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    भोजशाला के पास नमाज की जगह पर सुप्रीम कोर्ट सख्त:CJI बोले- अब मंगलवार को होगी सुनवाई; मुस्लिम पक्ष बोला- 2 जुमे की नमाज छूटी

    9 hours ago

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    एमपी के धार भोजशाला-कमाल मौला मस्जिद मामले में सुप्रीम कोर्ट में शुक्रवार को सुनवाई हुई। प्रशासन और मुस्लिम याचिकाकर्ताओं की ओर से नमाज की जगह को लेकर पक्ष रखा गया। शुक्रवार को सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा, "सरकारी तंत्र और दोनों समुदायों के प्रतिनिधि आपस में बातचीत कर रहे हैं। वे मिलकर एक उपयुक्त स्थान तलाशने की कोशिश कर रहे हैं। कृपया इस मामले की सुनवाई मंगलवार या बुधवार को सूचीबद्ध की जाए।" मुस्लिम पक्षकारों की ओर से सीनियर एडवोकेट हुजैफा अहमदी ने कहा– "मैंने इस मामले का सबसे पहले बुधवार को उल्लेख किया था और अदालत को बताया था कि हम पहले ही लगातार दो जुमे की नमाज से वंचित रह चुके हैं। सुनवाई के बाद सुप्रीम कोर्ट ने अंतरिम आवेदन (IA) के लिए मंगलवार (29 जुलाई) की तारीख तय की है। बता दें, कोर्ट ने 22 जुलाई को प्रशासन से भोजशाला परिसर के पास ही नमाज के लिए जमीन देने को कहा था। सीनियर एडवोकेट हुजैफा ने कहा- दो जुमे की नमाज से वंचित रहे सीनियर एडवोकेट हुजैफा अहमदी ने कहा– हम पहले ही लगातार दो जुमे की नमाज से वंचित रह चुके हैं। आपकी लॉर्डशिप के आदेश के बावजूद प्रशासन न तो परिसर से सटी हुई और न ही आसपास कोई वैकल्पिक जगह उपलब्ध करा रहा है। इस मामले को आज सूचीबद्ध किया जाना था, लेकिन हैरानी की बात है कि इसे कॉज लिस्ट में शामिल नहीं किया गया। प्रशासन अब भी आदेश के मुताबिक परिसर से सटी हुई या आसपास की जगह देने से इनकार कर रहा है। समुदाय के नेताओं के साथ बैठक हुई, लेकिन जो स्थान हमें दिया जा रहा है, वह सड़क मार्ग से करीब 1.3 किलोमीटर दूर है।" सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता– "वह जगह 900 मीटर दूर है।" ‘हमारे पास हेलीकॉप्टर नहीं हैं…’ सीनियर एडवोकेट हुजैफा ने कहा– "वह हवाई दूरी (एयर डिस्टेंस) है। हमारे पास हेलीकॉप्टर नहीं हैं। मैं सिर्फ यह बताना चाहता हूं कि हर बार आपकी लॉर्डशिप के आदेश का पालन न करने की कोशिश की जा रही है। यह सब एक खास समूह की मांग पर किया जा रहा है, जो कहता है कि वह मस्जिद के पास भी उन्हें आने नहीं देगा।" सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता– “मुझे इस मामले में एक हलफनामा (एफिडेविट) दाखिल करने दीजिए।” मुख्य न्यायाधीश (CJI) ने कहा– "हम इस अंतरिम आवेदन (IA) को मंगलवार को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध करेंगे।" देर रात बैठक हुई, प्रशासन की दी जगह पर नहीं बनी सहमति गुरुवार देर रात जिला प्रशासन और मुस्लिम समुदाय के प्रतिनिधियों के बीच करीब दो घंटे तक बैठक चली, लेकिन नमाज के वैकल्पिक स्थान को लेकर सहमति नहीं बन पाई। प्रशासन ने अन्य संभावित स्थानों का प्रस्ताव रखा। इन प्रस्तावों को भी अस्वीकार कर दिया गया। मुस्लिम समाज का कहना है कि उन्हें उनके पारंपरिक स्थान पर ही नमाज अदा करने की अनुमति दी जाए। सुप्रीम कोर्ट के आदेश में भी नमाज