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    बरेली की 1300 मस्जिदों में हुई अलविदा की नमाज:नम आंखों से बोले नमाजी- 'अलविदा या माहे रमजान' अमन-चैन के लिए उठीं हजारों दुआएं

    1 hour ago

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    इबादत, रहमत और मगफिरत का मुकद्दर महीना 'माहे रमजान' अब विदाई की दहलीज पर है। शुक्रवार को बरेली जनपद की 1300 से अधिक मस्जिदों में अलविदा जुमे की नमाज पूरी अकीदत और एहतराम के साथ अदा की गई। शहर की ऐतिहासिक जामा मस्जिद से लेकर दरगाह आला हजरत तक, हर तरफ नमाजियों की कतारें नजर आईं। नमाज के बाद जब दुआ के लिए हाथ उठे, तो हर लब पर मुल्क की तरक्की, अमन-चैन और आपसी भाईचारे की ही कामना थी। इबादत का सवाब 70 गुना, गुनाहों की मांगी माफी कोतवाली स्थित मोती मस्जिद के हाफ़िज़ चाँद खान ने रमजान की फजीलत बताते हुए कहा कि इस पाक महीने में नफिल का सवाब फर्ज के बराबर और फर्ज का सवाब 70 गुना बढ़ जाता है। अलविदा की नमाज के दौरान नमाजियों की आंखें इस बात पर नम थीं कि बरकतों का यह महीना अब जुदा हो रहा है। नमाजियों ने अल्लाह से अपने गुनाहों की माफी और नेक अमलों की कबूलियत की दुआ मांगी। 5 जुमों का खास संयोग, मस्जिदों में उमड़ा जनसैलाब सिविल लाइन्स स्थित नौमहला शरीफ मस्जिद के इमाम मुफ्ती अब्दुल बाकी ने बताया कि इस साल रमजान में 5 जुमे पड़ना एक विशेष संयोग है। उन्होंने खुतबे में रमजान की अहमियत पर रोशनी डालते हुए कहा कि इबादत का यह सिलसिला साल भर जारी रहना चाहिए। मस्जिदें जिस तरह आज आबाद रहीं, वैसे ही पांचों वक्त की नमाज का क्रम बना रहना चाहिए। इंसानियत और भाईचारे का पैगाम बरेली हज सेवा समिति के संस्थापक पम्मी खाँ वारसी ने मस्जिदों के बाहर नमाजियों का इत्र लगाकर इस्तकबाल किया और मुसाफा कर मुबारकबाद दी। उन्होंने अपील की कि जिस तरह रमजान में हम पड़ोसियों और जरूरतमंदों का ख्याल रखते हैं, वही इंसानियत साल के बाकी महीनों में भी दिखनी चाहिए। उन्होंने सहरी और इफ्तारी के वक्त दिखाए गए संयम और सेवा भाव को जीवन का हिस्सा बनाने पर जोर दिया। साफ-सफाई और सुरक्षा के रहे कड़े बंदोबस्त नौमहला शरीफ के नायब इमाम मौलाना हसन रजा पुर्नवी ने सफाई की महत्ता पर जोर दिया। वहीं, प्रशासन की ओर से सुरक्षा के इतने कड़े प्रबंध थे कि संवेदनशील इलाकों में परिंदा भी पर नहीं मार सका। नगर निगम की ओर से मस्जिदों के रास्तों पर विशेष सफाई अभियान चलाया गया, जिससे नमाजियों को सहूलियत रही।
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