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    बाहर ताला, अंदर इलाज...FIR में बढ़ेगा फर्जी-डॉक्टर का नाम:सिद्धार्थनगर में स्वास्थ्य विभाग ने पुलिस को भेजी नई तहरीर, बेड के नीचे छिपा मिला था डॉक्टर

    14 hours ago

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    सिद्धार्थनगर के इटवा में चर्चित जनता सेवा हॉस्पिटल प्रकरण में पुलिस और स्वास्थ्य विभाग की कार्रवाई ने नया मोड़ ले लिया है। नवजात शिशु की मौत और कथित रूप से अयोग्य व्यक्ति द्वारा ऑपरेशन किए जाने के मामले में अब मुकदमे का दायरा बढ़ सकता है। स्वास्थ्य विभाग ने थाना इटवा को नई तहरीर भेजकर अस्पताल में मिले प्रवीण कुमार यादव का नाम एफआईआर में शामिल करने और मामले में गंभीर धाराएं बढ़ाने की संस्तुति की है। विभाग का कहना है कि संयुक्त छापेमारी के दौरान मिले साक्ष्य, अस्पताल की परिस्थितियां और मौके पर सामने आए तथ्य इस कार्रवाई के लिए पर्याप्त आधार हैं। यह कार्रवाई 27 जून की देर रात हुई उस संयुक्त छापेमारी के बाद की गई है, जिसमें प्रशासन, स्वास्थ्य विभाग और पुलिस ने जनता सेवा हॉस्पिटल पर दबिश दी थी। छापेमारी के दौरान अस्पताल बाहर से पूरी तरह बंद दिखाई दे रहा था, लेकिन अंदर मरीज भर्ती मिले, इलाज जारी था और ऑपरेशन होने के भी प्रमाण मिले। इसी दौरान प्रवीण कुमार यादव अस्पताल के एक कमरे में बेड के नीचे छिपा मिला था। बाहर ताला लगा था, अंदर चल रहा था इलाज स्वास्थ्य विभाग को लगातार शिकायतें मिल रही थीं कि अस्पताल को बंद रखने के निर्देश के बावजूद वहां चोरी-छिपे मरीजों का इलाज किया जा रहा है। इसी सूचना के आधार पर 27 जून की रात करीब 11:30 बजे संयुक्त टीम ने जनता सेवा हॉस्पिटल पर छापा मारा। छापेमारी टीम में इटवा तहसीलदार, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र इटवा के अधीक्षक, प्रभारी निरीक्षक संजय मिश्रा तथा स्वास्थ्य विभाग के नैदानिक स्थापना के नोडल अधिकारी डॉ. मानवेन्द्र पाल शामिल थे। अस्पताल पहुंचने पर मुख्य गेट पर ताला लगा मिला। बाहर से ऐसा प्रतीत हो रहा था कि अस्पताल पूरी तरह बंद है। अधिकारियों ने ताला खुलवाकर जब अंदर प्रवेश किया तो स्थिति बिल्कुल अलग मिली। अस्पताल के अधिकांश हिस्सों की लाइटें बंद थीं, लेकिन भीतर मरीज भर्ती थे, उनके तीमारदार मौजूद थे और अस्पताल का स्टाफ भी कार्यरत मिला। प्रथम दृष्टया यह स्पष्ट हो गया कि अस्पताल को बंद दिखाने की कोशिश की जा रही थी, जबकि भीतर इलाज जारी था। दो मरीजों का कुछ घंटे पहले हुआ था ऑपरेशन संयुक्त टीम ने अस्पताल के सभी कमरों की तलाशी ली। जांच के दौरान दो ऐसे मरीज मिले, जिनका कुछ घंटे पहले ही ऑपरेशन किया गया था। मरीजों के परिजनों ने भी अधिकारियों को बताया कि ऑपरेशन उसी दिन कराया गया है। मामले की गंभीरता को देखते हुए दोनों मरीजों को तत्काल एंबुलेंस से माधव प्रसाद त्रिपाठी मेडिकल कॉलेज एवं संबद्ध चिकित्सालय भेजा गया, ताकि विशेषज्ञ चिकित्सकों की निगरानी में उनका इलाज कराया जा सके। स्वास्थ्य विभाग का मानना है कि अस्पताल बंद रखने के स्पष्ट आदेश के बावजूद ऑपरेशन जैसी गतिविधियों का होना गंभीर अनियमितता और आदेशों की अवहेलना का मामला है। बेड के नीचे छिपा मिला प्रवीण कुमार यादव छापेमारी का सबसे चौंकाने वाला खुलासा अस्पताल की सघन तलाशी के दौरान हुआ। अधिकारियों ने एक कमरे में जांच की तो वहां प्रवीण कुमार यादव बेड के नीचे छिपा मिला। टीम ने उसे बाहर निकलवाया और पूछताछ की। स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, मौके पर कोई पंजीकृत चिकित्सक मौजूद नहीं मिला। इसके बाद प्रवीण कुमार यादव और अस्पताल में मौजूद दो महिला कर्मचारियों को पुलिस के सुपुर्द कर दिया गया। वहीं अस्पताल को सील कर दिया गया। स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि पहले से दर्ज मुकदमे में प्रवीण यादव का नाम शामिल नहीं था, लेकिन छापेमारी के दौरान