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    ​डिग्री के साथ 'वैज्ञानिक सोच' भी जरूरी:भविष्य संवारेगी AI और तकनीक की समझ; हर सहाय कॉलेज की गोष्ठी में बोले एक्सपर्ट्स

    2 hours ago

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    आज के दौर में सिर्फ किताबी ज्ञान काफी नहीं है, बल्कि चीजों को तर्क और विज्ञान की कसौटी पर परखना जरूरी है। इसी उद्देश्य के साथ हर सहाय महाविद्यालय में गुरुवार को एक विशेष विचार गोष्ठी का आयोजन किया गया। IQAC और विज्ञान संकाय के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस कार्यक्रम का विषय 'विद्यार्थियों में वैज्ञानिक दृष्टिकोण की आवश्यकता' रहा।​कार्यक्रम में वक्ताओं ने साफ किया कि विज्ञान केवल प्रयोगशाला तक सीमित नहीं है, बल्कि यह हमारे सोचने और जीने का एक तरीका है। ​रमन इफेक्ट से समझा विज्ञान का जादू ​कार्यक्रम के संयोजक डॉ. अखण्ड प्रताप सिंह ने सत्र की शुरुआत करते हुए विज्ञान की बारीकियों को समझाया। उन्होंने स्लाइड शो के जरिए विद्यार्थियों को बताया कि क्रमबद्ध ज्ञान ही असल में विज्ञान है। उन्होंने महान वैज्ञानिक सी.वी. रमन के 'रमन इफेक्ट' पर चर्चा करते हुए इसके लाभ और हानि के बारे में विस्तार से जानकारी दी। छात्रों ने स्लाइड के माध्यम से समझा कि कैसे एक छोटी सी खोज दुनिया को देखने का नजरिया बदल सकती है।​ ​'अच्छा इंसान बनना पहली प्राथमिकता' ​महाविद्यालय के प्राचार्य प्रो. अमर श्रीवास्तव ने अपने संबोधन में तकनीकी और मानवीय मूल्यों के तालमेल पर जोर दिया। उन्होंने कहा, "वैज्ञानिक दृष्टिकोण अपनाने का मतलब केवल मशीनें समझना नहीं, बल्कि अंधविश्वास से दूर रहकर तार्किक सोचना है।" प्राचार्य ने छात्रों को प्रेरित करते हुए कहा कि सफलता अपनी जगह है, लेकिन एक 'अच्छा इंसान' बनना जीवन की सबसे पहली और बड़ी उपलब्धि है। ​AI और भविष्य की तकनीक पर चर्चा ​सह-संयोजक डॉ. प्रदीप कुमार मिश्रा और डॉ. आलोक दीक्षित ने आधुनिक दौर की सबसे बड़ी जरूरत 'आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस' (AI) पर व्याख्यान दिया। उन्होंने स्लाइडों के माध्यम से बताया कि कैसे एआई और वैज्ञानिक सोच मिलकर छात्रों के लिए बेहतर भविष्य के दरवाजे खोल सकते हैं। वाणिज्य संकाय के विभागाध्यक्ष डॉ. सुशील कुमार श्रीवास्तव समेत अन्य वरिष्ठ शिक्षकों ने भी विद्यार्थियों को तकनीकी रूप से अपडेट रहने की सलाह दी। इस ज्ञानवर्धक सत्र में महाविद्यालय के विभिन्न विभागों के शिक्षक और बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं शामिल हुए। कार्यक्रम में मुख्य रूप से डॉ. कमलेश यादव, डॉ. संदीप कुमार रावत, डॉ. स्नेहा विश्वकर्मा, डॉ. रंजना शुक्ला, डॉ. सुनील कुमार मिश्रा, डॉ. अरुण कुमार श्रीवास्तव, डॉ. दिनेश, डॉ. के.के. गुप्ता, डॉ. साधना यादव, डॉ. अजय लक्ष्मी सिंह और डॉ. नीतू देवांगन उपस्थित रहे। सभी वक्ताओं ने एक सुर में कहा कि तकनीकी ज्ञान और वैज्ञानिक सोच ही उज्ज्वल भविष्य का आधार है।
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