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    चाइनीज मांझा पर UP में नया कानून लाने की तैयारी:लखनऊ हाईकोर्ट हुआ सख्त, 13 जुलाई को होगी सुनवाई

    15 hours ago

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    चाइनीज मांझा पर रोक को लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने सख्त रुख अपनाया है। सुनवाई के दौरान उत्तर प्रदेश सरकार ने कोर्ट को बताया कि अवैध मांझे के निर्माण, बिक्री और उपयोग पर पूर्ण प्रतिबंध के लिए नया कानून लाने की तैयारी चल रही है। मांझे से प्रभावित लोगों को मुआवजा देने का प्रावधान भी प्रस्तावित है। मंगलवार को कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यह मामला सीधे जीवन के अधिकार से जुड़ा है, इसलिए केवल कागजी कार्रवाई नहीं बल्कि जमीनी असर जरूरी है। सरकार की ओर से कोर्ट को बताया गया कि यूपी लेथल मांझा (निर्माण, बिक्री और उपयोग पर प्रतिबंध) एक्ट लाने की प्रक्रिया जारी है। फिलहाल यह प्रस्ताव ड्राफ्टिंग और विचार-विमर्श के चरण में है। इस कानून के जरिए चाइनीज मांझा और कांच लगे धागों पर सख्त रोक लगाने की योजना है। नया कानून लाने की तैयारी, ड्राफ्टिंग स्टेज में प्रस्ताव गृह विभाग सक्रिय, डीजीपी ने जारी किया सर्कुलर सरकार ने जानकारी दी कि 9 फरवरी 2026 को गृह विभाग ने इस संबंध में नया शासनादेश जारी किया। इसके बाद 10 फरवरी को डीजीपी उत्तर प्रदेश ने सर्कुलर जारी कर कार्रवाई के निर्देश दिए। 17 अप्रैल को एक उच्चस्तरीय कमेटी का गठन भी किया गया है, जो इस पूरे मुद्दे की निगरानी कर रही है। कई विभागों को जिम्मेदारी, संयुक्त कार्रवाई पर जोर कोर्ट को बताया गया कि इस समस्या से निपटने के लिए एक से अधिक विभागों की भूमिका अहम है। इसमें स्टेट टैक्स, इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट, गृह और पर्यावरण विभाग शामिल हैं। इन सभी विभागों को मिलकर अवैध मांझे के निर्माण, बिक्री और उपयोग पर रोक लगानी होगी। ‘लगातार अभियान जरूरी’ हाईकोर्ट की बेंच राजन रॉय और मंजिव शुक्ला ने कहा कि इस समस्या पर एकबारगी नहीं बल्कि लगातार कार्रवाई जरूरी है। लोगों को इसके खतरों के बारे में जागरूक करने पर भी जोर दिया गया। ‘कार्रवाई के नाम पर हो रहा उत्पीड़न’ सुनवाई के दौरान पतंग और पारंपरिक मांझा बेचने वाले व्यापारियों की ओर से पक्ष रखा गया कि प्रशासन की कार्रवाई में उन्हें भी बेवजह परेशान किया जा रहा है। इस पर कोर्ट ने राज्य सरकार को निर्देश दिया कि केवल अवैध और खतरनाक मांझे पर ही कार्रवाई हो, जबकि वैध व्यापार करने वालों को परेशान न किया जाए। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से मांगा जवाब कोर्ट ने उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से भी इस मामले में उसकी भूमिका स्पष्ट करने को कहा है। बोर्ड को शपथपत्र दाखिल कर बताना होगा कि वह इस समस्या के समाधान में क्या कदम उठा रहा है? ‘हॉटस्पॉट एरिया’ चिन्हित करने का सुझाव कोर्ट ने कहा कि हर शहर में कुछ ऐसे इलाके होते हैं जहां पतंगबाजी ज्यादा होती है। इन क्षेत्रों को चिन्हित कर वहां विशेष निगरानी रखी जाए, ताकि अवैध मांझे की बिक्री और उपयोग पर प्रभावी रोक लगाई जा सके। अगली सुनवाई 13 जुलाई, बड़े अधिकारियों को पेश होने का आदेश कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई 13 जुलाई 2026 तय की है। इस दौरान कई वरिष्ठ अधिकारियों जैसे गृह विभाग, स्टेट टैक्स, पर्यावरण विभाग और डीजीपी को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए कोर्ट के सामने उपस्थित होकर उठाए गए कदमों की जानकारी देनी होगी।
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