उसकी मौजूदगी और अन्य परिस्थितियों ने उसकी भूमिका पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्वास्थ्य विभाग ने पुलिस को भेजी नई तहरीर स्वास्थ्य विभाग के नैदानिक स्थापना के नोडल अधिकारी डॉ. मानवेन्द्र पाल ने छापेमारी के दौरान मिले तथ्यों के आधार पर थाना इटवा को विस्तृत तहरीर सौंपी है। तहरीर में उल्लेख किया गया है कि संयुक्त छापेमारी के दौरान प्रवीण कुमार यादव अस्पताल परिसर में मौजूद मिला। उपलब्ध साक्ष्यों, मौके की परिस्थितियों और जांच में सामने आए तथ्यों के आधार पर उसका नाम मुकदमे में शामिल करने तथा आवश्यकतानुसार धाराओं में वृद्धि कर विधिक कार्रवाई किए जाने का अनुरोध किया गया है। पुलिस अब स्वास्थ्य विभाग की इस नई तहरीर का परीक्षण कर रही है। माना जा रहा है कि जांच पूरी होने के बाद एफआईआर में संशोधन कर नए नाम जोड़े जा सकते हैं। नवजात की मौत से शुरू हुआ था पूरा मामला पूरे प्रकरण की शुरुआत 23 मई को हुई थी। डुमरियागंज क्षेत्र निवासी चंद्रमणि अपनी पत्नी बंदना को प्रसव के लिए जनता सेवा हॉस्पिटल लेकर पहुंचे थे। आरोप है कि प्रसव के दौरान ऑपरेशन किसी योग्य स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञ या सर्जन ने नहीं, बल्कि प्रवीण कुमार यादव और उसके सहयोगियों ने किया। ऑपरेशन के बाद नवजात शिशु की मौत हो गई, जबकि प्रसूता की हालत भी गंभीर हो गई थी। घटना के बाद पीड़ित परिवार ने स्वास्थ्य विभाग और पुलिस से शिकायत की, जिसके आधार पर मुकदमा दर्ज किया गया था। जांच में डॉक्टर के दावे पर भी उठे सवाल घटना की गंभीरता को देखते हुए मुख्य चिकित्सा अधिकारी ने जांच समिति गठित की थी। जांच के दौरान अस्पताल प्रबंधन की ओर से एक चिकित्सक का नाम प्रस्तुत किया गया और दावा किया गया कि ऑपरेशन उन्हीं के द्वारा किया गया था। हालांकि पीड़ित परिवार लगातार इस दावे को खारिज करता रहा। परिवार का कहना है कि वास्तविकता सामने लाने के लिए अस्पताल के सीसीटीवी फुटेज, मोबाइल लोकेशन और कॉल डिटेल रिकॉर्ड की जांच कराई जानी चाहिए। उनका आरोप है कि ऑपरेशन वास्तव में किसी योग्य डॉक्टर ने नहीं किया था। पुलिस जुटा रही साक्ष्य, बढ़ सकती हैं धाराएं सूत्रों के अनुसार पुलिस स्वास्थ्य विभाग की नई तहरीर, संयुक्त छापेमारी की रिपोर्ट, अस्पताल से जब्त दस्तावेजों और अन्य साक्ष्यों का परीक्षण कर रही है। यदि जांच में आरोप पुष्ट होते हैं तो मुकदमे में नए आरोपियों के नाम जोड़े जा सकते हैं। साथ ही पहले से दर्ज धाराओं में भी संशोधन कर अधिक गंभीर धाराएं लगाई जा सकती हैं। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि पूरे मामले में विधिक राय लेने के बाद नियमानुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी। जिले के निजी अस्पताल भी जांच के दायरे में जनता सेवा हॉस्पिटल प्रकरण सामने आने के बाद जिले के निजी अस्पतालों और नर्सिंग होम की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठने लगे हैं। स्वास्थ्य विभाग ने संकेत दिए हैं कि अन्य निजी अस्पतालों और क्लीनिकों की भी निगरानी और जांच तेज की जाएगी, ताकि बिना मानक और बिना योग्य चिकित्सकों के इलाज करने वाले संस्थानों पर कार्रवाई की जा सके। उधर नवजात शिशु की मौत के बाद न्याय की मांग कर रहे पीड़ित परिवार की निगाहें अब पुलिस की आगे की जांच और आरोपियों पर होने वाली कार्रवाई पर टिकी हुई हैं। क्या बोले अधिकारी स्वास्थ्य विभाग के नैदानिक स्थापना के नोडल अधिकारी डॉ. मानवेन्द्र पाल ने बताया कि 27 जून की रात हुई संयुक्त छापेमारी के दौरान प्रवीण कुमार यादव अस्पताल में मौजूद मिला था। इस संबंध में थाना इटवा को विस्तृत तहरीर भेजी गई है। उपलब्ध तथ्यों के आधार पर उसके नाम को मुकदमे में शामिल करने तथा आवश्यक धाराओं में वृद्धि किए जाने की संस्तुति की गई है। अब आगे की कार्रवाई पुलिस स्तर से की जाएगी।
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