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    बरेली में करोड़ों का GST फर्जीवाड़ा, ITC रैकेट का भंडाफोड़:फर्जी फर्म बनाकर डकारे सरकारी राजस्व के 59 लाख रुपए; एसआईटी ने घेराबंदी कर दो गुर्गों को दबोचा

    19 hours ago

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    यूपी के बरेली में जीएसटी चोरी और फर्जी इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) के जरिए सरकार को करोड़ों का चूना लगाने वाले एक बड़े गिरोह का पर्दाफाश हुआ है। क्राइम ब्रांच और थाना किला पुलिस की संयुक्त एसआईटी टीम ने सोमवार को कार्रवाई करते हुए इस रैकेट से जुड़े दो शातिरों को गिरफ्तार किया है। जांच में सामने आया है कि आरोपियों ने कागजों पर फर्जी कंपनियां खड़ी कर 59 लाख रुपए से अधिक का फर्जी रिफंड डकार लिया। पुलिस अब इस सिंडिकेट के मास्टरमाइंड फरजान हाशमी की तलाश में जुटी है, जो फिलहाल फरार चल रहा है। अस्तित्वहीन फर्म और बोगस बिलों का खेल इस पूरे घोटाले की नींव किला क्षेत्र के बड़ा बाजार निवासी फरजान हाशमी ने रखी थी। फरजान ने 'एफएस ट्रेडर्स' नाम से एक ऐसी फर्म बनाई, जिसका जमीन पर कोई वजूद ही नहीं था। राज्य कर विभाग की जांच में खुलासा हुआ कि फरजान ने अपने साथियों के साथ मिलकर साजिश रची और कई अन्य बोगस कंपनियों के साथ कागजी सांठगांठ की। इन लोगों ने कूटरचित (फर्जी) GSTR-1 और GSTR-2 तैयार किए और उनके आधार पर विभाग से 59,17,093 रुपए की आईटीसी क्लेम कर ली। यह पैसा सीधे तौर पर सरकारी खजाने की चोरी थी। जब विभाग को शक हुआ, तो प्रशासनिक अधिकारी अनूप कुमार की तहरीर पर सितंबर 2025 में धोखाधड़ी का मुकदमा दर्ज किया गया। व्हाट्सएप चैट और वॉइस रिकॉर्डिंग ने खोली पोल: गिरफ्तार हुए सद्दाम और शाहरुख एसआईटी के मुख्य विवेचक निरीक्षक संजय कुमार धीर और उनकी टीम ने डिजिटल साक्ष्यों और मोबाइल एनालिसिस के जरिए इस गैंग की कड़ी से कड़ी जोड़ी। पुलिस ने सोमवार रात करीब 12:40 बजे किला क्षेत्र से सद्दाम हुसैन और मोहम्मद समद उर्फ शाहरुख को धर दबोचा। पूछताछ में सद्दाम ने कुबूला कि वह फर्जी आईडी वाले सिम कार्ड का इस्तेमाल कर रिटर्न्स दाखिल करता था। पुलिस को सद्दाम के मोबाइल से कई डिलीटेड चैट और वॉइस रिकॉर्डिंग मिली हैं, जिनमें फर्म की लॉगिन आईडी और पासवर्ड साझा किए जा रहे थे। शाहरुख ने स्वीकार किया कि वह मुख्य आरोपी फरजान के इशारे पर फर्जी दस्तावेजों की जालसाजी करता था और फरजान उन्हें काम के बदले नकद हिस्सा देता था। एसआईटी की रडार पर 'डिजिटल डेटा': फॉरेंसिक लैब भेजे जाएंगे मोबाइल पुलिस टीम ने दोनों के कब्जे से दो मोबाइल फोन बरामद किए हैं। इन फोन में 1 अगस्त 2025 की कुछ ऐसी वॉइस कॉल्स मिली हैं, जिनमें जीएसटी पासवर्ड और लॉगिन को लेकर बातचीत की गई है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि मोबाइल में डिजिटल डेटा बहुत अधिक है और आरोपियों ने पकड़े जाने के डर से पुरानी व्हाट्सएप चैट डिलीट कर दी थी। अब इन मोबाइलों का फॉरेंसिक परीक्षण कराया जाएगा ताकि इस संगठित गिरोह के अन्य सदस्यों और इनके द्वारा बनाई गई अन्य फर्जी फर्मों का विवरण निकाला जा सके। कार्रवाई करने वाली टीम के सदस्य एसएसपी अनुराग आर्य के निर्देशन और एसपी क्राइम के नेतृत्व में गठित इस टीम में निरीक्षक संजय कुमार धीर, उप-निरीक्षक वीरभद्र सिंह, सतेन्द्र कुमार (सर्विलांस सेल), हेड कांस्टेबल सतेन्द्र और विकास कुमार शामिल रहे। पुलिस अब मुख्य आरोपी फरजान हाशमी की गिरफ्तारी के लिए दबिश दे रही है। 5 स्टेप्स में समझिए कैसे चूना लगाता था यह सिंडिकेट एक नज़र में गैंग का कच्चा चिट्ठा
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