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    कानपुर में होलिका दहन में हिंदू-मुस्लिम साथ:140 साल पुरानी परंपरा, मुसलमान करते हैं होली की तैयारी

    4 hours ago

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    कानपुर में होली पर एकता और गंगा-जमुनी तहज़ीब की परंपरा निभाई जा रही है। हिंदू-मुस्लिम होलिका दहन में साथ रहते हैं। 140 साल से हिंदुओं की होलिका दहन की तैयारी मुस्लिम करते हैं। शहर की दादामिंया की मजार, जो तकरीबन 200 साल पुरानी है। अंग्रेजों के समय यहां कई क्रांतिकारियों का जमावड़ा रहता था। यहां हजरत दादामिंया जब थे, तो अंग्रेज उस समय किसी त्योहार को मनाने की इजाजत नहीं देते थे। उस वक्त बेकनगंज इलाके में मिश्रित आबादी हुआ करती थी। तब दादामिंया ने यहां होलिका दहन की परंपरा शुरू कराई थी। तब से यहां मुस्लिम हिंदुओं के त्योहार होलिका दहन का इंतजाम करते हैं। यहां राम बालक अत्तर के नाम से 150 साल पुरानी दुकान राम बालक के नाम से है। उनकी तीसरी पीढ़ी के प्रेम राज उर्फ पम्मी ने बताया कि यहां अब केवल उनकी ही दुकान है, जो हिंदू हैं। लेकिन मेरे परिवार से जुड़ी इस परंपरा में, जिसमें दादामिंया पर होलिका दहन का कार्यक्रम होता है। लगातार यहां के मुस्लिम भाई होलिका की लकड़ी से लेकर सजाने का कार्य करते हैं। जब होलिका दहन होती है, तो मुस्लिम भाई हमारे साथ मौजूद रहते हैं। इसके बाद जब हम लोग होलिका की पूजा कर लेते हैं, तो मुस्लिम भाई होली की बधाई गले मिलकर देते हैं। दादामिंया मजार से एकता पैगाम दादामिंया मजार के सज्जादा नशीन अबुल बरकात नजमी ने बताया कि हजरत दादामिंया का ये स्थान कई मायनों में महत्वपूर्ण है। देश की आजादी से लेकर क्रांतिकारियों का यहां आना-जाना और एकता का पैगाम पूरे देश में देना यहां की पहचान है। उन्होंने कहा, त्योहार का मतलब ही आपसी एकता नजर आए। हजरत दादामिंया ने यहां आकर हिंदू-मुस्लिम को एक रखने का काम किया। एक-दूसरे का सम्मान और उनके त्योहारों का सम्मान किया जाना ही सबसे बड़ा फर्ज है। हम सब हिंदू, मुस्लिम, सिख सब एक हैं। दादामिंया चौराहे की होली पूरे देश को एकता का पैगाम देती है। इलाके में ही रहने वाले मोहम्मद जावेद ने बताया कि मैं बचपन से ही देख रहा हूं कि यहां हिंदुओं के लिए होलिका दहन का इंतजाम इलाके के मुस्लिम करते हैं। शाम को यहां होलिका दहन में साथ शामिल होते हैं। एक-दूसरे को गले मिलकर बधाई भी देते हैं। इस होलिका दहन में मुख्य रूप से राम बालक के पोते पम्मी इसमें शामिल होते हैं। इसके अलावा मुस्लिमों में शाहिद अजीज, मुस्तफा, तारिक कासिम, नूर मोहम्मद, सैय्यद नजम, पप्पू हसन और मोहम्मद सलीम अंसारी के साथ अन्य इलाकाई लोग मौजूद रहेंगे।
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