Search…

    Saved articles

    You have not yet added any article to your bookmarks!

    Browse articles

    GDPR Compliance

    We use cookies to ensure you get the best experience on our website. By continuing to use our site, you accept our use of cookies, Privacy Policies, and Terms of Service.

    Top trending News
    bharathunt
    bharathunt

    डॉ. दीपक कोहली को मिला प्रतिष्ठित पुरस्कार:हिंदी में विज्ञान, सूचना प्रौद्योगिकी के प्रचार-प्रसार के लिए सम्मानित

    3 hours ago

    1

    0

    लखनऊ के डॉ. दीपक कोहली को हिंदी में विज्ञान और सूचना प्रौद्योगिकी के प्रचार-प्रसार के लिए प्रतिष्ठित 'प्रवीण स्मृति सूचना प्रौद्योगिकी पुरस्कार' से सम्मानित किया गया है। यह सम्मान विज्ञान परिषद् प्रयाग की ओर से आयोजित एक समारोह में प्रदान किया गया। विज्ञान परिषद् प्रयाग, जो देश में विज्ञान के प्रचार-प्रसार और वैज्ञानिक सोच को बढ़ावा देने वाली एक अग्रणी संस्था है, ने नागरी प्रेस, अलोपीबाग, प्रयागराज में यह भव्य समारोह आयोजित किया। इसमें शिक्षा, विज्ञान और साहित्य जगत की कई प्रमुख हस्तियों ने भाग लिया। लखनऊ में विशेष सचिव के पद पर कार्यरत हैं चयन समिति ने डॉ. कोहली को हिंदी भाषा में विज्ञान एवं सूचना प्रौद्योगिकी विषयों पर उनके उत्कृष्ट, जनोन्मुख और प्रेरक लेखन के आधार पर सर्वसम्मति से इस सम्मान के लिए चुना। उनके लेखन को आमजन में वैज्ञानिक चेतना और तर्कशील दृष्टिकोण विकसित करने वाला माना गया है। डॉ. दीपक कोहली वर्तमान में उत्तर प्रदेश सचिवालय, लखनऊ में विशेष सचिव के पद पर कार्यरत हैं। वे अपने प्रशासनिक दायित्वों के साथ-साथ विज्ञान संप्रेषण को अपना महत्वपूर्ण मिशन मानते हैं। उनका लेखन जटिल वैज्ञानिक विषयों को सरल भाषा में प्रस्तुत करता है। हिंदी में विज्ञान लेखन को नई दिशा देने में अहम समारोह में परिषद् के सभापति प्रो. कृष्ण बिहारी पांडे, प्रधानमंत्री (विज्ञान परिषद् प्रयाग) डॉ. शिवगोपाल मिश्र और सॉफ्टवेयर इंजीनियर अभिनव कोहली सहित कई शिक्षाविद, वैज्ञानिक, साहित्यकार और गणमान्य अतिथि उपस्थित थे। वक्ताओं ने डॉ. कोहली के योगदान की सराहना करते हुए कहा कि हिंदी में विज्ञान लेखन को नई दिशा देने में उनका कार्य अत्यंत प्रेरणादायक है। अपने सम्मान पर आभार व्यक्त करते हुए डॉ. कोहली ने कहा कि विज्ञान केवल प्रयोगशालाओं तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि समाज के हर वर्ग तक उसकी पहुंच आवश्यक है। उन्होंने हिंदी में विज्ञान लेखन को और अधिक व्यापक, प्रभावशाली और जनसुलभ बनाने के लिए निरंतर प्रयासरत रहने का संकल्प लिया।
    Click here to Read more
    Prev Article
    कानपुर में होलिका दहन में हिंदू-मुस्लिम साथ:140 साल पुरानी परंपरा, मुसलमान करते हैं होली की तैयारी
    Next Article
    सिद्धार्थनगर में 6 छात्रों को मोमबत्ती से दागा:माधव प्रसाद मेडिकल कॉलेज में सिर्फ एक सीनियर छात्र पर 15-20 के उत्पीड़न के आरोप से उठे सवाल

    Related न्यूज Updates:

    Comments (0)

      Leave a Comment