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    डीएम से बोले राजामंडी दुकानदार न तोड़ीं जाएं हमारी दुकान:हम सड़क पर आजाएंगे, कुछ लोग कर रहे गलत शिकायत, 75 सालों में किसी ने नहीं बताया अवैध

    3 hours ago

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    राजामंडी में स्थित 75 साल पुराने लाभचंद मार्केट के 25 से ज्यादा दुकानदारों ने शुक्रवार को कलेक्ट्रेट जाकर जिलाधिकारी अरविंद मल्लप्पा बंगारी को प्रार्थना पत्र सौंपा। दुकानदारों ने कहा कि बाजार पर कुछ लोग गलत शिकायतें कर रहे हैं और इसे नुकसान पहुंचाने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने प्रशासन से दुकानों को न तोड़ने की गुहार लगाई। दुकानदारों ने बताया कि लाभचंद मार्केट के दो पट्टे साल 1940 और 1947 में सरकार द्वारा दिए गए थे। पिछले 75 सालों में कभी इसे अवैध नहीं कहा गया और न ही किसी ने इसे अतिक्रमण बताया। बाजार पूरी तरह प्रशासन की जानकारी में रहा और कभी किसी तरह का उल्लंघन नहीं हुआ। प्रतिनिधिमंडल ने कहा कि हालिया विवाद किराया और उपकिराया के कारण शुरू हुआ। कुछ दुकानदार आज भी पुराने 50-100 रुपये प्रतिमाह किराये पर दुकान चला रहे हैं। जबकि उपकिराया लाखों रुपये में लिया जा रहा है। इसी कारण बाजार पर अवैध होने का आरोप लगाया जा रहा है। दुकानदारों ने यह भी कहा कि कुछ शिकायतों में पट्टे की जमीन को सड़क का हिस्सा बताया गया, जबकि 10 फरवरी 2026 के सरकारी सर्वे में साफ हुआ कि यह पूरी जमीन बाजार के लिए है और सड़क भूमि में नहीं आती। प्रतिनिधिमंडल ने पिछले 20 साल में कई शिकायतों में किसी मृत व्यक्ति के हस्ताक्षर मिलने की बात कही और इनकी जांच की मांग की। उन्होंने कहा कि यदि ऐसी गलत शिकायतों पर कार्रवाई हुई तो यह दुकानदारों के लिए हानिकारक होगा। उनकी मुख्य मांगें हैं कि 10 फरवरी 2026 के सर्वे की रिपोर्ट सार्वजनिक की जाए। झूठी शिकायतों के आधार पर कोई विध्वंस न किया जाए। पट्टों की स्थिति और पुनर्स्थापन की स्वतंत्र जांच कराई जाए। विधिसम्मत दुकानदारों और कर्मचारियों को तुरंत सुरक्षा दी जाए। प्रतिनिधिमंडल ने कहा कि बाजार से जुड़े अधिकांश परिवार तीसरी पीढ़ी से व्यवसाय कर रहे हैं और सैकड़ों लोगों की आजीविका इस बाजार पर निर्भर है। क्या है पूरा मामला राजामंडी स्थित धर्मलोक और चंद्रलोक होटल के नीचे बनी करीब 60 दुकानों को लेकर पूरा मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंच चुका है। आरोप है कि जिस जमीन पर यह मार्केट और होटल खड़े हैं, वह राजस्व रिकॉर्ड में सड़क के रूप में दर्ज है। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद राजस्व विभाग की टीम मौके पर पैमाइश कर चुकी है और अवैध निर्माणों का सीमांकन किया जा रहा है। यदि जांच में भूमि सड़क की श्रेणी में पाई जाती है तो दुकानों और ऊपर बने होटलों पर ध्वस्तीकरण की कार्रवाई हो सकती है। यह विवाद किराया और पट्टे के अधिकार को लेकर दुकानदारों और पट्टाधारकों के बीच शुरू हुआ था, जिसके बाद कथित अनियमितताओं और पट्टा निरस्तीकरण के आरोप सामने आए। याचिकाकर्ता एएस सूरी ने सुप्रीम कोर्ट में गुहार लगाई है कि यदि जमीन सार्वजनिक मार्ग की है तो उसे खाली कराकर रास्ता बहाल कराया जाए। फिलहाल जांच और सीमांकन की प्रक्रिया के बाद ही आगे की कार्रवाई तय होगी।
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