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    बेटी रोई तो पिता ने पुलिस से चॉकलेट मंगवाई:कमरे में बंधक बनाकर 7 घंटे बैठा रहा, SP से बोला- पास आए तो भून दूंगा

    5 hours ago

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    आजमगढ़ कांड… 4 हत्याएं, एक एनकाउंटर। 7 घंटे में पूरा परिवार बिखर गया। वजह थी- महामृत्युंजय जाप। हत्यारा अरविंद इसका विरोध कर रहा था। पत्नी और मां जाप कराने पर अड़ी थीं। इसी झगड़े में अरविंद ने पहले पत्नी और दो पुजारियों की हत्या कर दी। इसके बाद 3 बच्चों को कमरे में बंधक बनाकर बैठ गया। 7 घंटे तक ADG समेत 300 से ज्यादा पुलिसवाले उसे समझाते रहे, लेकिन उसने दरवाजा नहीं खोला। धमकाते हुए कहा- SP साहब, मेरे पास मत आना, नहीं तो सबको भून डालूंगा। बच्ची रोने लगी, तो उसने खिड़की खोलकर कहा- “बेटी भूख से रो रही है, उसके लिए चॉकलेट लेकर आओ।” SP ने पुलिसवालों से 500 रुपए की चॉकलेट मंगाकर बच्ची को दी। इसके बाद ADG ने अरविंद से कहा- हम तुम्हारे साथ हैं, तुम घबराओ नहीं। कुछ देर बाद अरविंद ने फिर खिड़की से कहा- आप लोग चले जाइए, वरना मैं अपने बच्चों को मार दूंगा। इसी बीच, उसने अपने बेटे को गोली मार दी। जवानों ने स्मोक ग्रेनेड और टियर गैस छोड़ी। फिर दरवाजा तोड़कर कमरे में घुसे। अरविंद ने पुलिस पर 6 राउंड फायर किए। लेकिन, जवाबी कार्रवाई में मारा गया। मृतकों में अरविंद के अलावा पत्नी बबीता (40), बेटा शौर्य (9), पुजारी महेंद्र पाठक (60) और अखिलेश मिश्रा (55) शामिल हैं। 7 घंटे तक बच्चे आरोपी के कब्जे में कैसे रहे? पुलिस ने पूरे ऑपरेशन को कैसे अंजाम दिया? चलिए पढ़ते हैं… शाम 6 बजे- बाजार से लौटा और वारदात को अंजाम दिया अरविंद के बड़े भाई सुनील सिंह की 8 साल पहले हत्या हुई थी। परिवारवालों को शक था कि उसकी आत्मा अरविंद को परेशान कर रही थी। इसलिए मां कमला देवी और पत्नी बबीता ने पूजा के लिए पंडितों को बुलाया था। महेंद्र पाठक (60), अखिलेश मिश्रा (55), उनके बेटे हिमांशु समेत 4 पंडित पूजा कराने पहुंचे। पहले दिन से अरविंद पूजा का विरोध कर रहा था। सोमवार को भी उसने पूजा का विरोध किया था। तब भी पुलिस आई थी और अरविंद को समझाकर चली गई थी। पुलिस के मुताबिक, मंगलवार को पूजा का अंतिम दिन था। शाम करीब 6 बजे महामृत्युंजय पाठ की आरती होने के बाद पंडित पूर्णाहुति की तैयारी कर रहे थे। गांव के लोग प्रसाद लेकर अपने घर जाने लगे थे। इसी बीच अरविंद बाजार से घर लौटा। इसके बाद उसकी पत्नी बबीता से कहासुनी शुरू हो गई। तभी पूजा कराने वाले पंडित समझाने लगे, तो अरविंद उन्हें भी अपशब्द कहने लगा। पुजारियों से आधार कार्ड मांगा। इस पर पुजारियों ने कहा- हम पुजारी हैं, आधार कार्ड लेकर क्यों घूमेंगे? न हम फेरी वाले हैं, न नेपाल या बांग्लादेश से आए हैं। लेकिन, अरविंद अपनी बात पर अड़ा रहा। उसने पंडितों को फटकारा और घर से भगाने लगा। बोला- यहां से फौरन भाग जाओ, वरना पीट दूंगा। यह सुनते ही पत्नी बबीता