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    महिला महाविद्यालय में 2 दिवसीय नेशनल सेमिनार शुरू:111 शोध पत्रों में दिखी बदलते भारत की तस्वीर, अपराध नियंत्रण पर चर्चा की

    7 hours ago

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    आचार्य नरेंद्रदेव नगर निगम महिला महाविद्यालय में मंगलवार को '21वीं सदी में नागरिक सहभागिता की पुनर्परिभाषा: एक सशक्त लोकतंत्र की ओर' विषय पर दो-दिवसीय राष्ट्रीय सेमिनार का शानदार आगाज हुआ। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि डीआईजी (कानपुर रेंज) हरिश्चंद्र ने दीप प्रज्ज्वलित कर संगोष्ठी की शुरुआत की। युवाओं को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि आज के दौर में डिजिटल प्लेटफॉर्म और सामाजिक आंदोलनों के जरिए युवा वर्ग लोकतंत्र को नई दिशा दे रहा है। उन्होंने अपराध नियंत्रण और सामाजिक अधिकारों को जोड़ते हुए समाधान पर जोर दिया। प्राचार्या प्रो. ऋतंभरा ने अतिथियों का स्वागत करते हुए संगोष्ठी की प्रासंगिकता बताई। इस दौरान 'ग्लोबलाइजेशन इन द 21st सेंचुरी' पुस्तक और सेमिनार की स्मारिका का विमोचन भी किया गया। जेएनयू के मुख्य वक्ता प्रोफेसर शान्तेश कुमार सिंह ने कहा कि समाज का परिदृश्य बदलने के लिए जन-भागीदारी अनिवार्य है। जबकि विशिष्ट वक्ता प्रोफेसर अश्विनी कुमार दुबे ने सरकारी तंत्र और नागरिक सहभागिता के अंतर्संबंधों को रेखांकित किया। संगोष्ठी के विभिन्न सत्रों में वैचारिक विमर्श का दौर चला। प्रो. अनिल मिश्रा ने स्पष्ट किया कि नागरिक सहभागिता केवल अधिकारों तक सीमित न रहकर नैतिक जिम्मेदारियों और कर्तव्यों तक विस्तारित होनी चाहिए। तकनीकी सत्रों में 'ऐतिहासिक जड़ें' और 'डिजिटल संविधानवाद' जैसे विषयों पर गंभीर चर्चा हुई। डॉ. अखिलेश कुमार और डॉ. जयंती सिंह ने स्वतंत्रता संग्राम से लेकर वर्तमान लोकतांत्रिक परंपराओं पर अपने शोध पत्र पढ़े। संयोजक डॉ. आकांक्षा गौर ने बताया कि, इस सेमिनार का मुख्य उद्देश्य जन-संवाद की सतत प्रक्रिया के माध्यम से शोधार्थियों और विद्यार्थियों को एक जिम्मेदार नागरिक की भूमिका से परिचित कराना है। पहले दिन देश के विभिन्न राज्यों जैसे दिल्ली, राजस्थान, बिहार और झारखंड से आए लगभग 111 प्रतिभागियों ने ऑनलाइन और ऑफलाइन माध्यम से अपने शोध पत्र प्रस्तुत किए। कार्यक्रम का संचालन दीक्षा सिंह ने किया और धन्यवाद ज्ञापन डॉ. प्रेरणा प्रिया व डॉ. सबीना अंसारी द्वारा दिया गया। इस अवसर पर महाविद्यालय की शिक्षिकाएं, शोध छात्र और बड़ी संख्या में छात्राएं मौजूद रहीं।
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