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    CPEC फेल, 4 देशों वाला भारत का पहला 1300 KM सुपर कॉरिडोर

    6 hours ago

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    बीजिंग के दफ्तरों में इस वक्त सन्नाटा पसरा है। वजह है भारत का वो साइलेंट मास्टर स्ट्रोक जिसने साउथ एशिया के नक्शे से चीन के दबदबे को मिटाने की पटकथा लिख दी है। दरअसल साउथ एशिया के सीने पर भारत एक ऐसी 1300 किमी लंबी आर्थिक तलवार चला रहा है जिससे चीन केत्वाकांक्षी सीपीईसी के गुब्बारे की हवा निकल चुकी है। यह सिर्फ एक सड़क नहीं है। यह भारत का वो ब्रह्मास्त्र है जो नेपाल, भूटान और बांग्लादेश की किस्मत को हमेशा हमेशा के लिए दिल्ली से जोड़ देगा और डिफेंस एक्सपर्ट भी हैरान है कि इतनी खामोशी से बिना किसी शोर के भारत ने चीन की घेराबंदी आखिर कैसे कर दी। भारत के उत्तरपूर्वी राज्य यानी नॉर्थ ईस्ट दशकों से कनेक्टिविटी की समस्या से जूझ रहे थे। इसे भी पढ़ें: 'जम्मू-कश्मीर भारत का हिस्सा था, है और रहेगा', UN में नई दिल्ली ने पाकिस्तान को दिया करारा जवाबसिलीगुड़ी कॉरिडोर जिसे चिकन नेक कहा गया वहां का सारा बोझ संभालना मुश्किल हो रहा था। लेकिन अब भारत सरकार ने गेम पलट दिया है। यह 1300 कि.मी. का लंबा हाईवे सीधे तौर पर कोलकाता पोर्ट से शुरू होकर सिलिगुड़ी होते हुए नेपाल और भूटान की सीमाओं से छू जाएगा। यह कोई साधारण सड़क नहीं है बल्कि एक डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर की तरह काम करेगा। कल्पना कीजिए जो ट्रक पहले पहाड़ों के टेढ़े-मेढ़े रास्तों पर हफ्तों फंसे रहते थे, वे अब 100 कि.मी. प्रति घंटे की रफ्तार से अपना माल पहुंचाएंगे बॉर्डर्स पर। इससे ना केवल समय बचेगा बल्कि ट्रांसपोर्टेशन की लागत 30% तक कम हो जाएगी। यह भारत के नॉर्थ ईस्ट को लैंड लॉक से लैंड लिंक बना देगा। अब बात करते हैं उन दो देशों की जिन्हें चीन हमेशा अपने कर्ज के जाल में फंसाने की फिराक में रहता है। नेपाल और भूटान। इन दोनों देशों की सबसे बड़ी मजबूरी है कि इनके पास अपना कोई समंदर नहीं है। इसे भी पढ़ें: 'भारत कभी किसी विदेशी ताकत के आदेश नहीं मानता', पीएम मोदी पर दबाव बनाना बेकार, ट्रंप को पुतिन का कड़ा जवाबचीन इन्हें तिब्बत के रास्ते वोट देने का लालच देता रहा है। लेकिन हिमालय की दुर्गम पहाड़ियों के कारण वो रास्ता बेहद महंगा और मुश्किल है। भारत ने इस 1300 किमी लंबे हाईवे के जरिए उन्हें एक ऐसा विकल्प दे दिया है जिसे ठुकराना उनके लिए नामुमकिन है। नेपाल और भूटान के व्यापारियों के लिए अब कोलकाता और हदिया फोर्ट तक पहुंचना मक्खन जैसा हो जाएगा। जब इन देशों का व्यापार भारत के रास्ते सस्ता होगा तो वे चीन के महंगे और एहसान भरे रास्तों की तरफ नहीं देखेंगे। यह भारत की नेबरहुड फर्स्ट पॉलिसी की सबसे बड़ी जीत है और चीन की सबसे बड़ी हार है। लेकिन इस पूरी कहानी में सबसे दिलचस्प मोड़ आता है बांग्लादेश पर। इस प्रोजेक्ट को बीबीआईए कहा गया जिसमें बांग्लादेश एक प्रमुख भागीदार था। 
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