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    चित्रकूट में यूजीसी एक्ट 2026 लागू करने की उठी मांग:बोले- इससे उच्च शिक्षा में भेदभाव रुकेगा, डीएम को सौंपा ज्ञापन

    3 hours ago

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    चित्रकूट में उच्च शिक्षण संस्थानों में जातीय भेदभाव और छात्रों के साथ होने वाले कथित अपमान की घटनाओं को रोकने के लिए यूजीसी एक्ट 2026 को जल्द लागू करने की मांग तेज हो गई है। इस संबंध में सामाजिक संगठनों और जागरूक नागरिकों ने जिलाधिकारी को ज्ञापन सौंपकर केंद्र सरकार से कानून को प्रभावी ढंग से लागू करने की अपील की। ज्ञापन में कहा गया है कि यूजीसी एक्ट 2026 उच्च शिक्षा व्यवस्था को अधिक पारदर्शी, गुणवत्तापूर्ण और संविधान सम्मत बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकता है। इसका उद्देश्य धर्म, जाति, नस्ल, लिंग या जन्म स्थान के आधार पर किसी भी प्रकार के भेदभाव को समाप्त करना है। ज्ञापन में यह भी उल्लेख किया गया कि देश के कई उच्च शिक्षण संस्थानों में अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, अन्य पिछड़ा वर्ग और आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के छात्रों के साथ भेदभाव के मामले सामने आते रहे हैं। उदाहरण के तौर पर पीएचडी छात्र रोहित वेमुला, डॉक्टर पायल तड़वी और आईआईटी छात्र दर्शन सोलंकी की घटनाओं का हवाला दिया गया। संगठनों ने दावा किया कि भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थानों (आईआईटी) में भी पिछले कुछ वर्षों में आत्महत्या के कई मामले दर्ज किए गए हैं। रिपोर्ट के अनुसार, आईआईटी में 27 से 30 छात्रों द्वारा आत्महत्या के मामले सामने आए, जिनमें सबसे अधिक घटनाएं आईआईटी कानपुर से जुड़ी बताई गई हैं। हाल के वर्षों में वहां लगभग नौ मामले दर्ज होने की बात कही गई। इसके अलावा, 4 फरवरी 2026 को आईआईटी बॉम्बे तथा 20 जनवरी 2026 को आईआईटी कानपुर में भी छात्र आत्महत्या की घटनाओं का उल्लेख ज्ञापन में किया गया है। ज्ञापन सौंपने वालों का कहना है कि यदि यूजीसी एक्ट 2026 को सख्ती से लागू किया जाता है तो विश्वविद्यालयों में शैक्षणिक मानकों का एकीकरण होगा, प्रशासनिक जवाबदेही बढ़ेगी और छात्रों के हितों की बेहतर सुरक्षा सुनिश्चित की जा सकेगी। उन्होंने कहा कि इससे भविष्य में छात्रों को भेदभाव और उत्पीड़न जैसी परिस्थितियों से बचाया जा सकेगा।
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