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    चैत्र नवरात्रि के पहले दिन दुर्गा मंदिर पहुंचे श्रद्धालु:पालकी पर सवार होकर आई है मां जगदम्बा,अब 27 मार्च तक देवी की होगी आराधना

    2 hours ago

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    चैत्र नवरात्र की आज से शुरूआत हो गई है‌। मंगला आरती के बाद भक्तों के लिए माता के मंदिर का कपाट खोल दिया गया है‌। वही, ज्योतिषाचार्यों ने बताया कि 89 साल बाद नवरात्र पुराने साल में शुरू और नए साल में समाप्त होगा। नौ गौरी पालकी पर सवार होकर आएंगी। बृहस्पति संवत्सर का लोप हो जाएगा। नया साल रौद्र संवत्सर से शुरू होगा। नए साल का राजा गुरु और मंत्री मंगल होंगे। पहले दिन माता शैलपुत्री का होता है दर्शन नवरात्र का पहला दिन मां शैलपुत्री का होता है। शैलपुत्री हिमालय की पुत्री हैं, लेकिन उन्होंने रहने के लिए भगवान शिव की नगरी काशी को चुना। बनारस में वरुणा नदी के किनारे मां शैलपुत्री का प्राचीन मंदिर है। पूरे भारत में ये इकलौता ऐसा मंदिर है, जहां मां खुद से विराजमान हुईं। जबकि दूसरे शक्तिपीठों में मां की प्रतिमा और पिंडियों के दर्शन होते हैं। यह मंदिर वाराणसी कैंट रेलवे स्टेशन से 4 किलोमीटर दूर अलईपुरा कस्बे में हैं। यहां हम देवी शैलपुत्री के प्राचीन मंदिर पहुंचे। हमने मंदिर के पुजारी और स्थानीय लोगों से इसके इतिहास और पौराणिक महत्व को जाना। अब जानिए मंदिर की कहानी मां शैलपुत्री मंदिर के मुख्य पुजारी पंडित ज्यूत तिवारी ने बताया मान्यता है कि जब माता किसी बात पर भोलेनाथ से नाराज होकर कैलाश से काशी आ गईं, तो कुछ दिनों बाद बाबा उन्हें मनाने यहां आए। उन्होंने देखा कि मां वरुणा नदी के किनारे उनकी तपस्या कर रही थीं। तब महादेव ने उनसे वापस कैलाश चलने का आग्रह किया। लेकिन मां को ये जगह इतनी अच्छी लगी कि उन्होंने वापस जाने से मना कर दिया। पुजारी ज्यूत कहते हैं, मां ने चलने से इनकार किया तो महादेव उनको काशी में अकेला छोड़कर वापस कैलाश चले गए। तब से माता यहीं विराजमान हैं। कलश स्थापना का मुहूर्त 19 मार्च को पहला मुहूर्त सुबह 6:53 बजे से 10:03 बजे तक मिलेगा। दूसरा मुहूर्त सुबह 11:16 बजे से दिन में 12:46 बजे तक है। तीसरा दिन में 12:49 बजे से दिन में 3:46 बजे तक रहेगा। तिथि के अनुसार अर्पण नवरात्र में नौ गौरी को अलग-अलग तिथि पर उनकी प्रिय वस्तुएं अर्पित करते हैं। पहले दिन उड़द, हल्दी, माला-फूल, दूसरे दिन तिल, शक्कर, चूड़ी, गुलाल, शहद, तीसरे दिन लाल वस्त्र, शहद, खीर, काजल, चौथे दिन दही, फल, सिंदूर, मसूर, पांचवें दिन दूध, मेवा, कमलपुष्प, बिन्दी, छठे दिन चुनरी, पताका, दूर्वा, सातवें दिन बताशा, इत्र, फल-पुष्प, आठवें दिन पूड़ी, पीली मिठाई, कमलगट्टा, चंदन, वस्त्र और नौवें दिन खीर, सुहाग सामग्री, साबूदाना, अक्षत फल, बताशा अर्पित करना चाहिए। ऐसे करें कलश स्थापना ज्योतिषाचार्य विनय पाण्डेय के अनुसार कलश स्थापना के लिए कलश मिट्टी, पीतल अथवा तांबे का कलश होना चाहिए। सामर्थ्य के अनुसार रजत और स्वर्ण कलश भी हो सकता है। उसके ऊपर शुद्ध मिट्टी में जौ के दाने भी बोने चाहिए। गौरी को लाल चुनरी, अठ्ठल के फूल की माला, नारियल, ऋतुफल, मेवा, मिष्ठान आदि अर्पित कर सकते हैं।
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