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    'बेटे और नई बहू के लिए बनाया था नया घर':झांसी में शादी के 25 दिन पहले हो गई बेटे की हत्या

    9 hours ago

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    झांसी के रक्सा गांव में हुए अंशुल हत्याकांड के बाद उनके घर में मातम पसरा है। अंशुल की 10 मार्च को शादी होनी थी, जिसकी तैयारियां जोरों पर चल रही थीं। पिता ने बेटे और होने वाली बहू के लिए नया मकान भी बनवाया था, जिसमें 11 मार्च को दोनों का गृह प्रवेश कराने की तैयारी थी। इसी बात को याद करते हुए पिता फूट-फूटकर रो पड़े। अंशुल की छोटी बहन कशिश चीख-चीखकर अपने भाई के जाने का दर्द बयां करना चाहती है, लेकिन उसकी आवाज साथ नहीं दे रही। जिस घर में कुछ दिन बाद शहनाइयां बजने वाली थीं, वहां सन्नाटा पसरा है। दरअसल, पूर्व जिला पंचायत सदस्य महेश के बड़े बेटे अंशुल की शादी आगामी 10 मार्च को तय थी। शादी के कार्ड भी छप चुके थे, लेकिन हत्या के बाद वे दुकान पर ही पड़े रह गए। जब दैनिक भास्कर की टीम अंशुल के घर पहुंची, तो पूरे गांव में गम का माहौल था। घर के बाहर परिवार के पुरुष कुर्सियों पर बैठे थे और महिलाएं रोती-बिलखती नजर आईं। फर्श पर अंशुल की छोटी बहन बेसुध पड़ी थी। पिता की थी मंदिर की ड्यूटी अंशुल के पिता महेश राजपूत ने बताया कि गांव के मंदिर में निर्माण के दौरान खुदाई में धन निकलने की अफवाह फैली थी। इसके बाद एक कमेटी बनाई गई, जिसमें सदस्यों को दो-दो घंटे की निगरानी ड्यूटी दी गई थी। 14 फरवरी की शाम करीब 4 बजे वह मंदिर की ड्यूटी पर चले गए थे और अंशुल खेत पर गया था। इसी दौरान उसकी हत्या कर दी गई। पिता बोले– शादी के कार्ड बांटने थे, अब तेरहवीं के कैसे बांटें महेश राजपूत ने बताया कि वह शिवरात्रि के बाद शादी के निमंत्रण कार्ड बांटने वाले थे, लेकिन उससे पहले ही बेटे की हत्या हो गई। रोते हुए बोले– “अब शादी के कार्ड नहीं, तेरहवीं के कार्ड बांटने की नौबत आ गई।” बदहवास बहन बोली– हत्यारों ने मेरा भाई छीन लिया अंशुल परिवार का सबसे बड़ा बेटा था, जबकि कशिश सबसे छोटी। कशिश ने बताया कि उसने भाई की बारात में पहनने के लिए लहंगा खरीदा था। अंशुल मजाक में कहता था कि ज्यादा शॉपिंग मत करो, तुम्हें बारात में नहीं ले जाएंगे। यह याद करते ही वह फूट-फूटकर रोने लगती है। मां का हाल बेहाल अंशुल को सबसे पहले घायल अवस्था में देखने वाली उसकी मां कलावती हैं। बेटे की मौत से वह सदमे में हैं और बोलने की हालत में नहीं हैं। हालत बिगड़ने पर उन्हें रविवार को अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा। नए मकान में रंगाई-पुताई भी नहीं हो पाई शादी से पहले पिता ने बेटे-बहू के लिए पुराने मकान के पास ही नया घर बनवाया था। महेश राजपूत ने बताया कि अभी पेंट नहीं कराया गया था। अंशुल शिवरात्रि के बाद मनपसंद रंग करवाना चाहता था। उनका सपना था कि बेटा और बहू नए मकान में ही गृह प्रवेश कर नए जीवन की शुरुआत करें। बेटे को बग्घी में बैठाना था, चिता पर लिटाना पड़ा महेश राजपूत ने भर्राए गले से कहा कि घर में पहली शादी होने वाली थी। बेटे को इसी घर से दूल्हा बनाकर ले जाना था, लेकिन उसी घर से उसकी अर्थी उठी। डीजे, बग्घी और विदाई के लिए सारी बुकिंग हो चुकी थी, मगर खुशियों की जगह मातम ने ले ली। पूरा गांव इस निर्मम हत्या से स्तब्ध है और परिवार को न्याय दिलाने की मांग कर रहा है।
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