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    बरेली में 20 लाख का पर्सनल लोन लेकर फंसे पीड़ित:अब बैंक के दबाव में उड़ी नींद, CMD कन्हैया गुलाटी और कुनबे पर 60 से ज्यादा FIR

    4 hours ago

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    कैनविज ग्रुप के सीएमडी कन्हैया गुलाटी और उनके सिपहसालारों ने ठगी का ऐसा मायाजाल बुना कि लोग अपनी जमा-पूंजी लुटा बैठे। पीड़ित भूपेंद्र कुमार ने बताया कि कंपनी के फाउंडर के साले देवेश सिंह ने उन्हें होटल में डिनर पार्टी के बहाने बुलाया। वहां कन्हैया गुलाटी और प्रमोद परिहार ने केएमएस एसोसिएट (KMS Associate) के जरिए रिसॉर्ट, रियल एस्टेट और ग्रोसरी स्टोर में निवेश पर 5% मासिक रिटर्न का झांसा दिया। भूपेंद्र ने बैंक से 20 लाख रुपये का पर्सनल लोन लेकर आरटीजीएस के जरिए निवेश किया, लेकिन अब कंपनी दफ्तर पर ताला लटका है और बैंक की ईएमआई बाउंस होने से उनकी रातों की नींद उड़ चुकी है। लाखों लोगों से हजारों करोड़ की लूट, बड़े वजूद का दिया हवाला ठगी का शिकार हुए एक अन्य पीड़ित ने बताया कि कंपनी के लोग खुद को 15 साल पुराना बताकर लोगों का भरोसा जीतते थे। निवेश के 2 साल बाद मूलधन वापसी का वादा किया जाता था। पीड़ित विशाल के मुताबिक, जिस तरह से देशभर से लोग सामने आ रहे हैं, यह घोटाला हजारों करोड़ का हो सकता है। अकेले विशाल के साथ जुड़े 40 लोगों के करीब 2.5 करोड़ रुपये फंसे हुए हैं। पीड़ितों का कहना है कि कंपनी ने अपने ऑफिस को भी बेच दिया है और अब वहां कोई जवाब देने वाला नहीं है। गुलाटी परिवार और करीबियों पर कानूनी शिकंजा ​धोखाधड़ी के इस खेल में कैनविज ग्रुप के सीएमडी कन्हैया लाल गुलाटी, उनका पूरा परिवार, योगेंद्र गंगवार और प्रमोद परिहार मुख्य आरोपी बनाए गए हैं। पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, अब तक अलग-अलग थानों में 60 से अधिक मुकदमे दर्ज किए जा चुके हैं। आरोपियों ने लोगों को मोटे मुनाफे का लालच देकर निवेश कराया और फिर ऑफिस बंद कर चंपत हो गए। पुलिस की कार्रवाई पर सवाल: 'सिर्फ कागजी खानापूर्ति, गिरफ्तारी कब?' एसएसपी अनुराग आर्य ने मामले की जांच के लिए दो एसआईटी (SIT) तो गठित कर दी हैं, लेकिन पीड़ितों में पुलिस की कार्यप्रणाली को लेकर भारी आक्रोश है। पीड़ितों का आरोप है कि पिछले 6-7 महीनों से मुकदमे दर्ज हो रहे हैं, लेकिन अब तक कंपनी के किसी मुख्य व्यक्ति की गिरफ्तारी नहीं हुई है। पीड़ितों का कहना है कि पुलिस उन्हें थाने बुलाकर कागजी सबूत तो मांगती है, लेकिन ठोस कार्रवाई के नाम पर हाथ खाली हैं। गिरफ्तारी न होने के कारण कन्हैया गुलाटी और उसके गैंग के हौसले बुलंद बने हुए हैं।
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