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    CSJMU में जुटे देश भर के वैज्ञानिक:चावल की नई किस्म से लेकर कैंसर के इलाज तक पर चर्चा, अनिद्रा दूर करने के तरीके भी बताए

    1 hour ago

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    छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय (CSJMU) में चल रही अंतरराष्ट्रीय कॉन्फ्रेंस ‘एडवांसेज इन लाइफ साइंसेज-2026’ (ICALS-2026) के दूसरे दिन शुक्रवार को विज्ञान की दुनिया के कई अनसुलझे पहलुओं पर मंथन हुआ। स्कूल ऑफ लाइफ साइंसेज एंड बायोटेक्नोलॉजी द्वारा आयोजित इस सम्मेलन में अमेरिका से आए वैज्ञानिकों और देश के दिग्गजों ने खेती, सेहत और गंभीर बीमारियों के नए इलाजों पर अपनी शोध रिपोर्ट पेश की। इस दौरान बताया गया कि कैसे आधुनिक तकनीक के जरिए हम फसलों को बेहतर और बीमारियों को जड़ से खत्म कर सकते हैं। चावल की खेती और दलहन में सुधार की नई तकनीक: अमेरिका की लुइसियाना स्टेट यूनिवर्सिटी से आए डॉ. चंद्रकांत चौधरी ने बताया कि चावल की खेती में खारे पानी और नमक की समस्या एक बड़ी चुनौती है। उन्होंने विशेष जीन नेटवर्क के बारे में जानकारी दी, जो पौधों को अधिक नमकीन परिस्थितियों में भी जीवित रहने और बेहतर पैदावार देने में मदद करते हैं। वहीं, भारतीय दलहन अनुसंधान संस्थान (IIPR) के डॉ. अरविंद कुमार ने मल्टी-ओमिक्स तकनीक के जरिए दालों की गुणवत्ता और पैदावार सुधारने पर जोर दिया। अनिद्रा का इलाज और कैंसर पर नई रिसर्च बदलती लाइफस्टाइल में अनिद्रा (नींद न आना) एक बड़ी समस्या बन गई है। जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) के डॉ. सुशील कुमार झा ने बताया कि बिना दवाइयों के आधुनिक मनोवैज्ञानिक और व्यावहारिक तरीकों से कैसे नींद की समस्या को ठीक किया जा सकता है। कैंसर के क्षेत्र में भी एक बड़ी उम्मीद जगी है। लखनऊ विश्वविद्यालय के प्रो. सिद्धार्थ के. मिश्रा ने बताया कि शरीर के रेडॉक्स सिस्टम को टारगेट करके कैंसर का बेहतर इलाज संभव है। वहीं, संस्थान के वैज्ञानिकों ने आंतों की सूजन और इम्यून सिस्टम के आपसी संबंध पर भी महत्वपूर्ण जानकारी साझा की। चीनी उद्योग से कचरा कम और कमाई ज्यादा नेशनल शुगर इंस्टिट्यूट की डॉ. अनंत लक्ष्मी ने सर्कुलर इकॉनमी पर बात की। उन्होंने बताया कि चीनी मिलों से निकलने वाले वेस्ट (उप-उत्पादों) को फेंकने के बजाय उनसे जैविक उत्पाद और नवीकरणीय ऊर्जा बनाई जा सकती है। इससे पर्यावरण भी बचेगा और आर्थिक लाभ भी होगा। युवा वैज्ञानिकों ने दिखाए 45 रिसर्च पोस्टर कॉन्फ्रेंस के दूसरे दिन 200 से अधिक छात्रों ने हिस्सा लिया। युवा शोधकर्ताओं ने 12 मौखिक प्रस्तुतियां दीं और 45 रिसर्च पोस्टरों के जरिए अपने नए आविष्कारों को प्रदर्शित किया। प्रो. वर्षा गुप्ता और डॉ. अनुराधा कलानी के नेतृत्व में हुए इस आयोजन में विशेषज्ञों ने छात्रों के शोध का मूल्यांकन किया और उन्हें भविष्य के लिए प्रेरित किया। इस दौरान डॉ. राकेश कुमार शर्मा, डॉ. प्रमोद यादव और डॉ. विनोद वर्मा सहित कई वरिष्ठ प्रोफेसर मौजूद रहे।
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