के लिए भोजशाला के नजदीक स्थान उपलब्ध कराने की बात कही गई है। शुक्रवार को प्रशासन द्वारा निर्धारित मालीवाड़ा में चालीसपीर दरगाह के पास जुमे की नमाज अदा करने के लिए कोई नहीं पहुंचा। सुरक्षा के मद्देनजर प्रशासन और पुलिस की ओर से मौके पर सभी इंतजाम किए गए थे। धार के सदर अब्दुल समद ने कहा- प्रशासन सुप्रीम कोर्ट के आदेश का पालन नहीं कर रहा है। चालीसपीर दरगाह के पास निर्धारित स्थान पर नमाज नहीं पढ़ी जाएगी। इसके बजाय जुमे की नमाज आसपास की मस्जिदों में अदा की जाएगी। 14 जुलाई: मुस्लिम पक्ष ने कहा था जमीन दो किमी दूर दी 14 जुलाई को सुप्रीम कोर्ट ने मध्य प्रदेश सरकार को निर्देश दिया था कि हर शुक्रवार दोपहर 1 से 3 बजे के बीच नमाज के लिए वैकल्पिक स्थान मुहैया कराया जाए। इसके बाद जिला प्रशासन ने मालीवाड़ा गांव में चालीसपीर दरगाह के पास नमाज की जगह निर्धारित की थी, लेकिन मुस्लिम समुदाय ने इसे स्वीकार करने से इनकार कर दिया। सुप्रीम कोर्ट में मुस्लिम पक्ष ने दलील दी थी कि प्रशासन द्वारा उपलब्ध कराया गया स्थान भोजशाला से करीब दो किलोमीटर दूर है और यह कोर्ट के आदेश की भावना के अनुरूप नहीं है। इस पर अदालत ने केंद्र और राज्य सरकार को भोजशाला परिसर के बाहर या उससे सटे क्षेत्र में वैकल्पिक स्थान उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं। दावा- पहले भी कभी नहीं बिगड़ा माहौल सदर अब्दुल समद का कहना है कि जब भोजशाला परिसर में नमाज होती थी, तब भी कभी कानून-व्यवस्था की स्थिति नहीं बिगड़ी। नमाज बंद होने के बाद भी कोई विवाद नहीं हुआ, इसलिए इतनी दूर वैकल्पिक व्यवस्था का कोई औचित्य नहीं है। सदर ने पुरानी घटना का जिक्र करते हुए बताया कि इससे पहले 23 जनवरी को बसंत पंचमी के मौके पर प्रशासन ने जिस जगह पर डमी नमाज कराई थी, वह दरअसल कब्रिस्तान की जमीन है। उस समय भी मुस्लिम समाज ने इस पर आपत्ति जताई थी, क्योंकि कब्रिस्तान में जुमे की नमाज अदा नहीं की जाती। यह पक्ष भी सुप्रीम कोर्ट के सामने मजबूती से रखा गया था। सुप्रीम कोर्ट ने 14 जुलाई को अपने आदेश में क्या कहा था? हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस के हरिशंकर जैन, राष्ट्रीय अध्यक्ष रंजना अग्निहोत्री और अधिवक्ता विष्णुशंकर जैन के साथ अधिवक्ता विनय जोशी के नेतृत्व में 2 मई 2022 को मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर खंडपीठ में याचिका नंबर 10497/2022 दायर की गई थी। इस मामले में याचिकाकर्ता रंजना अग्निहोत्री, आशीष गोयल, आशीष जनक, मोहित गर्ग और सुनील सारस्वत को 15 मई 2026 को हाई कोर्ट से राहत मिली थी। इसके खिलाफ मुस्लिम पक्ष ने सुप्रीम कोर्ट में अपील की, जिस पर 14 जुलाई को सुनवाई हुई। मामले से जुड़ी ये खबर भी पढ़ें… भोजशाला के बिलकुल पास दें नमाज की जगह धार की ऐतिहासिक भोजशाला परिसर में जुमे की नमाज को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र और मध्य प्रदेश सरकार को स्पष्ट निर्देश दिए हैं। तीन सदस्यीय पीठ ने कहा कि कोर्ट के 14 जुलाई के अंतरिम आदेश का केवल औपचारिक नहीं, बल्कि उसकी मूल भावना के अनुरूप अक्षरशः पालन सुनिश्चित किया जाए। पढ़ें पूरी खबर…
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