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    बांदा की चकबंदी को लेकर लखनऊ में शिकायत:किसानों ने आयुक्त कार्यालय का घेराव किया; नारेबाजी कर सौंपा ज्ञापन

    1 day ago

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    बांदा में चल रही चकबंदी प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं को लेकर किसानों का विरोध अब लखनऊ तक पहुंच गया है। मंगलवार को किसानों ने लखनऊ स्थित चकबंदी आयुक्त कार्यालय का घेराव कर नारेबाजी की और अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन किया। इसके बाद जनता दल यूनाइटेड (जदयू) की प्रदेश उपाध्यक्ष शालिनी सिंह पटेल के नेतृत्व में चकबंदी आयुक्त को ज्ञापन सौंपकर पूरे मामले की निष्पक्ष जांच और दोषी अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की गई। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि चकबंदी के दौरान नियमों की अनदेखी की गई, रिकॉर्ड में हेराफेरी की गई और भ्रष्टाचार के कारण किसानों का लगातार उत्पीड़न हो रहा है। उनका कहना है कि इन अनियमितताओं से किसानों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है। ज्ञापन में कहा गया है कि बांदा के अमलीकोर समेत सिलेहटा, बहिंगा, खटीटाखुर्द और महबरा गांवों में चकबंदी के दौरान गंभीर अनियमितताएं हुई हैं। मंडलायुक्त और चकबंदी निदेशालय स्तर पर पहले से गठित जांच समितियों की जांच अब तक पूरी नहीं हुई है। ऐसे में पूरे मामले की जांच राजस्व परिषद की स्वतंत्र टीम से कराने की मांग की गई है। 2 तस्वीरें देखिए… 40 प्रतिशत काम, 100 प्रतिशत पूरा दिखाने का आरोप ज्ञापन के अनुसार ग्राम अमलीकोर में चक सीमांकन का करीब 40 प्रतिशत काम ही हुआ था, लेकिन शासन को कार्य पूरा होने की सूचना भेज दी गई। आरोप है कि कब्जा परिवर्तन और अन्य कार्रवाई भी अधूरे सीमांकन के आधार पर की गई, जिससे किसानों को नुकसान हुआ। कई अधिकारियों पर लगाए गंभीर आरोप ज्ञापन में चकबंदी विभाग के कई अधिकारियों और कर्मचारियों पर नियमों के विपरीत आदेश पारित करने, फर्जी अभिलेख तैयार करने, रिश्वत लेने, नामांतरण में गड़बड़ी करने और शिकायतों के बावजूद कार्रवाई न करने के आरोप लगाए गए हैं। साथ ही पूर्व की जांच रिपोर्टों पर भी अमल न होने की बात कही गई है। किसानों के आंदोलन का भी किया जिक्र ज्ञापन में कहा गया है कि समस्याओं के समाधान की मांग को लेकर किसान 16 जून से बांदा कलेक्ट्रेट परिसर में धरना दे रहे थे, जो बाद में आमरण अनशन में बदल गया। अब न्याय की मांग को लेकर 14 जुलाई से लखनऊ स्थित चकबंदी मुख्यालय पर धरना शुरू कर दिया गया है। ये हैं प्रमुख मांगें- •अमलीकोर में चक सीमांकन और कब्जा परिवर्तन की प्रक्रिया निरस्त की जाए। •पूरे मामले की स्वतंत्र एजेंसी या राजस्व परिषद से जांच कराई जाए। •जांच में दोषी पाए जाने वाले अधिकारियों और कर्मचारियों पर सख्त कार्रवाई की जाए। •किसानों की लंबित शिकायतों का जल्द निस्तारण किया जाए और नियमों के अनुसार दोबारा कार्रवाई की जाए।
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