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    CSJMU में स्टूडेंट्स ने सीखी निजामाबाद की 'ब्लैक पॉटरी':चाक पर उकेरी आधुनिक कला

    7 hours ago

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    छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय (CSJMU) का कैंपस इन दिनों पारंपरिक कला की सौंधी खुशबू से महक उठा। विश्वविद्यालय के इंस्टीट्यूट ऑफ फाइन आर्ट्स द्वारा आयोजित दो दिवसीय विशेष कार्यशाला में स्टूडेंट्स ने न केवल मिट्टी को आकार देना सीखा, बल्कि निजामाबाद की विश्व प्रसिद्ध 'ब्लैक पॉटरी' की बारीकियों को भी करीब से जाना। कुलपति के मार्गदर्शन में आयोजित इस वर्कशॉप का मुख्य उद्देश्य विलुप्त होती लोक कलाओं को आधुनिक शिक्षा के साथ जोड़कर विद्यार्थियों को अपनी जड़ों से रूबरू कराना था। विश्वविद्यालय की रिसर्च डीन डॉ. स्वेता पाण्डेय ने इस प्रयास की सराहना करते हुए कहा कि भारतीय लोक कला परंपरा को जीवित रखने के लिए ऐसे नवाचारी प्रयोग बेहद जरूरी हैं। इस पूरे आयोजन में आईआईटी कानपुर के रंजीत सिंह रोजी शिक्षा केंद्र की परियोजना कार्यपालक अधिकारी रीता सिंह और निजामाबाद से आए पारंपरिक कारीगरों का विशेष तकनीकी सहयोग रहा। इन कुशल कारीगरों ने जब चाक पर मिट्टी को घुमाया, तो स्टूडेंट्स उनकी फुर्ती और कलाकारी देख दंग रह गए। इंस्टीट्यूट ऑफ फाइन आर्ट्स के निदेशक डॉ. मिठाई लाल ने अतिथियों का स्वागत करते हुए कहा कि हमारी सांस्कृतिक विरासत का संरक्षण करना केवल एक शौक नहीं, बल्कि हम सबका नैतिक दायित्व है। उन्होंने जोर दिया कि किताबी ज्ञान के साथ-साथ जब छात्र अपने हाथों से कलाकृतियां गढ़ते हैं, तो उनमें व्यावहारिक समझ और आत्मविश्वास बढ़ता है। यह कार्यशाला इसी दिशा में एक सार्थक कदम है, जहां भविष्य के कलाकार अपनी मिट्टी और पर्यावरण के प्रति जागरूक हो रहे हैं। दो दिनों तक चली इस कार्यशाला का सफल समन्वय डॉ. राज कुमार सिंह और जे. बी. यादव ने किया। कैंपस में उत्साह का माहौल ऐसा था कि छात्र-छात्राएं घंटों तक मिट्टी के साथ प्रयोग करते नजर आए। ब्लैक पॉटरी की चमक और उस पर उकेरी गई महीन नक्काशी ने सभी का मन मोह लिया। इस दौरान डॉ. मंतोष, प्रियांशी, प्रिया मिश्रा, डॉ. बप्पा माजी, डॉ. रणधीर सिंह, विनय सिंह और तनीषा वाधवान सहित कई शिक्षक मौजूद रहे, जिन्होंने छात्रों का उत्साहवर्धन किया। कार्यक्रम के समापन पर सभी सहयोगियों का आभार व्यक्त किया गया।
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