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    'भूसा दान करें टीचर, नहीं तो होगा एक्शन':बरेली में बेसिक शिक्षा विभाग का आदेश, शिक्षक बोले- कल से गोबर उठाने के लिए कहेंगे

    11 hours ago

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    बरेली में बेसिक शिक्षा विभाग के एक नए आदेश से शिक्षकों में गुस्सा है। वर्तमान में जनगणना का काम कर रहे शिक्षक अब बेसहारा गोवंश के लिए भरण-पोषण के लिए भूसे का इंतजाम करेंगे। हर स्कूल को 46 किलो और हर खंड को कुल 100 क्विंटल भूसा जुटाने की जिम्मेदारी दी गई है। भूसा खंड विकास अधिकारी या पशु चिकित्सा अधिकारी के कार्यालय में जमा कराना होगा। चेतावनी- काम में लापरवाही पर सख्त एक्शन होगा बेसिक शिक्षा अधिकारी (BSA) ने डीएम के आदेश का हवाला देते हुए सभी खंड शिक्षा अधिकारियों (BEO) को इस काम में जुट जाने के लिए कहा है। लेटर में साफ कहा गया है कि नियम का उल्लंघन करने वाले स्कूलों और शिक्षकों पर कड़ी विभागीय कार्रवाई की जाएगी। डीएम का कहना है कि उन्हें इस आदेश की जानकारी नहीं है। हालांकि उन्होंने यह जरूर कहा कि गोवंश संरक्षण को लेकर प्रशासन हर स्तर पर प्रयास कर रहा है। वहीं, शिक्षकों में इस नए आदेश को लेकर गुस्सा है। शिक्षकों ने कहा, वर्कलोड अधिक होने के कारण शिक्षक पहले से तनाव में हैं। अब ऊपर से ऐसे गैर-व्यावहारिक आदेश उन्हें और अधिक पीड़ित कर रहे हैं। आज भूसा देने का दबाव डाल रहे हैं, कल गोबर उठाने का आदेश दे देंगे। नवाबगंज खंड शिक्षा अधिकारी की तरफ से जारी आदेश पढ़िए… अब जानिए पूरा मामला… शिक्षकों को भूसे खरीद की रसीद भी जमा करनी होगी बेसिक शिक्षा विभाग की ओर से लेटर जारी होने के बाद नवाबगंज, भोजीपुरा और भुता क्षेत्र के खंड शिक्षा अधिकारियों ने अपने-अपने स्तर से निर्देश जारी किए। 22 मई को नवाब के खंड शिक्षा अधिकारी की तरफ से जारी हुआ लेटर सोशल मीडिया पर वायरल है। आदेश की कॉपी बीएसए और पशु चिकित्सा अधिकारी को भी भेजी गई है। विभाग ने शिक्षकों से साफ कहा है कि सभी विद्यालय अपने स्तर से भूसे की व्यवस्था कर निर्धारित कार्यालयों में जमा कराएं। भूसा जमा होने के बाद उसकी रसीद कार्यालय में उपलब्ध कराना भी अनिवार्य किया गया है, ताकि लक्ष्य की निगरानी की जा सके। प्रशासन ने इस काम को एक सप्ताह के भीतर पूरा करने के निर्देश दिए हैं। डीएम ने सफाई दी, बोले- गोवंश की देखभाल सरकार की प्राथमिकता डीएम अविनाश सिंह ने बताया, प्रदेश में बेसहारा गोवंश को अस्थायी और स्थायी गौशालाओं में रखकर उनकी देखभाल की जा रही है। जो गोवंश खुले में घूमते हैं, उन्हें भी लगातार गौशालाओं तक पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है। इसी उद्देश्य से नई गौशालाओं का निर्माण भी कराया जा रहा है। उन्होंने लोगों से अपनी आर्थिक क्षमता के अनुसार गौशालाओं में भूसा दान करने की अपील की। कहा, प्रशासन की ओर से हर ब्लॉक में भूसा बैंक बनाया गया है, ताकि जरूरत पड़ने पर गोवंश के लिए चारे की कमी न हो। गौशालाओं में हरा चारा और भूसे की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए चारागाह विकसित किए जा रहे हैं। साथ ही किसानों से हरा चारा खरीदने की व्यवस्था भी की गई है, ताकि गोवंश के भरण-पोषण में किसी तरह की परेशानी न आए। अधिकारियों से भी गोवंश गोद लेने की अपील डीएम अविनाश सिंह ने कहा, उम्र बढ़ने के साथ जो गोवंश बीमार और बूढ़े हो जाते हैं, उनकी देखभाल के लिए पशु चिकित्सकों और जिला स्तरीय टीम की निगरानी में लगातार काम किया जा रहा है। सरकारी अधिकारियों से भी स्वेच्छा से एक-एक गोवंश गोद लेने की अपील की, ताकि उन्हें बेहतर संरक्षण मिल सके। इस अभियान में एनजीओ और सामाजिक संगठनों का भी सहयोग लिया जाएगा। साथ ही समाज के