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    बगैर स्वीकृत ले-आउट प्लॉट बेचने वालों पर प्रशासन सख्त:सीतापुर नगर मजिस्ट्रेट की चेतावनी, धोखाधड़ी रोकने को होगी कार्रवाई

    2 hours ago

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    सीतापुर में शहर के विनियमित क्षेत्र में अवैध प्लॉटिंग और भू-माफियाओं के गोरखधंधे पर अब प्रशासन ने सख्ती शुरू कर दी है। नगर मजिस्ट्रेट व नियत प्राधिकारी मीनाक्षी पांडेय ने स्पष्ट चेतावनी देते हुए कहा कि बिना स्वीकृत ले-आउट के जमीनों की खरीद-फरोख्त पूरी तरह अवैध है। ऐसे मामलों में लिप्त पाए जाने वाले प्लॉट विक्रेताओं और बिल्डरों के खिलाफ कठोर कानूनी कार्रवाई की जाएगी, जिसमें एफआईआर दर्ज कर जेल भेजने तक की कार्रवाई शामिल है। नगर मजिस्ट्रेट ने बताया कि प्रशासन के संज्ञान में आया है कि कुछ भू-विकासकर्ता अपनी भूमि को छोटे-छोटे टुकड़ों में बांटकर फर्जी या कूट-रचित नक्शों के सहारे भोली-भाली जनता को प्लॉट बेच रहे हैं। यह कृत्य न केवल लोगों के साथ धोखाधड़ी है बल्कि नियमानुसार पूरी तरह अवैध भी है। ऐसे मामलों पर अंकुश लगाने के लिए अब प्लॉट विक्रेताओं के लिए सख्त नियम लागू कर दिए गए हैं। नए निर्देशों के अनुसार, किसी भी भूमि पर प्लॉटिंग करने वाले व्यक्ति या संस्था को संबंधित स्थल पर एक सूचना बोर्ड लगाना अनिवार्य होगा। इस बोर्ड पर गांव और परगना का नाम, गाटा या खसरा संख्या, उत्तर प्रदेश राजस्व संहिता की धारा 80 के तहत दर्ज मुकदमे का विवरण, साथ ही स्वीकृत ले-आउट की आदेश संख्या और दिनांक स्पष्ट रूप से अंकित करना होगा। नगर मजिस्ट्रेट ने कहा कि यदि कोई विक्रेता बिना स्वीकृत नक्शे के प्लॉट बेचता हुआ पाया गया या जाली दस्तावेजों का इस्तेमाल करता है, तो उसके खिलाफ सुसंगत धाराओं में मुकदमा दर्ज कर कड़ी कार्रवाई की जाएगी। नगर मजिस्ट्रेट मीनाक्षी पांडेय ने आम जनता से भी अपील की है कि वे जमीन खरीदने से पहले उसकी वैधानिक स्थिति की पूरी जांच कर लें। उन्होंने कहा कि किसी भी भूखंड में निवेश करने से पहले गाटा संख्या, धारा 80 के आदेश और स्वीकृत ले-आउट की जानकारी तहसील या संबंधित कार्यालय से अवश्य सत्यापित कर लें, ताकि भविष्य में किसी विवाद या आर्थिक नुकसान से बचा जा सके।
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