सफल IVF डिलीवरी के बाद फिर से उम्मीद जगी है।
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