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    एएमयू के चुनावी मंच से उठ रहे दुनिया के सवाल:चुनावी भाषणों में फिलिस्तीन-ईरान और सूडान तक आवाज उठा रहे प्रत्याशी

    2 hours ago

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    अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी (एएमयू) की छात्र राजनीति हमेशा से अपने अलग अंदाज और व्यापक वैचारिक दायरे के लिए पहचानी जाती रही है। यहां छात्रसंघ चुनाव सिर्फ पदों की दावेदारी और कैंपस के मुद्दों तक सिमटकर नहीं रहते। इस बार भी चुनावी मंचों से उठ रही आवाजें इसकी झलक दिखा रही हैं। हॉस्टलों और हॉलों में हो रही प्रत्याशियों की स्पीच में छात्रहित के साथ फिलिस्तीन, ईरान, सूडान, मस्जिद-ए-अक्सा, अमेरिकी नीतियों और देश के राजनीतिक-सामाजिक सवालों तक की चर्चा हो रही है। यानी एएमयू के चुनावी मंच से उठने वाली आवाज का दायरा कैंपस की दीवारों से निकलकर दुनिया तक पहुंच रहा है। फिलिस्तीन और ईरान के लोगों के नाम पैगाम प्रत्याशी नौमान अशरफ ने अपने भाषण में फिलिस्तीन के मजलूमों, ईरान के लोगों और सूडान के लोगों का जिक्र करते हुए उनके प्रति एकजुटता जाहिर की। उन्होंने कहा कि घबराने की जरूरत नहीं है, हर तारीखी के बाद सुबह होती है। अपने संबोधन में उन्होंने कहा, 'इंशाल्लाह फतह आएगी, अबाबीलों का लश्कर आएगा। अल्लाह तुम्हारी मदद करेगा।' उनकी इस स्पीच में एएमयू के मंच से अंतरराष्ट्रीय संघर्षों और उनसे जुड़े मानवीय सवालों को आवाज दी गई। उमर खालिद और शरजील इमाम का भी जिक्र नौमान अशरफ ने अपने भाषण में उमर खालिद और शरजील इमाम का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने प्रशासन पर निशाना साधते हुए कहा कि उनके दो सितारों को जेल में डालने का काम किया गया। इसी दौरान उन्होंने सावरकर का उदाहरण देते हुए माफी मांगने का जिक्र भी किया। इससे पहले भी एएमयू के चुनावी भाषणों में उमर खालिद और शरजील इमाम का नाम चर्चा में रहा है। इस बार भी यह मुद्दा छात्र नेताओं की स्पीच का हिस्सा बना हुआ है। 2019 की रात और पुलिस कार्रवाई की यादें प्रत्याशी अहमद फराज राजी ने अपने भाषण में दिसंबर 2019 में सीएए-एनआरसी विरोध के दौरान एएमयू कैंपस में हुई पुलिस कार्रवाई को याद किया। उन्होंने उस रात छात्रों पर लाठीचार्ज, छात्राओं के दुपट्टे खींचे जाने और हॉस्टलों में पुलिस के पहुंचने का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि छात्रों ने उस रात को नहीं भुलाया है। अपने संबोधन में उन्होंने इस बार छात्रों को पीछे नहीं हटने देने और मुकाबला करने की बात कही। उनके भाषण में उस दौर की यादें और छात्र आंदोलन का संदर्भ प्रमुखता से रहा। मस्जिद-ए-अक्सा से अमेरिकी नीतियों तक की बात प्रत्याशी मोहम्मद इंतखाब ने अपने भाषण में कहा कि अलीगढ़ में बैठा छात्र नेता केवल यूनिवर्सिटी के मुद्दों तक सीमित नहीं रह सकता। किसानों और मजदूरों के साथ होने वाले जुल्म और शोषण पर बोलना भी उसकी जिम्मेदारी है। उन्होंने अमेरिकी कार्रवाई और नीतियों के खिलाफ आवाज उठाने के साथ मस्जिद-ए-अक्सा के मुद्दे पर भी बोलने को अपनी जिम्मेदारी बताया। उनके भाषण में छात्र राजनीति को व्यापक सामाजिक और अंतरराष्ट्रीय सरोकारों से जोड़ने की बात दिखाई दी। कैंपस की राजनीति, लेकिन सरोकार पूरी दुनिया से एएमयू छात्रसंघ चुनाव की यही खासियत एक बार फिर सामने आ रही है। यहां चुनावी भाषणों में विश्वविद्यालय की समस्याओं, छात्र अधिकारों और प्रशासनिक सवालों के साथ दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में चल रहे संघर्षों का भी जिक्र हो रहा है। प्रत्याशी अपने भाषणों के जरिए यह संदेश देने की कोशिश कर रहे हैं कि छात्र राजनीति का सरोकार केवल अपने कैंपस तक नहीं, बल्कि समाज और दुनिया में घट रही घटनाओं से भी होना चाहिए। स्पीच के वीडियो सोशल मीडिया पर चर्चा में हॉस्टलों और हॉलों में हो रहे इन भाषणों के वीडियो लगातार सोशल मीडिया पर साझा किए जा रहे हैं। इन पर समर्थन के साथ तंज और अलग-अलग प्रतिक्रियाएं भी देखने को मिल रही हैं। फिलिस्तीन से लेकर सूडान तक और उमर खालिद से लेकर 2019 के आंदोलन तक, चुनावी स्पीच में उठ रहे मुद्दे एएमयू छात्रसंघ चुनाव को कैंपस के भीतर ही नहीं, बाहर भी चर्चा का विषय बना रहे हैं। दुनिया भर में एएमयू की छात्र राजनीति को जिस नजर से देखा जाता है, उसके पीछे यहां के छात्र नेताओं की यही व्यापक वैचारिक और अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर मुखर आवाज भी एक वजह रही है।
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