Search…

    Saved articles

    You have not yet added any article to your bookmarks!

    Browse articles

    GDPR Compliance

    We use cookies to ensure you get the best experience on our website. By continuing to use our site, you accept our use of cookies, Privacy Policies, and Terms of Service.

    Top trending News
    bharathunt
    bharathunt

    बेटा बोला- पुलिस थाने में पापा को पीट रही थी:उनकी चीखें बाहर तक सुनाई दे रही थी; एटा में 21 साल बाद दरोगा-सिपाही को उम्रकैद

    15 hours ago

    1

    0

    ''मेरे गांव में प्रधानी का इलेक्शन था। पिताजी अहिबरन के पक्ष को सपोर्ट कर रहे थे। रिजल्ट आया तो अहिबरन की जीत हुई। हारी हुई प्रत्याशी मुन्नी ने हमारे घर के बाहर फायरिंग करवा दी। फिर पुलिस बुलवा ली, जो पिताजी को उठा ले गई। मैं रात में खाना लेकर थाने गया तो पुलिस उन्हें पीट रही थी। पापा चीख-चिल्ला रहे थे। लेकिन पुलिस ने हमें देखने नहीं दिया। कहा कि भागो यहां से, नहीं तुमको भी मार डालेंगे।" ये बातें 21 साल पहले पुलिस कस्टडी में मारे गए मोहरपाल के बेटे सुनील ने बताईं। एटा में कोर्ट ने 12 अगस्त (बुधवार) को आरोपी दरोगा और सिपाही को उम्रकैद की सजा सुनाई है। परिवार को इंसाफ मिलने में 21 साल लग गए। 6 बच्चों को पालते हुए पत्नी ने केस की पैरवी भी की, जिसमें खेत तक बिक गए। दैनिक भास्कर की टीम जिला मुख्यालय से 32 किमी दूर बहगों गांव पहुंची। पत्नी और बेटे से बातचीत की और परिवार के संघर्षों को जाना। बेटे का कहना है कि कोर्ट के फैसले का सम्मान है, लेकिन आरोपियों को फांसी होनी चाहिए थी। पढ़िए पूरी रिपोर्ट… प्रधानी का रिजल्ट आने के बाद शुरू हुआ बवाल मामला जैथरा थाना क्षेत्र के गांव बहगों का है। 25 अगस्त, 2005 को प्रधानी के चुनाव का रिजल्ट आया। यहां अहिबरन और मुन्नी देवी के बीच कड़ा मुकाबला था। रिजल्ट में अहिबरन की जीत हो गई। मोहरपाल (40) भी अहिबरन को खुला सपोर्ट कर रहे थे। रिजल्ट आते ही गांव में तनाव की स्थिति बन गई। 26 अगस्त को मुन्नी देवी के समर्थकों ने मोहरपाल के घर के बाहर फायरिंग कर दी। जैथरा थाना प्रभारी मनीष कुमार, दरोगा गजराज सिंह, सिपाही महावीर सिंह, सिपाही सौदान और ड्राइवर मिढ़ई लाल तुरंत गांव पहुंचे। पुलिस ने मोहरपाल उर्फ पप्पू को हिरासत में लिया और थाने ले गए। प्राइवेट गाड़ी में शव डालकर काली नदी में फेंका पुलिस कस्टडी में मोहरपाल के साथ बहुत बुरी तरह मारपीट की गई, जिससे उनकी मौत हो गई। घर वाले मोहरपाल के बारे में जानकारी लेने पहुंचे तो उन्हें थाने से भगा दिया गया। सबूत मिटाने के लिए पुलिस ने मोहरपाल के शव को एक प्राइवेट गाड़ी में डाला और काली नदी में फेंक दिया। मोहरपाल का कुछ पता न चलने पर 28 अगस्त की सुबह हजारों की संख्या में ग्रामीण और परिजन थाने के बाहर इकट्‌ठे हो गए। गुस्साई भीड़ ने थाने पर हंगामा और पथराव शुरू कर दिया। चुनाव का माहौल होने के कारण थाने पर पीएसी बल भी तैनात था। लेकिन स्थिति इतनी ज्यादा बिगड़ी कि पूरा थाना खाली हो गया। भीड़ ने थाने में खड़े वाहन जला दिए उग्र भीड़ ने थाने में आगजनी कर दी, जिससे वहां खड़े कई वाहन जलकर राख हो गए। भीड़ का गुस्सा देखकर उच्चाधिकारियों को वायरलेस संदेश भेजा गया। अधिकारियों के आदेश पर सुरक्षाकर्मियों ने भीड़ को खदेड़ने के लिए सैकड़ों राउंड फायरिंग की। अधिकारियों ने पुलिसकर्मियों के पक्ष में लगाई थी रिपोर्ट इस बवाल के बाद तत्कालीन थाना प्रभारी समेत पांचों पुलिसकर्मियों के खिलाफ हत्या, मारपीट और साक्ष्य मिटाने की धाराओं में प्राथमिकी दर्ज की गई। शुरू में जिले के अधिकारियों ने ही जांच की, लेकिन आरोपियों के पक्ष में फाइनल रिपोर्ट लगा दी। इसके बाद पीड़ित परिवार ने उच्चाधिकारियों से गुहार लगाकर मामले की जांच CBCID से कराने की मांग की। CBCID ने जांच के बाद कोर्ट में चार्जशीट दाखिल की। कोर्ट की सुनवाई के दौरान ही तीन आरोपियों की मौत हो गई। सिपाही सौदान सिंह की सड़क हादसे में मौत हो गई, जबकि तत्कालीन थाना प्रभारी मनीष कुमार और ड्राइवर मिढ़ई लाल की भी बाद में मौत हो गई। 