गुस्से में उसके सामने आई। बोली- ये तुम क्या बोल रहे हो? पंडितों का अपमान करना ठीक बात नहीं है। यह सुनकर अरविंद पत्नी से झगड़ा करने लगा। गुस्से में रिवॉल्वर निकाली और पत्नी के सिर पर गोली मार दी। पत्नी के जमीन पर गिरते ही पंडित भागने लगे। पंडित महेंद्र पाठक उठकर पूजा स्थल से 5 कदम दूर ही भाग पाए थे कि अरविंद ने दौड़कर दूसरी गोली उनके सिर में मार दी। इसके बाद पंडित अखिलेश मिश्रा और उनका बेटा हिमांशु घर के मेन गेट पर पहुंच गए और उसे खोलने लगे। तभी पीछे से अरविंद चिल्लाते हुए दौड़ता आया। उसे गुस्से में देखकर हिमांशु घर की दीवार से कूदकर बाहर भाग गया, जबकि उसके पिता अखिलेश मिश्रा अंदर ही रह गए। अरविंद ने तीसरी गोली उनके सिर पर मारी। वह वहीं गिर गए। गोलियों की आवाज सुनकर गांव के लोग मौके पर पहुंचे। गांववालों को देखकर अरविंद ने हवा में रिवॉल्वर लहराई। इसके चलते गांववाले दूर ही रुक गए। तीन हत्याएं करने के बाद अरविंद ने अपने तीनों बच्चों के साथ खुद को घर के एक कमरे में बंद कर लिया। शाम 7 बजे पुलिस पहुंची, हत्यारा बोला- कप्तान को बुलाओ शाम करीब 7 बजे पड़ोसियों की सूचना पर अहरौला थाना प्रभारी रामकिशोर शर्मा और डायल- 112 की टीम पहुंची। मेन गेट से पुलिस अंदर घुसी। देखा, घर के अंदर तीन लोगों की लाशें पड़ी थीं। आरोपी अरविंद ने बच्चों समेत खुद को एक कमरे में बंद कर लिया था। वह खिड़की से बाहर झांक रहा था। तभी पुलिस ने उससे कहा कि दरवाजा खोल दो, लेकिन अरविंद ने दरवाजा नहीं खोला। उसने पुलिस से कहा कि पहले एसएसपी को बुलाओ, तब दरवाजा खोलेंगे। करीब 7:15 बजे एसएसपी डॉ. अनिल कुमार और एसपी ग्रामीण चिराग जैन पहुंचे। उन्होंने अरविंद से कहा कि दरवाजा खोल दो। हम तुम्हारे साथ कुछ नहीं करेंगे। रात 8 बजे बहन पहुंची, तो बोला- तू यहां क्यों आई रात 8 बजे पुलिस ने अरविंद की बहन साधना को बुलाया। साधना ने घर के बाहर से अरविंद को आवाज लगाते हुए कहा- भइया, दरवाजा खोल दो। बहन को देखते ही अरविंद भड़क गया। उसने कहा- तू यहां क्यों आई है? तेरा घर-द्वार नहीं है क्या? बहन ने कहा कि यह मेरा भी तो घर है। अंदर से अरविंद चिल्लाया- यह तुम्हारा घर नहीं है। जाओ यहां से। बहन बोली- अंदर छोटी बच्ची है, उसे लाओ, मुझे दे दो। वह भूखी होगी। उसे मैं दूध पिला दूं। अरविंद ने उसे रिवॉल्वर दिखाकर भगा दिया। करीब 8:30 बजे अरविंद की मां कमला को बुलाया गया। कमला ने भी समझाया, लेकिन अरविंद ने दरवाजा नहीं खोला। उसने कहा- मेरे भाई की हत्या हो गई। किसी ने मदद नहीं की। रात 9:30 बजे- SP ने SOG और 10 थानों की फोर्स बुलाई रात 9 बजे एसएसपी ने कहा- अरविंद, तुम घबराओ नहीं। हम लोग तुम्हारे परिवार के साथ हैं। तब अरविंद बोला- 8 साल हो गए। मेरे भाई की हत्या कर दी गई। मुझे न्याय नहीं मिला। हत्यारोपी बाहर घूम रहे हैं। मुझे जान का खतरा है। फिर अरविंद ने एसएसपी से कहा- SDM और तहसीलदार को बुलाओ, फिर दरवाजा खोलेंगे। कप्तान ने SDM को फोन किया। रात करीब 9:30 बजे तक