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    एक्टू ने नोएडा मजदूरों के दमन पर विरोध जताया:रायबरेली में सिटी मजिस्ट्रेट को ज्ञापन सौंपा गया

    2 hours ago

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    ऑल इंडिया सेंट्रल काउंसिल ऑफ ट्रेड यूनियंस (एक्टू) ने नोएडा के आंदोलनरत मजदूरों पर हो रही कार्रवाई के विरोध में रायबरेली जिला मुख्यालय पर प्रदर्शन किया। यह प्रदर्शन राज्यव्यापी आह्वान के तहत किया गया, जिसके बाद सिटी मजिस्ट्रेट को एक ज्ञापन भी सौंपा गया। प्रदर्शनकारियों को संबोधित करते हुए एक्टू के प्रदेश अध्यक्ष विजय विद्रोही ने कहा कि मजदूरों की जायज मांगों को स्वीकार करने के बजाय उन पर लाठीचार्ज, गोली चलाने और आंदोलन को कुचलने के लिए रैपिड एक्शन फोर्स (आरएएफ) व पीएसी का इस्तेमाल निंदनीय है। सामाजिक सुरक्षा की गारंटी उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार श्रम और पारिश्रमिक की लूट रोकने, जीवन जीने लायक वेतन तथा बेहतर कार्य स्थिति व सामाजिक सुरक्षा की गारंटी देने के बजाय मजदूरों का दमन कर रही है। विजय विद्रोही ने बताया कि पूरे दिल्ली-एनसीआर क्षेत्र में कंपनी मालिक मजदूरों को मात्र 11-12 हजार रुपये मासिक पर 12-12 घंटे काम करने के लिए मजबूर करते हैं। बुनियादी अधिकारों से वंचित एनसीआर के मजदूर पक्की नौकरी, ईएसआई, पीएफ, बोनस और ओवरटाइम जैसे बुनियादी अधिकारों से वंचित हैं। नोएडा और आसपास के इलाकों में ऋचा ग्लोबल एक्सपोर्ट्स, मदरसन, केंट आरओ सिस्टम्स लिमिटेड, डिक्सन टेक्नोलॉजीज़ इंडिया प्राइवेट लिमिटेड रेनबो फैबआर्ट प्राइवेट लिमिटेड, स्पार्क मिंडा साई लिमिटेड, आइटल मोबाइल डिवाइसेज प्राइवेट लिमिटेड, अनुभव अपैरल्स प्राइवेट लिमिटेड जैसी कई कंपनियों के मजदूर पुलिस दमन के बावजूद लगातार आंदोलनरत हैं। मजदूरों की मांगों पर बातचीत और सुनवाई करने के बजाय, उत्तर प्रदेश सरकार ने भारी मात्रा में रैपिड एक्शन फोर्स, पीएसी और अन्य अर्धसैनिक बलों को तैनात किया है। इसके साथ ही मालिकों की गुंडा वाहिनियों और पुलिस बल को उतारकर लाठीचार्ज, आंसू गैस और गोली चलाने की बर्बर कार्रवाई की खुली छूट दी गई है। कार्यकर्ताओं और मजदूरों को कानूनी मदद महिला मजदूरों के साथ अमर्यादित और आपत्तिजनक व्यवहार किया गया है, तथा मजदूरों और ट्रेड यूनियन नेताओं की अंधाधुंध गिरफ्तारियां जारी हैं। भाकपा ( माले) जिला सचिव हनोमान अंबेडकर ने कहा कि कई मजदूर संगठनों के कार्यकर्ताओं और मजदूरों को कानूनी मदद करने के लिए गए वकीलों तक को नोएडा पुलिस ने अपना निशाना बनाया है। सरकार अपनी कमियों को छिपाने और मजदूरों का शोषण करने वाले पूंजीपतियों की काली करतूतों को पर्दा डालने के लिए जीवन जीने लायक वेतन और कार्यदशा की मांग को पूरा करने के बजाय आंदोलन को बदनाम करने की मनगढ़ंत कहानियां प्रचारित करवा रही हैं। गौरतलब है कि पिछले 10 वर्ष से 12 घंटे से अधिक काम की मजदूरी में 1 रूपये की वृद्धि नहीं हुई है। नोएडा में हुई आगजनी तोड़ फोड़ की घटनाओं के पीछे भी कम्पनियों के बाउंसरों का हाथ है । ऐक्टू नेता राम गोपाल ने कहा कि नोएडा के अलावा देश के कई अन्य हिस्सों में 12 घंटे के कार्यदिवस को थोपने के खिलाफ, ओवरटाइम काम के लिए डबल रेट से पेमेंट करने, कॉन्ट्रैक्ट कर्मचारियों के शोषण पर रोक लगाने जैसी मांगों को लेकर मजदूर निरंतर संघर्ष कर रहे हैं। आइलाज जिला संयोजक सुरेश शर्मा एडवोकेट ने कहा कि योगी सरकार की पुलिस मजदूरों के खिलाफ भारी दमन पर आमादा है। निरंतर चल रहे प्रदर्शनों से यह बात साफ है कि मजदूरों ने कॉरपोरेट मुनाफाखोरों और डबल इंजन की सरकारों के गठजोड़ बेनकाब कर दिया है। बाद में राज्य पाल को संबोधित 5 सूत्रीय ज्ञापन देकर मांग की गई हिंसा की घटना की जांच के लिए उच्च न्यायालय के न्यायाधीश की अध्यक्षता में बने आयोग का गठन किये जाने,सभी गिरफ्तार मजदूरों, नेताओं को तत्काल बिना शर्त रिहा किए जाने ,मजदूरों पर बर्बर दमन के लिए सरकार माफी मांगे । गौतमबुद्ध नगर के जिलाधिकारी,पुलिस कमिश्नर , उपश्रमायुक्त सहित इस परिस्थिति के लिए जिम्मेदार अधिकारियों को तत्काल हटाये जाने ,प्रदेश में 8 घंटे के काम की न्यूनतम मजदूरी रु 34000 की जाने व ओवर टाइम स्वेक्षिक करर्कुलर जारी किया जाने की मांग की गई। आशा यूनियन जिलाध्यक्ष गीता मिश्रा, ममता पाल, राधा राजपुत , सुमन कुमारी , फूल चंद्र मौर्या,नईम ने भी प्रदर्शन को संबोधित किया।
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