Search…

    Saved articles

    You have not yet added any article to your bookmarks!

    Browse articles

    GDPR Compliance

    We use cookies to ensure you get the best experience on our website. By continuing to use our site, you accept our use of cookies, Privacy Policies, and Terms of Service.

    Top trending News
    bharathunt
    bharathunt

    बरेली में पुलिस ने नमाज रोकी...अदालत ने फटकार लगाई:बरेली के DM-SSP को अवमानना नोटिस, घर पर नमाज पढ़ने वालों पर कार्रवाई हुई थी

    11 hours ago

    1

    0

    बरेली में घर में नमाज पढ़ने पर रोक लगाने पर अदालत ने नाराजगी जताई है। इलाहाबाद हाई कोर्ट ने डीएम अविनाश सिंह और एसएसपी अनुराग आर्य को फटकार लगाई है। कोर्ट ने दोनों अधिकारियों को अवमानना का नोटिस जारी कर पूछा है कि उनके खिलाफ कार्रवाई क्यों न की जाए ? जस्टिस अतुल श्रीधरन और जस्टिस सिद्धार्थ नंदन की बेंच ने साफ कहा कि किसी के निजी परिसर में धार्मिक गतिविधि को रोकना कोर्ट के आदेशों का उल्लंघन है। अदालत ने पिछले फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि जैसे ईसाई समुदाय को घरों में प्रार्थना के लिए सरकारी अनुमति की जरूरत नहीं है, वैसे ही यह नियम नमाज पर भी लागू होता है। कोर्ट ने याचिकाकर्ता तारिक खान के खिलाफ किसी भी दंडात्मक कार्रवाई पर रोक लगा दी है। अब अगली सुनवाई 11 मार्च को होगी। मामला बरेली के मोहम्मदगंज गांव का है। इस गांव के एक घर में सामूहिक नमाज पर रोक लगाई गई थी। नमाज पढ़ने वालों पर शांतिभंग की कार्रवाई की गई थी। उसके बाद गांव के कुछ हिंदू परिवार ने नमाज का विरोध जताते हुए अपने घरों पर मकान बिकाऊ है लिख दिया। पुलिस ने हालात को संभाला। यह 2 तस्वीर देखिए… अब विस्तार से जानिए पूरा मामला… गांव में मस्जिद नहीं, घराें में जुमा की नमाज मोहम्मदगंज गांव की आबादी करीब 1200 है। यहां 65 फीसदी हिंदू और 35 फीसदी मुस्लिम आबादी रहती है। गांव में कोई मस्जिद नहीं है। पहले लोग जुमा की नमाज के लिए आसपास के गांव जाया करते थे। फिर गांव में ही एक घर में नमाज अदा करनी शुरू कर दी। हर शुक्रवार को जुमा की नमाज एक एक घर में पढ़ने लगे। जिस घर में नमाज होती है, वह गांव के ही हसीन नाम के व्यक्ति का है। हसीन दूसरे घर में रहते हैं। जिस मकान में नमाज होती है, वह अलग है। इसका निर्माण पूरा नहीं हुआ है। यहां काफी समय से शुक्रवार को जुमा की नमाज होती है। गांव के लोग इकट्‌ठा होकर नजाम पढ़ते हैं। इसकी शिकायत हुई तो पुलिस ने नमाज पर रोक लगा दी। नमाज पढ़ने वालों का चालान कर दिया। इसके बाद मुस्लिम समुदाय के लोग हाईकोर्ट चले गए। जानिए पिछली बार क्या हुआ था… पहली बार एक महीने पहले 16 जनवरी को यह मामला सामने आया था। मोहम्मदपुर के इसी घर में जुमा की नमाज अदा करने का वीडियो सामने आया था। नमाज के दौरान किसी ने वह वीडियो बनाकर पुलिस तक पहुंचा दिया। अगले दिन पुलिस ने वीडियो में दिख रहे लोगों की पहचान कर 12 लोगों का चालान किया। कुछ दिन तक उस घर में नमाज नहीं हुई, अब पिछले शुक्रवार 13 फरवरी को उसी घर में फिर से नमाज हुई। किसी ने इसका वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर पोस्ट कर दिया।नजाम पढ़े जाने से गांव के हिंदू समुदाय में नाराजगी है। हिंदू आबादी का ऐतराज, नई परंपरा का विरोध हिंदू आबादी ने इस पर ऐतराज जताया। उनकी शिकायत है कि घर में नमाज पढ़ने की नई परंपरा डाली गई है। पहले ऐसा नहीं होता था। ग्रामीणों का कहना है कि गांव में न तो कोई मस्जिद है और न ही मंदिर। ऐसे में घरों को इबादतगाह में बदलना एक नई परंपरा की शुरुआत है, जिसका वे विरोध कर रहे हैं। इसी से नाराज होकर हिंदू आबादी ने विरोध में गांव से पलायन करने का ऐलान कर दिया। इसके लिए बाकायदा अपने-अपने घरों के बाहर चॉक से मकान बिकाऊ है लिख डाला। इसकी जानकारी मिलते ही पुलिस वहां पहुंची। दोनों के पक्ष के लोगों को समझाया गया। मुस्लिम पक्ष का तर्क, ‘इबादत करना गुनाह नहीं' इस