SDM और तहसीलदार भी मौके पर पहुंच गए। इसी बीच एसएसपी ने SOG और 10 थानों की फोर्स को भी मौके पर बुला लिया। PAC भी पहुंच गई। पुलिस फोर्स ने उसके घर को चारों तरफ से घेर लिया। SDM के मौके पर पहुंचने पर एसएसपी ने अरविंद से कहा- SDM साहब आ गए हैं। अब दरवाजा खोल दो। तुम डरो नहीं। तुम्हारी जो मांग होगी, हम लोग उसे सुनेंगे। रात 11:30 बजे ADG पहुंचे, बोले- बच्चों को छोड़ दो इसके बाद भी अरविंद ने दरवाजा नहीं खोला। उसने कहा- अब ADG को बुलाओ, तब हम कमरे का दरवाजा खोलेंगे। रात 11:30 बजे वाराणसी के ADG नवीन अरोरा पहुंचे। ADG ने अरविंद से कहा- हम तुम्हारे साथ हैं। तुम घबराओ नहीं। बच्चों को बाहर भेज दो। हम तुम्हें कुछ नहीं करेंगे। तुम्हारी बात सुनी जाएगी। दरवाजा खोलकर बाहर आओ। लेकिन, वह बाहर नहीं निकला। रात 12 बजे- SP से बोला- चॉकलेट मंगाओ अरविंद ने खिड़की से कहा- SP साहब, मेरे बच्चों को भूख लगी है। बेटी रो रही है। उनके लिए गांव की दुकान से चॉकलेट मंगवा दो। SP ने 500 रुपए की बच्चों के लिए चॉकलेट मंगवाई। फिर SP ने कहा- अब बाहर आ जाओ। इस पर उसने कहा- अब हम बाहर नहीं आएंगे। रात बहुत हो गई है। मेरी बेटी और बच्चे सो गए हैं। रात को मैं घर से बाहर नहीं निकलता। अब मैं सुबह उजाले में कमरा खोलूंगा और बाहर निकलूंगा। अभी निकला, तो मैं मारा जाऊंगा। यह सुनकर एसएसपी ने कहा- ऐसा कुछ नहीं होगा। तुम और तुम्हारे बच्चे सुरक्षित रहेंगे। तुम दरवाजा खोल दो और बाहर आ जाओ। रात 12:30 बजे ATS पहुंची, 1 बजे एनकाउंटर कर दिया रात करीब 12:30 बजे वाराणसी से ATS के 25 कमांडो पहुंचे। टीम ने घर को चारों तरफ से घेर लिया। इसी बीच अरविंद ने कहा- आप लोग चले जाइए, वरना मैं अपने बच्चों को मार दूंगा। तभी कमरे से गोली चलने की आवाज आई। इसके बाद ATS और SOG अलर्ट हो गई। टीम ने स्टेन ग्रेनेड और टियर गैस घर के अंदर छोड़ दी। फिर करीब 20 जवान और कप्तान अंदर घुसे और कमरे का दरवाजा तोड़ दिया। पुलिस के अंदर घुसते ही अरविंद ने चेतावनी देते हुए पुलिस पर ताबड़तोड़ फायरिंग कर दी। उसने 6 राउंड फायरिंग की। पुलिस ने भी जवाबी कार्रवाई की। इसमें एक गोली उसे लगी। पुलिस घायल अवस्था में अरविंद और उसके बेटे को जिला अस्पताल लेकर पहुंची, जहां 3:30 बजे डॉक्टरों ने अरविंद को मृत घोषित कर दिया। ------------------------------- ये खबर भी पढ़िए- आजमगढ़ में पत्नी-बेटे, दो पुजारियों को मारने वाले का एनकाउंटर, पूजा कराने से नाराज था, 3 बच्चों को बंधक बनाया; कमांडो कार्रवाई में मारा गया यूपी के आजमगढ़ में पत्नी, बेटे और दो पुजारियों की हत्या करने वाला आरोपी एनकाउंटर में मारा गया। पकड़े जाने के डर से उसने अपने 3 बच्चों को कमरे में बंधक बना लिया। 7 घंटे बाद उसने बेटे पर गोली चला दी। इसके बाद ATS, SOG ने हत्यारे अरविंद सिंह (42) को मार गिराया। घटना जिला मुख्यालय से 50 किमी दूर अहिरौला थाना क्षेत्र की है। पढ़ें पूरी खबर
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