प्रबुद्ध वर्ग से आगे आकर इस पुण्य कार्य में भागीदारी करने की अपील की गई है। शिक्षक आदेशों का पालन नहीं कर रहे थे नवाबगंज के खंड शिक्षा अधिकारी (बीईओ) सत्यदेव ने बताया- शिक्षक आदेशों का पालन नहीं कर रहे थे, इसलिए पहले भूसा देने का निर्देश अनिवार्य रूप से जारी किया गया था और पालन न करने पर कार्रवाई की बात कही गई थी। ये आदेश मेरा नहीं, बल्कि बीएसए डॉ. विनीता का था। अब तक एक भी कुंतल भूसा प्राप्त नहीं हुआ है। जैसे कई बार बच्चों को स्कूल भेजने के लिए अभिभावकों को डांटना पड़ता है, वैसे ही यह निर्देश दिया गया था। हालांकि, बाद में आदेश संशोधित कर दिया गया है। बेसहारा गोवंश के भरण-पोषण के लिए भूसा दान पूरी तरह स्वैच्छिक है, इसमें किसी तरह का दबाव या बाध्यता नहीं है। शिक्षकों का क्या कहना है पढ़िए…. 'आज भूसा देने का दबाव, कल गोबर उठाने के आदेश देंगे' यूनाइटेड टीचर्स एसोसिएशन (यूटा) के जिलाध्यक्ष और प्रदेश उपाध्यक्ष भानु प्रताप सिंह ने इस आदेश पर कड़ा ऐतराज जताया है। उन्होंने कहा- शिक्षकों का मुख्य काम शिक्षण कार्य है, न कि भूसा इकट्ठा करना। यदि इस तरह के अव्यवहारिक आदेशों को नहीं रोका गया, तो शिक्षक संगठन विरोध प्रदर्शन करने को मजबूर होंगे। आज भूसा देने के दबाव डाला जा रहा है, कल गोबर उठाने का आदेश दिया जाएगा। आदेश जारी करने से पहले विभाग को सोचना चाहिए यूटा के मीडिया प्रमुख सतेंद्र पाल सिंह ने कहा- शिक्षकों पर थोपे जा रहे इस तरह के आदेश पूरी तरह से अवैधानिक हैं। भविष्य में ऐसे आदेश जारी करने से पहले विभाग को सोचना चाहिए कि क्या यह कार्य शिक्षकों का है। शिक्षक पहले ही अन्य प्रशासनिक कार्यों में व्यस्त हैं। पूरे प्रदेश में इसका विरोध प्रदर्शन किया जाएगा जिला उपाध्यक्ष रमेश मौर्या ने कहा- इस प्रकार के आदेश शिक्षकों की गरिमा के पूरी तरह विपरीत हैं। यदि ऐसे आदेश लागू किए जाते हैं, तो संगठन के स्तर से पूरे प्रदेश में इसका विरोध प्रदर्शन किया जाएगा। शिक्षकों को उनके मूल कार्य, यानी शिक्षा देने से नहीं भटकाया जाना चाहिए। जिला कोषाध्यक्ष हेमंत कुमार ने कहा- वर्तमान में शिक्षक जनगणना जैसे महत्वपूर्ण कार्यों में पूरी ईमानदारी के साथ लगे हुए हैं। वर्कलोड अधिक होने के कारण शिक्षक पहले ही तनाव में हैं और अब ऊपर से ऐसे गैर-व्यावहारिक आदेश उन्हें और अधिक पीड़ित कर रहे हैं। उन्होंने प्रशासन से अपील की कि शिक्षकों पर ऐसे अतिरिक्त कार्य न थोपे जाएं। शिक्षक गरिमा के खिलाफ है भूसा दान का आदेश टीचर राखी गंगवार ने कहा कि गोवंश के लिए भूसा दान कराने का आदेश शिक्षक गरिमा के खिलाफ है। शिक्षकों का मुख्य कार्य बच्चों को पढ़ाना है, लेकिन उन पर लगातार दूसरे विभागीय काम भी थोपे जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि शिक्षक पहले से ही जनगणना, बीएलओ ड्यूटी, वोटर लिस्ट, मतगणना और चुनाव जैसे महत्वपूर्ण कार्य पूरी जिम्मेदारी से कर रहे हैं। ऐसे में शिक्षकों से भूसा इकट्ठा करने और घर-घर जाकर मांगने का काम कराना पूरी तरह अनुचित है। राखी गंगवार ने कहा कि किसान खुद भूसा भंडारण की समस्या से जूझ रहे हैं और उनके पास अपने पशुओं के लिए ही सीमित भूसा है। उन्होंने साफ कहा कि शिक्षक जरूरी विभागीय आदेशों का पालन करते हैं, लेकिन गलत और फिजूल आदेशों का विरोध जारी रहेगा। --------------- ये खबर भी पढ़ें- प्रेमानंद महाराज ने 10 दिन बाद पदयात्रा शुरू की:हजारों भक्तों ने 'राधे-राधे' के जयकारे लगाए; एक किमी पैदल चले मथुरा में संत प्रेमानंद महाराज ने एक बार फिर पदयात्रा शुरू कर दी। 10 दिन बाद वह केली कुंज आश्रम से निकलकर NRI ग्रीन बिल्डिंग के सामने पहुंचे और फिर अपने शिष्यों के साथ पदयात्रा शुरू की। पढ़ें पूरी खबर…
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