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    DAV पीजी कालेज पहुंचे अभिनेता संजय मिश्रा:सुनाया बनारस का पुराना किस्सा, बोले- यहां सजेशन देने वालों की कमी नहीं

    16 hours ago

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    डीएवी पीजी कालेज में युवा उत्सव के अंतिम दिन बॉलीवुड के अभिनेता और खाटी बनारसी संजय मिश्रा ने समां बांध दिया। मुख्य अतिथि के रूप में पहुंचे संजय मिश्रा से छात्रों ने उनकी फिल्मों के कई डायलॉग सुने साथ ही उनसे बनारसी किस्से भी जाने। संजय मिश्रा ने कहा- अच्छा लगा की यहां के छात्र मस्त हैं और उनमे जानने की इच्छा है। जो जानने की इच्छा रखेगा वही आगे बढ़ेगा। संजय मिश्रा ने एक किस्सा सुनाते हुए कहा काशी में सजेशन देने वालों की कमी नहीं है। जस्ट चिल यार डॉयलाग के पीछे का बताया राज छात्रों ने संजय मिश्रा से कई डायलॉग पर बात की; उसमें से फिल्म आल द बेस्ट के डायलॉग जस्ट चिल के पीछे की कहानी बताई। संजय ने कहा - एक महीना पहले मेरे पिता जी की डेथ हुई थी और मै बनारस से लौटा था। सेट पर पहुंचा तो अजय देवगन और संजय दत्त बैठे थे। पिता जी के बारे में बता हुई तो संजय दत्त ने कहा - बरखुरदार रोने-धोने से कुछ नहीं होगा। आगे बढ़ना होगा जस्ट चिल संजय। वो डायलॉग और एक्सेंट इतना पसंद आया सबको की पूरे सेट पर वही भाषा बोली जाने लगी और वह फिल्म भी आया। सबको अलग-अलग कैरेक्टर पसंद आता है, छाप एक छोड़ता है संजय मिश्रा ने छात्रों का जवाब देते हुए कहा - कई तरह के कैरेक्टर होते हैं। किसी को कोई -किसी को कोई पसंद आता है। जरूरी नहीं की जो मुझे पसंद आये वो आप को पसंद आये। कैरेक्टर ऐसा होना चाहिये की छाप छोड़ जाए। आप उससे जीवन में कुछ सीखें और उसे आत्मसात करें और वह आप का भविष्य संवारने में उपयोगी हो। काशी में सजेशन देने वाले बहुत संजय मिश्रा ने काशी का किस्सा याद करते हुए बताया - काशी में सजेशन देने वाले बहुत हैं। बात उस समय की है जब मै ट्रैफिक से बचने के लिए नाव से अस्सी घाट जाया करता था। क्योंकि ट्रैफिक में आगे गाड़ियां रुकी रहेंगी पर पीछे से हार्न की आवाज आती रहेगी। इसलिए नाव से जाता था। मुझे भी अस्सी घाट जाना था उस दिन। मेरे नाव वाले को 20 लोग रास्ता समझा रहे थे। आगे जाओगे, फिर वहां से सीढ़ी चढ़ोगे तो मुन्ना की चाय की दूकान पड़ेगी। तब तक दुसरे ने कहा अरे कहां मुन्ना की चाय है। हम बताते हैं और 45 मिनट तक लोग उसे रास्ता ही बताते रहे तो सजेशन देने वाले बहुत हैं यहां। बचपन से नाम सुना था आज अतिथि बनकर आया हूं डीएवी कालेज में आने पर उन्होंने कहा - बचपन से इस कालेज का नाम सुना था। आज आया हूं तो अच्छा लगेगा ही। संस्कृत में अच्छे मन्त्र सुनने को मिले हैं। इसके अलावा उन्होंने कहा मस्त छात्र हैं यहां के उनकी जानने की इच्छा अभी ज़िंदा है और यह आगे बढ़ने की सीढ़ी है।
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