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    भारत केंद्रित एआई टूल्स बनाए BHU:अनुप्रिया पटेल बोली - एआई से इलाज में सुरक्षा, जिम्मेदारी व नैतिकता जरूरी

    9 hours ago

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    केंद्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण राज्य मंत्री ने कहा कि वर्ष 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य को हासिल करने के लिए मजबूत स्वास्थ्य सेवा प्रणाली अनिवार्य है। वह रविवार को बीएचयू के केएन उडुप्पा सभागार में आयोजित ‘नेशनल कॉन्फ्रेंस ऑन आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस इन हेल्थ केयर ऐंड एजुकेशन’ के उद्घाटन सत्र को संबोधित कर रही थीं। 146 करोड़ आबादी के हिसाब से बने टूल उन्होंने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) के विकास और उपयोग में अमेरिका और चीन के बाद भारत तीसरा प्रमुख देश है। हालांकि पश्चिमी देशों की जनसंख्या और भौगोलिक परिस्थितियां भारत से भिन्न हैं। ऐसे में हमें देश की 146 करोड़ आबादी को ध्यान में रखते हुए एआई टूल्स विकसित करना होगा। उन्होंने आईएमएस-बीएचयू को इस दिशा में कार्य करने का आह्वान करते हुए हर संभव सहयोग का आश्वासन दिया। 20 प्रतिशत वैश्विक रोग भार का दायित्व भी भारत पर है- अनुप्रिया केंद्रीय मंत्री ने कहा कि एआई डॉक्टरों का विकल्प नहीं हो सकता, बल्कि यह एक सहायक उपकरण है। एआई आधारित उपचार के साथ मरीजों के डेटा की सुरक्षा के लिए मजबूत ढांचा मौजूद है। देश में एआई के लिए स्पष्ट रणनीति नीति, पर्सनल डेटा एक्ट तथा एथिकल और रिस्पॉन्सिबल यूज ऑफ एआई से संबंधित दिशानिर्देश लागू हैं। उन्होंने कहा कि जब भारत अपना एआई मॉडल दुनिया के सामने प्रस्तुत करेगा, तो अनेक देश उससे सीख ले सकेंगे। उन्होंने बताया कि विश्व की 18 प्रतिशत आबादी भारत में रहती है और 20 प्रतिशत वैश्विक रोग भार का दायित्व भी भारत पर है। संसाधनों की कमी और विशेषज्ञों के अभाव जैसी चुनौतियों के बावजूद केंद्र सरकार ने पिछले 12 वर्षों में स्वास्थ्य क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य किए हैं। सेंटर ऑफ एक्सीलेंस पर काम केंद्रीय राज्य मंत्री ने कहा कि भारत ने स्वास्थ्य क्षेत्र में एआई का इंटीग्रेशन किया है। उन्होंने बताया कि रोग निगरानी, रोकथाम, निदान और उपचार तक इसे पूरी तरह लागू किया जा रहा है। इसके अलावा, एम्स नई दिल्ली और एम्स ऋषिकेश समेत तीन अन्य संस्थाओं को एआई का सेंटर ऑफ एक्सीलेंस के रूप में विकसित किया गया है। भारत सरकार के मंत्रालय, शोध संस्थान और निजी क्षेत्र मिलकर एआई की क्षमता को बढ़ा रहे हैं।
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