12 अगस्त को कोर्ट ने दरोगा गजराज सिंह और सिपाही महावीर सिंह को उम्रकैद की सजा सुनाई है। अब पढ़िए बेटे ने क्या बताया…. मोहरपाल के 6 बच्चे हैं, जिनमें सबसे बड़ी बेटी उस समय 16 साल की थी। बेटा सुनील (35), उस समय 14 साल का था। सुनील ने बताया कि उस रात थाने में 10 बजे मैं पिताजी को खाना देने गया था। वहां पुलिस उन्हें पीट कर रही थी। मुझे पापा के चिल्लाने की आवाज सुनाई दे रही थी। मैंने दिखवाने के लिए कहा तो पुलिस वालों ने भगा दिया। उन्होंने कहा कि भाग यहां से, नहीं तुमको भी मार डालेंगे। हम डरकर वहां से भागकर अपने घर चले आए। 27 अगस्त की रात चेयरमैन विजेंद्र सिंह ने बताया कि तुम्हारे पिताजी खत्म हो गए हैं। हम लोग फिर से थाने पहुंचे तो उन लोगों ने घुसने नहीं दिया। बोले कि “ऐसी कोई बात नहीं है, भाग जाओ यहां थे।” पुलिस-पीएसी ने 500 राउंड फायरिंग की सुबह फिर दंगा शुरू हो गया। पुलिस-पीएसी वालों ने हम लोगों पर फायरिंग कर दी। गोली एक लड़के को भी लगी थी। 500 राउंड से ज्यादा फायरिंग जनता के ऊपर की गई। डेडबॉडी के लिए इधर से लोग पथराव कर रहे थे। 10 हजार से ज्यादा लोग इकट्‌ठे थे। इसके बाद भी पिताजी की डेडबॉडी नहीं मिली। 4-5 दिन बाद काली नदी के भनौआ घाट पर बॉडी मिली। बेटा बोला- फांसी की सजा होनी चाहिए थी सुनील ने कहा कि कोर्ट ने जो फैसला दिया है वो सही है। लेकिन हम चाहते थे कि मेरे पिताजी मारे गए हैं तो फांसी की सजा उन्हें होनी चाहिए। मेरी मम्मी ने दूसरे के घरों में अनाज पीसती थीं। हमारे यहां सुरक्षा के लिए पुलिस वाले तैनात कर दिए गए थे। मां उन्हें गेहूं की रोटी खिलाती और हमें बाजरा की रोटी। कुछ खेती थी वो बिक गई। किसी तरह से गुजर हो गई, स्थिति तो आज भी हमारी कमजोर है। पत्नी बोली- मुश्किलों में बच्चों को पाला पत्नी गुड्‌डी देवी ने बताया कि 21 साल पहले पुलिस आई थी। मेरे पति को पकड़कर थाने ले गई। वहां पुलिसवालों ने बहुत मारा, जिससे उनकी मौत हो गई। कोर्ट के फैसले से मुझे बहुत राहत मिली। पति के जाने के बाद मैं अपने छोटे-छोटे बच्चों को लेकर दर-दर भटकती रही। बहुत मुश्किलों का सामना करते हुए मैंने उन्हें पाल-पोसकर बड़ा किया है। हमारे पास कोई खेत-खलिहान या जमीन-जायदाद नहीं है। आज भी हमारे परिवार की हालत बहुत कठिन है। बच्चे मजदूरी करके किसी तरह अपना और परिवार का पेट पाल रहे हैं और गुजर-बसर कर रहे हैं। सबसे पहले चेयरमैन ने दी थी मौत की जानकारी तत्कालीन चेयरमैन विजेंद्र सिंह चौहान ने बताया कि बहगों गांव में दो पक्षों के बीच लंबे समय से पार्टीबंदी चल रही थी, जिसमें से एक पक्ष समाजवादी पार्टी से जुड़ा हुआ था। दूसरे पक्ष के कहने पर पुलिस मोहरपाल को थाने ले आई, जबकि उसके खिलाफ कोई अपराध दर्ज नहीं था। मौत के बाद पुलिस द्वारा मोहरपाल के शव को गायब कर दिया गया। अदालत भगवान का रूप होती है। कोर्ट ने गवाहों और सबूतों के आधार पर सही फैसला सुनाते हुए दोषियों को सजा दी है। ------------------ यह खबर भी पढ़ें… थाने में युवक की हत्या, दरोगा-सिपाही को उम्रकैद:एटा कोर्ट ने 21 साल बाद सुनाया फैसला; बेटे ने कहा- खेत बेचकर केस लड़ा एटा में दरोगा गजराज सिंह और सिपाही महावीर सिंह को उम्रकैद की सजा सुनाई गई है। दोनों पर 25-25 हजार रुपए का जुर्माना भी लगाया गया है। दोनों को थाने में युवक की पीट-पीटकर हत्या करने का दोषी पाया गया। पढ़ें पूरी खबर…
    Click here to Read more
    Prev Article
    मुख्यमंत्री योगी अयोध्या पहुंचे, रामकथा पार्क हेलीपैड पर हुआ स्वागत:हनुमानगढ़ी दर्शन के बाद परमहंस को देंगे श्रद्धांजलि, राम नगरी में करीब तीन घंटे रहेंगे
    Next Article
    भाजपा के 20 हजार पर अखिलेश का 40 वाला दांव:डिंपल बोलीं- सरकार ईमान खरीदना चाहती; क्या यूपी चुनाव में बनेगा गेमचेंजर मुद्दा, VIDEO

    Related न्यूज Updates:

    Comments (0)

      Leave a Comment