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    BHU के 7 पीएचडी शाेधार्थियों का LOTUS कार्यक्रम में चयन:भारत- जापान के बीच द्विपक्षीय शोध सहयोग को सुदृढ़ करने की है संयुक्त पहल

    3 hours ago

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    भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (बीएचयू), वाराणसी के 7 पीएचडी शोधार्थियों का प्रतिष्ठित LOTUS कार्यक्रम (India–Japan Circulation of Talented Young Researchers in Science) के लिए चयन हुआ है। दरअसल, इसमें देशभर के विभिन्न शैक्षणिक एवं शोध संस्थानों से कुल 285 शोधार्थियों का चयन किया गया है, जिनमें से सात शोधार्थी आईआईटी (बीएचयू) से हैं। दरअसल, LOTUS कार्यक्रम भारत और जापान के बीच द्विपक्षीय शोध सहयोग को सुदृढ़ करने तथा प्रतिभाशाली युवा वैज्ञानिकों के वैश्विक आदान-प्रदान को प्रोत्साहित करने के लिए संचालित एक संयुक्त पहल है। इस कार्यक्रम के अंतर्गत चयनित भारतीय शोधार्थियों को जापान के विश्वविद्यालयों एवं शोध संस्थानों में उन्नत शोध कार्य करने का अवसर प्रदान किया जाएगा, जहां उनका मार्गदर्शन भारतीय एवं जापानी संकाय सदस्यों द्वारा संयुक्त रूप से होगा। यह पहल दीर्घकालिक शैक्षणिक साझेदारी को बढ़ावा देने के साथ-साथ नवाचार एवं वैज्ञानिक उत्कृष्टता को भी प्रोत्साहित करती है। BHU के इन शोधार्थियों का चयन प्रो. संतोष के. सिंह, प्रोफेसर-इन-चार्ज (अंतरराष्ट्रीय संबंध), आईआईटी (बीएचयू), ने बताया कि कुछ का उद्देश्य जापान की वैज्ञानिक एवं तकनीकी क्षमताओं को सुदृढ़ करना तथा भारत के प्रतिभाशाली शोधार्थियों को संयुक्त शोध गतिविधियों से जोड़ना है। उन्होंने कहा कि देशभर में चयनित 285 शोधार्थियों में से सात का IIT (बीएचयू) से चयन होना संस्थान की सशक्त शोध संस्कृति, उत्कृष्ट मार्गदर्शन व्यवस्था तथा वैश्विक स्तर पर बढ़ती पहचान को दर्शाता है। यह उपलब्धि संस्थान की अंतरराष्ट्रीय सहयोग नीति को और मजबूती प्रदान करती है। निदेशक बोले- वैश्विक मंच पर प्रतिभा दिखाएंगे ये शोधार्थी निदेशक प्रो. अमित पात्रा ने कहा कि LOTUS कार्यक्रम के लिए हमारे सात शोधार्थियों का चयन संस्थान की शोध उत्कृष्टता और अंतरराष्ट्रीय प्रतिष्ठा का प्रमाण है। यह उपलब्धि न केवल चयनित शोधार्थियों के लिए, बल्कि पूरे आईआईटी (बीएचयू) परिवार के लिए गर्व का विषय है। भारत–जापान के बीच वैज्ञानिक सहयोग नवाचार और प्रौद्योगिकी विकास के नए आयाम स्थापित करेगा तथा हमारे शोधार्थियों को वैश्विक मंच पर अपनी प्रतिभा प्रदर्शित करने का अवसर प्रदान करेगा। उन्होंने कहा कि यह उपलब्धि भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (बीएचयू), वाराणसी की वैश्विक शैक्षणिक उपस्थिति और शोध उत्कृष्टता को और सुदृढ़ करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर सिद्ध होगी।
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