पूरे मामले पर मुस्लिम समुदाय के लोगों का तर्क बिल्कुल अलग है। उनका कहना है कि गांव में इबादत के लिए कोई सार्वजनिक स्थान या मस्जिद नहीं है। ऐसे में अपने निजी घरों में खुदा की इबादत करना कोई अपराध नहीं है। मुस्लिम पक्ष के अनुसार, हिंदू समुदाय बेवजह छोटी बातों को तूल दे रहा है और माहौल खराब करने की कोशिश कर रहा है। फायरिंग के आरोपों को उन्होंने पूरी तरह निराधार और साजिश बताया है। गांव के प्रधान मोहम्मद आरिफ ने कहा कि मस्जिद है, इसीलिए घर में नमाज पढ़ी जाती है। इस पर किसी को ऐतराज नहीं होना चाहिए। गांव में पुलिस तैनात बिशारतगंज थाना प्रभारी (SO) सतीश कुमार ने स्थिति को स्पष्ट करते हुए बताया, गांव में सामूहिक नमाज को लेकर विवाद हुआ था। जिन लोगों ने बिना अनुमति सामूहिक नमाज पढ़ी थी, उन्हें सख्त हिदायत देकर समझा दिया गया है। उन्होंने बताया कि फिलहाल स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में है और शांति व्यवस्था कायम करने के लिए पुलिस बल तैनात किया गया है। किसी को भी कानून हाथ में लेने की इजाजत नहीं दी जाएगी।” ---------------------- इसी गांव में पहले हुए विववाद की यह खबर भी पढ़ें--- खाली मकान में जुमा की नमाज...12 अरेस्ट:बरेली में गांव वालों ने वीडियो बनाकर पुलिस को भेजा, मौके पर नमाज पढ़ते मिले लोगों को पकड़ा बरेली में एक खाली पड़े मकान में बिना अनुमति के सामूहिक नमाज पढ़ने और अस्थायी मदरसा चलाने का मामला सामने आया है। ग्रामीणों की शिकायत पर पुलिस ने 12 लोगों को हिरासत में लिया। उनके खिलाफ शांति भंग की कार्रवाई की गई है। यह मामला बिशारतगंज थाना के मोहम्मदगंज गांव का है। शुक्रवार को हुई नमाज की शिकायत पर रविवार को पुलिस ने कार्रवाई की है। पूरी खबर पढ़ें ---------------- ग्राउंड रिपोर्ट: हिंदू परिवारों ने दी पलायन की चेतावनी हाई कोर्ट में भले ही राहत मिली हो, लेकिन मोहम्मदगंज गांव (विसारतगंज) के हालात तनावपूर्ण हैं। गांव की हिंदू आबादी ने घरों के बाहर 'मकान बिकाऊ है' के पोस्टर लगा दिए हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि गांव में पहले कभी सामूहिक नमाज नहीं होती थी, अब नई परंपरा डाली जा रही है। महिलाओं का कहना है कि नमाज के बहाने भीड़ जुटती है और विरोध करने पर उनके घरों पर पत्थर फेंके जाते हैं और गाली-गलौज की जाती है। समीकरण: बिना मंदिर-मस्जिद वाले गांव में 'अवैध मदरसे' का विवाद करीब 1200 की आबादी वाले इस गांव में 65% हिंदू और 35% मुस्लिम रहते हैं। गांव में कोई भी पंजीकृत धार्मिक स्थल नहीं है। हिंदू पक्ष का दावा है कि एक खाली घर को 'अवैध मदरसा' बनाकर वहां मस्जिद की नींव डालने की कोशिश हो रही है। वहीं, मुस्लिम पक्ष का कहना है कि गांव में मस्जिद न होने के कारण वे जुमे की नमाज एक खाली घर में पढ़ते हैं, जो उनकी मजबूरी है। जांच के लिए बनी संयुक्त टीम विवाद बढ़ने पर बजरंग दल के कार्यकर्ता भी गांव पहुंच गए हैं, जिससे माहौल और गरमा गया है। एसपी साउथ अंशिका वर्मा ने बताया कि एसडीएम और सीओ की एक संयुक्त टीम मामले की जांच कर रही है। पुलिस का कहना है कि गांव में शांति है और पलायन जैसी खबरों को केवल दबाव बनाने का तरीका बताया जा रहा है। फिलहाल, 11 मार्च को होने वाली हाई कोर्ट की सुनवाई पर सबकी नजरें टिकी हैं। गांव का गणित: आबादी और समीकरण कुल आबादी: करीब 1200 हिंदू आबादी: 65% मुस्लिम आबादी: 35% दूरी: बरेली जिला मुख्यालय से 50 किलोमीटर (विसारतगंज थाना क्षेत्र) स्थिति: गांव में किसी भी धर्म का कोई भी पंजीकृत धार्मिक स्थल नहीं है।
    Click here to Read more
    Prev Article
    महिला महाविद्यालय में 2 दिवसीय नेशनल सेमिनार शुरू:111 शोध पत्रों में दिखी बदलते भारत की तस्वीर, अपराध नियंत्रण पर चर्चा की
    Next Article
    डिग्री से पहले 'जिंदगी' बचाना जरूरी:IIT में सेंटर फॉर मेंटल हेल्थ शुरू, 10 काउंसलर्स 24 घंटे तैनात; ईमेल पर भी दे सकेंगे जानकारी

    Related न्यूज Updates:

    Comments (0)

      Leave a Comment