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    चित्रकूट में मंदाकिनी नदी पर दो दिवसीय कार्यशाला संपन्न:निर्मल और अविरल प्रवाह बनाए रखने पर विशेषज्ञों ने दिए सुझाव

    4 hours ago

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    चित्रकूट में मां मंदाकिनी के निर्मल और अविरल प्रवाह को बनाए रखने के उद्देश्य से आरोग्यधाम में आयोजित दो दिवसीय विचार-विमर्श बैठक-सह-कार्यशाला रविवार को संपन्न हो गई। दीनदयाल शोध संस्थान द्वारा आयोजित इस कार्यशाला में विशेषज्ञों ने नदी पुनरुद्धार, सीवेज प्रबंधन, ठोस अपशिष्ट प्रबंधन और पारिस्थितिक पुनर्स्थापन जैसे विषयों पर विस्तृत चर्चा की और कई महत्वपूर्ण सुझाव दिए। समापन सत्र में प्रसिद्ध पर्यावरणविद एवं पारिस्थितिकीविद प्रो. सीआर बाबू ने कहा कि मां मंदाकिनी को प्रदूषण मुक्त और निरंतर प्रवाह वाली नदी बनाए रखने के लिए तकनीकी, पारिस्थितिक और सामाजिक भागीदारी को एक साथ जोड़ना आवश्यक है। वहीं, केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड भोपाल के निदेशक डॉ. ए.के. विद्यार्थी ने तीनों विशेषज्ञ टीमों के विचारों का प्रस्तुतिकरण करते हुए बताया कि नदी को स्वच्छ बनाए रखने के लिए सीवेज और ठोस अपशिष्ट के वैज्ञानिक प्रबंधन पर विशेष ध्यान देना जरूरी है। कार्यशाला के दौरान तीन टीमों का गठन किया गया था। पहली टीम ने नदी पुनरुद्धार, वाटरशेड प्रबंधन और जैव विविधता संरक्षण पर क्षेत्रीय सर्वेक्षण किया, जबकि दूसरी टीम ने सीवेज प्रबंधन और तीसरी टीम ने ठोस अपशिष्ट प्रबंधन के संदर्भ में जानकारी जुटाई। सर्वेक्षण के बाद विशेषज्ञों ने सुझाव दिया कि नदियों में प्लास्टिक, पूजा सामग्री, शव और ठोस कचरा फेंकने पर सख्ती से रोक लगाई जाए। इसके साथ ही, फ्लोटिंग वेटलैंड्स, जैविक उपचार और प्राकृतिक कृषि को बढ़ावा देने की भी सिफारिश की गई। विशेषज्ञों ने यह भी कहा कि नदी के जलग्रहण क्षेत्रों को पुनर्जीवित करना, नदी किनारे सघन वृक्षारोपण करना, तालाबों और जलाशयों का निर्माण तथा वर्षा जल संरक्षण जैसी योजनाएं लागू करनी होंगी। सहायक नदियों और नालों का सीमांकन एवं पुनर्जीवन भी आवश्यक बताया गया। सीवेज प्रबंधन के तहत आश्रमों और होटलों को मुख्य सीवर नेटवर्क से जोड़ने, विकेंद्रीकृत सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) लगाने, आधुनिक शौचालयों की व्यवस्था करने, ट्रैश बूम लगाने और तीर्थयात्रियों के लिए विशेष सीवेज प्रबंधन प्रणाली विकसित करने पर जोर दिया गया। कार्यक्रम के अंत में संगठन सचिव अभय महाजन ने सभी अतिथियों का आभार व्यक्त किया। जबकि कोषाध्यक्ष वसंत पंडित ने विशेषज्ञों को स्मृति चिह्न भेंट किए। तीनों विशेषज्ञ समूहों को एक माह के भीतर अपनी रिपोर्ट समिति को सौंपने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि एक समन्वित कार्ययोजना बनाकर उसे प्रभावी ढंग से लागू किया जा सके।
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