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    डॉक्टर ने पेट में छोड़ दी पट्टी और रूई:सोनभद्र में कैंसर का डर दिखा कर किया बच्चेदानी का ऑपरेशन, केस दर्ज

    4 hours ago

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    सोनभद्र जिले के घोरावल कोतवाली क्षेत्र में महिला के बच्चेदानी का ऑपरेशन करने के बाद सर्जन ने पेट के अंदर ही ड्रेसिंग पट्टी और रूई छोड़ दिया। ऑपरेशन के बाद मरीज को 17 हजार का बिल थमा कर छुट्टी दे दी और डिस्चार्ज पेपर भी नहीं दिया। चार दिन बाद जब टांका काटने के लिए बुलाया गया तो पता चला कि अंदर का टांका टूट गया है। सर्जन ने फिर से ऑपरेशन किया और 27 हजार का बिल बनाया। छुट्टी के बावजूद मरीज के पेट में दर्द और हल्का पस बना रहा। इसके बाद परिवार के लोग मरीज को लेकर सीएचसी पहुंचे। यहां मरीज के जांच के दौरान पेट में ड्रेसिंग पट्टी और रूई पड़े होने के खुलासे ने उनके होश उड़ा दिए। इसके बाद मरीज को वाराणसी जाकर ऑपरेशन कराना पड़ा। जहां 14 फरवरी को डॉक्टरों ने ऑपरेशन करके महिला के पेट से ड्रेसिंग पट्टी और रूई बाहर निकाली। पीड़िता के भाई की तहरीर पर पुलिस ने महिला डॉक्टर के खिलाफ संबंधित धाराओं के तहत केस दर्ज कर जांच में जुटी हुई है। यहां जानें पूरा मामला कोतवाली क्षेत्र के मझिगवां चौहान निवासी मनोज कुमार का आरोप है कि उसकी बहन ऊषा देवी (43) पत्नी संतराम मौर्य निवासी बट, मधुपुर, थाना रॉबर्ट्सगंज को पेट में दिक्कत थी। इसकी रिपोर्ट दिखाने के लिए वह घोरावल क्षेत्र के पीसीएम अस्पताल पिपरवार गईं। वहां डॉ. अनीता सिंह मिली। उन्होंने रिपोर्ट देखकर कहा कि बच्चेदानी में समस्या है। तत्काल ऑपरेशन करा लीजिए नहीं तो कैंसर हो जाएगा। वह अपने ही अस्पताल में अच्छा सर्जन बुलाकर ऑपरेशन करवा देंगी। उसने 5 सितंबर 2025 को बहन को वहां भर्ती करा दिया। आराम न मिलने पर सीएचसी पहुंचे उसी दिन उसकी बच्चेदानी काटकर बाहर निकाल दी गई। बाहर से कोई डॉक्टर नहीं बुलाया गया। डॉ. अनीता ने खुद ही ऑपरेशन किया। 13 सितंबर 2025 को 17 हजार का बिल बनाया और रुपए लेकर छुट्टी दे दी। कोई डिस्चार्ज पेपर नहीं दिया गया। चार दिन बाद टांका काटने के लिए बुलाया। 17 सितंबर को पहुंचने पर कहा गया कि अंदर का टांका टूट गया है। दोबारा ऑपरेशन करना पड़ेगा। ऐसा न किए जाने पर जान जाने का डर दिखाते हुए 21 सितंबर को फिर से ऑपरेशन कर दिया गया। 10-12 दिन बाद 27 हजार का बिल बनाया गया। रुपये जमा करने के बाद छुट्टी दी गई। इस बार भी डिस्चार्ज पेपर नहीं दिया गया। कई दिनों तक दवा-उपचार के बाद भी घाव से दर्द और हल्का पस आने की स्थिति बनी रही। लगातार दवा के बाद भी आराम न मिलने पर वह उसे लेकर पीएचसी घोरावल पहुंचा। सीएचसी घोरावल में जांच में पता चला सीएचसी घोरावल में महिला रोग विशेषज्ञ डॉ. मुकेश प्रजापति ने जांच की। उन्होंने भी कुछ दिन दवा के बाद घाव को सूख जाने का भरोसा दिया लेकिन संक्रमण की स्थिति बनी रही। तब उन्होंने जिस जगह पहले ऑपरेशन किया गया था वहां छोटा कट लगाकर देखा तो पता चला कि उसके अंदर ड्रेसिंग करने वाली पट्टी काफी ज्यादा मात्रा में पड़ी हुई थी। दावा किया गया है कि डॉक्टर ने सिर्फ उसे ही नहीं उसकी बहन के परिवार के लोगों को भी बुलाकर पट्टी दिखाई। कहा कि इसे ठीक करने के लिए बड़ा ऑपरेशन करना पड़ा। इसके लिए उन्हें जिला चिकित्सालय या किसी बड़े अस्पताल में दिखाना पड़ेगा। तब वह लोग वाराणसी पहुंचे। वहां डॉ. सौरभ अग्रवाल को दिखाए। जांच के बाद 14 फरवरी को ऑपरेशन कर पेट में रूई व ड्रेसिंग पट्टी निकाली गई। शिकायत के बावजूद चल रहा पीसीएम अस्पताल वहीं, ग्रामीण दयाशंकर, विनोद कुमार, संतोष कुमार पाठक, विपिन कुमार, रामा यादव ने बताया कि यह पीसीएम अस्पताल सीएमओ कार्यालय में तैनात एक कर्मचारी का है, जो बिना रजिस्ट्रेशन के चल रहा है। यहां अप्रशिक्षित डाक्टरों द्वारा इलाज किया जा रहा है। इस अस्पताल में डॉक्टरों के लापरवाही से कई अन्य मौते भी हो चुकी है। ग्रामीणों के शिकायत के बावजूद भी सीएमओ कीओर से अब तक इस अस्पताल के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की गई। वहीं, प्रभारी निरीक्षक बृजेश कुमार सिंह के ने बताया कि शनिवार को देर रात पीसीएम अस्पताल के डॉ. अनीता के खिलाफ बीएनएस की संबंधित धारा-एक्ट के तहत मामला दर्ज कर जांच जारी है। ------- ये खबर भी पढ़िए… बेटे ने मां-बाप, बहन और दादी की हत्या की:बहराइच में घर में कुल्हाड़ी से 30 मिनट तक मारता रहा, भाई की हालत गंभीर बहराइच में युवक ने अपने माता-पिता, बहन और दादी को मार डाला। परिवार पर 30 मिनट तक कुल्हाड़ी से ताबड़तोड़ वार करता रहा। बीच-बचाव करने आए बड़े भाई की भी जान लेने की कोशिश की, लेकिन किसी तरह वो बच गया। 10 साल का भतीजा पूरी वारदात को छिपकर देखता रहा। पढ़िए पूरी खबर...
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