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    बेटा बना IAS तो मां बोली आशीर्वाद सबसे बड़ा उपहार:रुद्र प्रताप सिंह बोले 7 वर्षों से चल रही थी तैयारी, दिमाग का बोझ हुआ हल्का

    1 hour ago

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    आजमगढ़ के कप्तानगंज थाना क्षेत्र में चेवता गांव में शनिवार को अपने गांव पहुंचने पर UPSC की सिविल सर्विसेज की परीक्षा में 345 रैंक पाने पर रुद्र प्रताप सिंह का पूरे गांव के लोगों ने स्वागत किया। रुद्र प्रताप को मिठाई खिलाकर और माला पहना कर उनका स्वागत किया गया। रुद्र प्रताप के पिता अशोक सिंह सेना से रिटायर हैं और वर्तमान में दीवानी कोर्ट में वकालत करते हैं। जबकि मां नीलम सिंह ग्रहणी हैं। दोनों ने अपने पुत्र की शिक्षा दीक्षा में कोई कमी नहीं होने दी। बेटे की सफलता पर खुशी से गदगद मां नेहा सिंह का कहना है कि आज मैं बहुत खुश हूं। जिस तरह से मेरा बेटा IAS बना है। यह आशीर्वाद का सबसे बड़ा उपहार है। रुद्र प्रताप सिंह बोले 7 वर्षों से चल रही थी तैयारी अपनी सफलता के बारे में रुद्र प्रताप सिंह का कहना है कि विगत 7 वर्षों से तैयारी चल रही थी। आज दिमाग का बोझ हल्का हो गया है। यूपीएससी के अभ्यर्थियों को नसीहत देते हुए रुद्र प्रताप सिंह का कहना है कि एग्जाम के पहले का भी जीवन है। उसके बाद का भी जीवन है ऐसे में सिर्फ यूपीएससी के भरोसे अभ्यर्थी ना रहे। रुद्र प्रताप सिंह का कहना है कि यूपीएससी की तैयारी में भटकाव बहुत आता है। और यदि कोई अभ्यार्थी डिजिटल माध्यम का सही उपयोग करें तो काफी मदद मिलती है। अधिवक्ता अशोक सिंह के रुद्र प्रताप सिंह बड़े पुत्र हैं। छोटे पुत्र डॉ सिद्धार्थ शंकर सिंह BHU से BAMS और MD हैं। रुद्र प्रताप सिंह वर्तमान में मध्य प्रदेश छिंदवाड़ा में आईबी में एसीआईओ वन के पद पर तैनात हैं। आईबी में वह 2018 से ही पोस्टेड है और उनकी पहली पोस्टिंग नागालैंड में थी। बाद में उनको मध्य प्रदेश के टीकमगढ़ भेजा गया। जहां से प्रमोशन होकर छिंदवाड़ा पहुंचे। 2020 के दौरान उन्होंने IB की नौकरी के साथ ही सिविल सर्विसेज की ऑन लाइन तैयारी की। अब चौथे प्रयास में उनको सफलता मिली। इससे पूर्व वह 2023 में एक बार इंटरव्यू तक पहुंचे थे। अगले साल प्रीलिम्स भी नहीं पास कर सके। लेकिन सफलता नहीं मिलने के बाद भी हौसला कम नहीं होने दिया। रुद्र प्रताप ने 2016 में जेके इंस्टीट्यूट ऑफ एप्लाइड फिजिक्स प्रयागराज यूनिवर्सिटी से कंप्यूटर साइंस में बीटेक पास किया था। लेकिन सिविल सर्विसेज की परीक्षा की तैयारी के लिए उन्होंने हिंदी माध्यम से हिंदी लिटरेचर विषय का उपयोग किया। बीटेक संबंधित विषयों से हटकर हिंदी विषय को चुनने पर उन्होंने कहा कि शुरू से उनका पसंदीदा विषय था और उनके लिए यह आसान भी पड़ता। मैथ्स भी ले सकते थे लेकिन यह नौकरी के दौरान तैयार करना कठिन होता। उन्होंने विषय चुनने के लिए सोच समझ कर फैसला लिया। इंटरव्यू में उनसे हिंदी से संबंधित कोई सवाल नहीं हुआ। जबकि ऑपरेशन सिंदूर से लेकर पूर्वोत्तर राज्य में पिछले दिनों हुई हिंसा और अन्य इसी प्रकार से संबंधित सवालों का उन्होंने आधे घंटे तक जवाब दिया।
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