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    एलडीए में नई भर्ती इंजीनियरों पर भ्रष्टाचार के दाग:6 महीने में 4 पर कार्रवाई, 3 सस्पेंड, 1 रिश्वत लेते पकड़ा गया

    2 hours ago

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    लखनऊ में अवैध निर्माणों पर लगाम लगाने के लिए भर्ती किए गए एलडीए के नए इंजीनियर ही अब सवालों के घेरे में हैं। पिछले छह महीनों में अवैध निर्माण और भ्रष्टाचार से जुड़े मामलों में चार नए भर्ती इंजीनियरों पर कार्रवाई हो चुकी है। इनमें तीन को निलंबित किया जा चुका है, जबकि एक रिश्वत लेने के आरोप में जेल जा चुका है। वहीं सात अन्य इंजीनियरों के खिलाफ शिकायतें शासन तक पहुंचने के बाद जांच चल रही है। अवैध निर्माण रोकने के बजाय वसूली का आरोप शहर के अलग-अलग इलाकों में बिना मानचित्र स्वीकृति और नियमों के विपरीत बहुमंजिला इमारतें खड़ी हो रही हैं। आरोप है कि कुछ इंजीनियर कथित दलालों और बाहरी लोगों के साथ मिलकर ऐसे निर्माणों को संरक्षण दे रहे हैं। निर्माण शुरू होने से लेकर पूरा होने तक कथित वसूली का सिलसिला चलता है। यही कारण है कि कई शिकायतों के बावजूद अवैध निर्माणों पर समय रहते कार्रवाई नहीं हो पाती। गलत रिपोर्ट देकर बचाए गए निर्माण शिकायतों में यह भी आरोप लगाया गया है कि कई मामलों में मौके की वास्तविक स्थिति के विपरीत रिपोर्ट लगाई गई। कहीं अवैध निर्माण को वैध बताने की कोशिश हुई तो कहीं कार्रवाई टालने के लिए भ्रामक आख्या भेजी गई। हाल के जिन मामलों में कार्रवाई हुई है, उनमें अधिकांश इंजीनियर नई भर्ती के हैं। इन इंजीनियरों के खिलाफ पहले भी भेजी गई थीं रिपोर्टें पूर्व में सहायक अभियंता सीजी शुक्ला, रसीद बेग, बीपी सिंह, साजिद हसन, मनोज कुमार उपाध्याय, चंद्रभानु, रवींद्र कुमार और अमर दीप कुमार (जिन्होंने बाद में इस्तीफा दे दिया) के खिलाफ रिपोर्ट शासन को भेजी गई थी। वहीं अवर अभियंता देवेंद्र नाथ मिश्र, आरके सिंह, रजनीश कुमार श्रीवास्तव, संजय गुप्ता, पौहारी यादव, अमर कुमार मिश्रा, पीएन पांडेय, ओपी गुप्ता, सुनील कुमार, देशराज सिंह, एके सिंह, अरविंद त्यागी, आदर्श भटनागर, नवीन शर्मा, पीएन दुबे और गंगेश कुमार के नाम भी जांच रिपोर्टों में शामिल रहे हैं। आरोपों के बाद भी प्रवर्तन विभाग में जमे अधिकारी एलडीए के प्रवर्तन विभाग में कई इंजीनियर वर्षों से तैनात हैं। इनमें कुछ के खिलाफ पहले भी गंभीर शिकायतें हुईं और निलंबन की संस्तुति शासन को भेजी गई, लेकिन कार्रवाई नहीं हुई। इनमें विपिन बिहार राय, संजय शुक्ला, संजय वशिष्ठ, प्रमोद पांडेय और रवि राय शामिल हैं। संजय शुक्ला और प्रमोद पांडेय का नाम अलीगंज अग्निकांड के बाद हुई कार्रवाई में भी सामने आया था। वहीं मुख्य नगर नियोजक केके गौतम का तबादला होने के बावजूद अब तक कार्यमुक्त न होना भी सवाल खड़े कर रहा है। जानकारों का कहना है कि लंबे समय तक एक ही विभाग में तैनाती और कार्रवाई में ढिलाई से अवैध निर्माण का नेटवर्क लगातार मजबूत हो रहा है।
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