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    भारत-नेपाल दोहरी नागरिकता, अब पूरी चेन रडार पर:पुलिस मोबाइल लोकेशन, फर्जी दस्तावेजों की फोरेंसिक जांच कर रही

    1 hour ago

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    बलरामपुर में भारत-नेपाल दोहरी नागरिकता प्रकरण में जांच का दायरा बढ़ गया है। अब यह केवल नामजद आरोपियों तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे नेटवर्क की परतें खुलने की उम्मीद है। पुलिस ने मामले की हर कड़ी जोड़ने के लिए छह विशेष टीमें गठित की हैं, जो तकनीकी, डिजिटल और दस्तावेजी साक्ष्यों पर काम कर रही हैं। शुरुआती जांच में 27 लोगों के नाम सामने आए थे। इनमें से एक की मृत्यु हो चुकी है और एक अन्य का पता नहीं चल सका है। इस आधार पर 3 जुलाई को जरवा कोतवाली में 25 लोगों के खिलाफ नामजद मुकदमा दर्ज किया गया था। अब पुलिस उन सभी लोगों की भूमिका की जांच कर रही है, जिन्होंने भारतीय पहचान पत्र बनवाने, सत्यापन कराने या अन्य किसी भी स्तर पर सहयोग किया है। जांच की अहम जिम्मेदारी सर्विलांस और साइबर सेल को सौंपी गई है। सर्विलांस टीम मोबाइल नंबरों, कॉल डिटेल, लोकेशन और आपसी संपर्कों का विश्लेषण कर रही है। वहीं, साइबर सेल ऑनलाइन आवेदन, ई-मेल, डिजिटल रिकॉर्ड और अन्य इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों की गहनता से जांच में जुटी है। फोरेंसिक टीम दस्तावेजों की वैज्ञानिक पड़ताल करेगी। इसका उद्देश्य यह पता लगाना है कि कहीं रिकॉर्ड में छेड़छाड़, फर्जी प्रविष्टियां या तकनीकी स्तर पर कोई हेरफेर तो नहीं किया गया है। क्राइम ब्रांच और स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप (एसओजी) पूरे नेटवर्क की कड़ियां जोड़ने में लगे हैं। उनका मुख्य ध्यान उन व्यक्तियों तक पहुंचना है, जिन्होंने पहचान संबंधी दस्तावेज तैयार कराने या सत्यापित कराने में भूमिका निभाई है। जरवा पुलिस गवाहों के बयान दर्ज करने और दस्तावेजी साक्ष्य एकत्र करने की प्रक्रिया को आगे बढ़ा रही है। सूत्रों के अनुसार, जांच का एक महत्वपूर्ण पहलू रिजवान गली के पते के इस्तेमाल, दस्तावेजों के सत्यापन की प्रक्रिया और नेपाल के दांग जिले के कोयलाबास क्षेत्र से जुड़े लोगों की भूमिका है। इन सभी बिंदुओं की गहन पड़ताल की जा रही है। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए, पूरी विवेचना की निगरानी अपर पुलिस अधीक्षक (एएसपी) स्तर से की जा रही है। संबंधित क्षेत्राधिकारी भी नियमित रूप से समीक्षा कर रहे हैं।
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