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    बौद्ध महासभा ने राष्ट्रपति को सौंपा ज्ञापन:सावित्रीबाई फुले को भारत रत्न, बौद्धों के लिए अलग पर्सनल लॉ की मांग

    11 hours ago

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    बरेली में राष्ट्रीय बौद्ध महासभा ने सामाजिक न्याय, शिक्षा और धार्मिक अधिकारों से संबंधित अपनी मांगों को लेकर राष्ट्रपति के नाम एक ज्ञापन सौंपा है। संगठन ने महान समाज सुधारक सावित्रीबाई फुले को देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मान भारत रत्न से सम्मानित करने और बौद्ध समुदाय के लिए अलग पर्सनल लॉ लागू करने की मांग की है। महासभा के जिला अध्यक्ष सतीश कुमार बौद्ध के नेतृत्व में पदाधिकारियों ने जिलाधिकारी कार्यालय पहुंचकर यह ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में कहा गया कि सावित्रीबाई फुले ने भारत में महिलाओं और वंचित वर्गों को शिक्षा दिलाने के लिए ऐतिहासिक संघर्ष किया था। उन्हें देश की पहली महिला शिक्षिका के रूप में जाना जाता है। सामाजिक विरोध और कठिन परिस्थितियों के बावजूद उन्होंने शिक्षा और समानता का जो आंदोलन शुरू किया, वह आज भी प्रेरणा का स्रोत है। संगठन ने उनके ऐतिहासिक योगदान को देखते हुए मरणोपरांत भारत रत्न से सम्मानित करने की मांग की है। इसके अतिरिक्त, महासभा ने बौद्ध समुदाय के लिए एक अलग पर्सनल लॉ (धर्म-संहिता) बनाने की भी मांग की। पदाधिकारियों ने तर्क दिया कि बौद्ध धर्म की अपनी विशिष्ट परंपराएं और धार्मिक संस्कार हैं। वर्तमान में, अलग कानून के अभाव में कई सामाजिक और धार्मिक प्रक्रियाएं हिंदू कानून के तहत संचालित होती हैं। इसी क्रम में, बौद्धों के लिए एक स्वतंत्र धर्म-संहिता की आवश्यकता पर जोर दिया गया। ज्ञापन में महाबोधि महाविहार (बिहार) का प्रबंधन पूरी तरह बौद्ध समाज को सौंपने की मांग भी शामिल है। महासभा का तर्क है कि यह स्थल गौतम बुद्ध की ज्ञानस्थली और विश्वभर के बौद्धों की आस्था का प्रमुख केंद्र है, अतः इसका संचालन बौद्ध समुदाय के हाथों में होना चाहिए। अन्य मांगों में पाली भाषा को संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल करना तथा ज्योतिराव फुले और फातिमा शेख के जीवन एवं संघर्ष को शैक्षिक पाठ्यक्रम में शामिल करना भी शामिल है। ज्ञापन सौंपते समय संगठन के कई पदाधिकारी और कार्यकर्ता उपस्थित थे।
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