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    चाइनीज मांझे पर केंद्र, राज्य से मांगा गया जवाब:2018 में बैन करने की मांग वाली PIL पर आज हाईकोर्ट में सुनवाई

    20 hours ago

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    राजधानी लखनऊ में लगातार हो रही जानलेवा घटनाओं के बीच चीनी मांझे पर सख्त प्रतिबंध की मांग को लेकर दाखिल जनहित याचिका पर मंगलवार को इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ में अहम सुनवाई होगी। वर्ष 2018 में दाखिल इस PIL को लेकर अदालत पहले ही केंद्र और उत्तर प्रदेश सरकार से जवाब तलब कर चुकी है। आज होने वाली सुनवाई से चीनी मांझे के अवैध आयात, बिक्री और इस्तेमाल पर सख्त रुख तय होने की उम्मीद है जनहित याचिका पर न्यायमूर्ति राजन रॉय और न्यायमूर्ति अबधेश कुमार चौधरी की खंडपीठ कोर्ट नंबर-1 में सुनवाई करेगी। यह याचिका स्थानीय अधिवक्ता मोतीलाल यादव द्वारा दायर की गई है, जिसमें चीनी मांझे को पूरी तरह प्रतिबंधित करने और इसके खिलाफ प्रभावी कार्रवाई के निर्देश देने की मांग की गई है। PMO और यूपी सरकार से मांगा गया जवाब इस मामले में हाईकोर्ट पहले ही प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO), उत्तर प्रदेश सरकार और संबंधित विभागों से जवाब तलब कर चुका है। अदालत ने यह स्पष्ट किया था कि चीनी मांझे के कारण हो रही मौतों और गंभीर हादसों को हल्के में नहीं लिया जा सकता। लखनऊ पीठ की खंडपीठ ने तीन सितंबर 2024 को इस जनहित याचिका पर अहम आदेश पारित किया था। उस समय अदालत ने प्रदेश के सभी जिलाधिकारियों और पुलिस अधीक्षकों को निर्देश दिया था कि वे अपने-अपने जिलों में चीनी मांझे के खिलाफ की गई कार्रवाई का विवरण हलफनामे के रूप में पेश करें। मीडिया की खबर को बनाया गया था आधार अदालत ने उत्तर प्रदेश के गृह विभाग और पर्यावरण विभाग से भी यह स्पष्ट करने को कहा था कि चीनी मांझे पर रोक लगाने और उसके अनुपालन के लिए अब तक क्या प्रक्रिया अपनाई गई है। इसके साथ ही भारत सरकार से यह जानकारी भी मांगी गई थी कि क्या यह मामला राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) में लंबित है या नहीं। इस पूरे मामले में हाईकोर्ट ने 26 अगस्त 2025 को मीडिया में प्रकाशित खबर को भी रिकॉर्ड पर लिया था, जिसमें चीनी मांझे से गला कटने और मौत जैसी घटनाओं का उल्लेख था। अदालत ने माना था कि यह विषय सीधे तौर पर जनजीवन और सार्वजनिक सुरक्षा से जुड़ा है। पहले भी दिया जा चुका है एक और मौका तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश अरुण भंसाली और न्यायमूर्ति जसप्रीत सिंह की खंडपीठ ने प्रतिवादी पक्ष की प्रार्थना पर तीन सितंबर के आदेश के अनुपालन के लिए एक और मौका दिया था। इसके बाद भी प्रभावी कार्रवाई न होने के आरोप सामने आए, जिसके चलते मामला फिर से सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया गया है। प्रदेश में बीते दिनों चीनी मांझे से कई लोगों की गर्दन कटने और एक व्यक्ति की मौत के बाद इस मुद्दे ने तूल पकड़ लिया है। अब हाईकोर्ट की इस सुनवाई पर सबकी नजरें टिकी हैं, क्योंकि इससे चीनी मांझे पर पूर्ण प्रतिबंध और सख्त कानूनी कार्रवाई की दिशा तय हो सकती है।
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