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    बेटी की मौत का बदला लेने के लिए पीट-पीटकर हत्या:प्रयागराज में थाने के पास से किडनैप किया था; ससुर-साला गिरफ्तार

    23 hours ago

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    प्रयागराज में बेटी की मौत का बदला लेने के लिए दामाद के भाई को किडनैप कर पीट-पीटकर मार डाला गया। बुधवार को पुलिस ने युवक के छोटे भाई के ससुर और उसके चचेरे साले को गिरफ्तार किया। पुलिस के अनुसार, 20 अगस्त को कार सवार लोगों ने युवक को अगवा किया था। उसे कौशांबी ले जाकर हत्या करने के बाद शव यमुना नदी में फेंक दिया गया। जिला मुख्यालय से करीब 20 किलोमीटर दूर पूरामुफ्ती थाने के पास से युवक को अगवा किया गया था। युवक मूल रूप से कौशांबी का रहने वाला था। उसके छोटे भाई की पत्नी की संदिग्ध मौत के बाद मायके वालों ने ससुराल पक्ष के खिलाफ FIR दर्ज कराई थी। मामले में युवक के माता-पिता और छोटा भाई जेल में हैं, जबकि युवक फरार चल रहा था। पुलिस के मुताबिक, गिरफ्तार किए गए दोनों आरोपियों ने पूछताछ में हत्या की बात कबूल कर ली है। शव की तलाश यमुना में उस जगह की जा रही है, जहां उसे फेंके जाने की बात सामने आई है। जानिए पूरा मामला… मूल रूप से कौशांबी के महगांव का रहने वाला मोनू कुशवाहा पेशे से ड्राइवर था। वह पार्ट टाइम ड्राइविंग करता था। उसकी शादी हुई थी, लेकिन बच्चे नहीं थे। उसका छोटा भाई राजकुमार प्राइवेट काम करता था। राजकुमार ने करीब एक महीने पहले कौशांबी के कूरा गांव की रहने वाली अनुराधा से प्रेम विवाह किया था। अनुराधा की यह दूसरी शादी थी। उसकी पहली शादी झूंसी में एक कांस्टेबल से हुई थी। अनबन के बाद शादी टूट गई और वह मायके चली गई। इसके बाद उसने राजकुमार से शादी कर ली और उसके साथ रहने लगी। 10 अगस्त को अनुराधा का शव ससुराल में फंदे से लटका मिला था। उसके मायके वालों ने ससुराल पक्ष पर हत्या कर शव को फंदे से लटकाने का आरोप लगाया था। अनुराधा के परिवार की तहरीर पर पति राजकुमार, उसके माता-पिता और जेठ मोनू कुशवाहा के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज की गई। पुलिस ने राजकुमार और उसके माता-पिता को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया, जबकि मोनू फरार चल रहा था। थाने के पास से कार सवारों ने जबरन उठाया, पीट-पीटकर हत्या की 20 अगस्त की दोपहर करीब 12 बजे मोनू पूरामुफ्ती थाने के पास कुशवाहा स्वीट हाउस के सामने खड़ा था। इसी दौरान एक क्रेटा कार वहां पहुंची। उसमें सवार लोग नीचे उतरे और मोनू से मारपीट करने के बाद उसे जबरन कार में बैठाकर ले गए। इसके बाद से उसका कोई पता नहीं चला। पुलिस की शुरुआती जांच के मुताबिक, छोटे भाई के ससुर नेम कुमार ने बेटी की मौत का बदला लेने के लिए मोनू की हत्या की। उसने अपने भतीजे पुनीत के साथ मिलकर मोनू को क्रेटा कार में अगवा किया। दोनों उसे पीटते हुए कौशांबी के महिला घाट ले गए। वहां यमुना नदी पर बने पुल के पास सुनसान जगह पर कार रोकी। पूछताछ में दोनों ने बताया कि कार में ही मोनू को लात-घूंसों से पीटा गया था। पुल के पास उसे नीचे उतारकर डंडे और पटरे से पीटा गया। नेम कुमार ने पटरे से उसके सिर पर कई वार किए, जिससे उसकी मौत हो गई। इसके बाद शव को पुल से यमुना नदी में फेंककर दोनों वहां से भाग गए। यह पुल कौशांबी को चित्रकूट जिले से जोड़ता है। पुलिस अब मोनू के शव की तलाश कर रही है। प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया- कार सवारों ने पहले बात की, फिर जबरन बैठा ले गए असरौली गांव के रहने वाले मोनू के मामा कमलेश कुमार के मुताबिक, 20 अगस्त दोपहर करीब 12 बजे मोनू का अपहरण हुआ था। वह बाइक से जा रहा था, तभी कार सवार लोगों ने उसे रोक लिया। कमलेश के मुताबिक, जब वह घटनास्थल के पास पहुंचे तो वहां मौजूद प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि कार सवारों ने मोनू से कुछ देर बातचीत की। इसके बाद उसे जबरन कार में बैठाया और वहां से भाग गए। जानकारी मिलने पर परिवार के लोग मौके पर पहुंचे और पुलिस को सूचना दी। कमलेश का कहना है कि घटना के बाद से ही परिवार पुलिस से मोनू की तलाश करने की मांग करता रहा, लेकिन उसके बारे में कोई ठोस जानकारी नहीं मिली। परिवार का आरोप है कि घटना वाले दिन पुलिस ने गंभीरता से कार्रवाई नहीं की और युवक के खुद कहीं चले जाने की बात कहती रही। कमलेश ने कहा कि यदि समय रहते पुलिस ने मामले में गंभीरता दिखाई होती तो मोनू के बारे में पहले ही जानकारी मिल सकती थी। घटनास्थल के पास मिली छोटे भाई के ससुर की कार जांच के दौरान घटनास्थल के आसपास मोनू के छोटे भाई के ससुर की कार देखे जाने की जानकारी सामने आई। परिवार ने इस पर संदेह जताते हुए ससुराल पक्ष के लोगों की भूमिका की जांच की मांग की थी। पुलिस ने संदिग्ध कार को भी कब्जे में ले लिया है। -------------- यह खबर भी पढ़िए… रेलवे इंजीनियर के दोनों पैर ट्रेन से कटे, तड़प-तड़पकर मौत:आगरा में खुद फोन करके स्टाफ को बताया, दो टुकड़े होने पर भी एकटक देखते रहे आगरा में मंगलवार शाम हुए हादसे में 32 साल के रेलवे इंजीनियर की तड़प-तड़पकर मौत हो गई। उनके दोनों पैर ट्रेन से कटकर अलग हो गए। लेकिन ट्रैक के किनारे पड़े लहूलुहान इंजीनियर बेहोश नहीं हुए। उन्होंने खुद अपने फोन से कॉल करके स्टाफ को हादसे की सूचना दी। रेलवे के जेई मनोज सैनी अपने चारों ओर इकट्ठा भीड़ को एकटक देखते रहे। पुलिस जेई कोअस्पताल ले गई, जहां उनकी मौत हो गई।पूरी खबर पढ़िए
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