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    बांदा में खननकर्ता पर ₹1.84 करोड़ का जुर्माना:NGT ने पर्यावरणीय नियमों के उल्लंघन पर की कार्रवाई

    19 hours ago

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    बांदा जनपद के गिरवां क्षेत्र की बहादुरपुर स्योढ़ा खदान में खनन के दौरान पर्यावरणीय नियमों के उल्लंघन के मामले में राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी), दिल्ली ने खननकर्ता पर 1 करोड़ 84 लाख 92 हजार रुपये का पर्यावरणीय जुर्माना लगाया है। खदान उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश की सीमा पर स्थित है। मामले में गिरवां निवासी संजय अवस्थी ने पिछले साल जून में याचिका दाखिल कर खनन गतिविधियों से पर्यावरण को हुए नुकसान और नियमों के उल्लंघन का मुद्दा उठाया था। याचिका में नदी क्षेत्र के आसपास खनन से पर्यावरण को होने वाले नुकसान, मशीनों के इस्तेमाल और खनन क्षेत्र की निगरानी से जुड़े बिंदु उठाए गए थे। खनन से पर्यावरण को नुकसान पूर्व में हुई जांच में भी नदी क्षेत्र के आसपास खनन से पर्यावरण को नुकसान पहुंचने की बात सामने आई थी। इसके बाद मामला एनजीटी पहुंचा। सुनवाई के दौरान पर्यावरणीय क्षति और खनन से जुड़े तथ्यों पर विचार करने के बाद अधिकरण ने खननकर्ता पर 1,84,92,000 रुपये का जुर्माना निर्धारित किया। मामले की सुनवाई के बाद यह जुर्माना याचिकाकर्ता संजय अवस्थी ने बताया कि एनजीटी दिल्ली के न्यायाधीश अरुण कुमार त्यागी ने मामले की सुनवाई के बाद यह जुर्माना लगाया है। आदेश के अनुपालन और जुर्माने की वसूली की जिम्मेदारी संबंधित विभागों की होगी। खनन अधिकारी राज रंजन कुमार ने बताया कि एनजीटी की कार्रवाई की जानकारी मिली है। 65 लाख रुपये की धनराशि जमा मेसर्स लक्ष्मी प्रसाद गुप्ता, प्रोपराइटर उमेश गुप्ता को खनन का पट्टा करीब छह माह पहले आवंटित हुआ था। इसके बावजूद खनन में नियमों और शर्तों का उल्लंघन किया गया। उन्होंने बताया कि अवैध खनन के मामले में संबंधित फर्म पर करीब 65 लाख रुपये की धनराशि जमा करने की जिम्मेदारी थी, लेकिन अब तक यह रकम जमा नहीं की गई है। नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। खनन अधिकारी के अनुसार, खनन के दौरान पर्यावरण को हुए नुकसान के मामले को क्षेत्रीय अधिकारी, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, बांदा को भेजा जाएगा। वहीं, जिलाधिकारी अमित आसेरी ने बताया कि एनजीटी का आदेश प्राप्त होने पर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। जुर्माना राशि की शत-प्रतिशत वसूली के साथ आगे की विधिक प्रक्रिया भी निर्धारित समयसीमा में पूरी कराई जाएगी।
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