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    फोड़े के ऑपरेशन के बाद बच्ची की तड़प-तड़पकर मौत:कानपुर में मां की गोद में सांस थमी, पिता बोले-इलाज के बाद डॉक्टर गायब हो गए

    16 hours ago

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    कानपुर में मामूली फोड़े के ऑपरेशन के बाद एक बच्ची की मौत हो गई। ओटी से निकलते ही उसकी तबियत बिगड़ गई। तब तक डॉक्टर जा चुके थे। उसने मां की गोद में दम तोड़ दिया। परिवार ने हॉस्पिटल प्रबंधन पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए हंगामा किया। उनका आरोप है कि ऑपरेशन के बाद डॉक्टर लापता हो गए। गिड़गिड़ाते रहे, लेकिन डॉक्टर नहीं पहुंचे। हॉस्पिटल में कोई भी ड्यूटी डॉक्टर नहीं था। जब तक डॉक्टर पहुंचे बच्ची ने दम तोड़ दिया। परिवार के लोगों ने हॉस्पिटल संचाल के खिलाफ रावतपुर थाने में तहरीर देकर कार्रवाई की मांग की है। यह घटना रावतपुर में नमक फैक्ट्री चौराहा पर देव ऑर्थोपेडिक हॉस्पिटल की है। अब विस्तार से जानिए पूरा मामला… बर्रा-8 सी-ब्लॉक मकान नंबर 289 में रहने वाले राहुल सिंह प्राइवेट नौकरी करते हैं। उनके दो बच्चे हैं। बेटी आरूषी (09) और बेटा आरूष (07)) बेटी आरूषी के पैर में फोड़ा था। उन्होंने नमक फैक्ट्री चौराहा स्थित देव ऑर्थोपेडिक सेंटर हॉस्पिटल के डॉक्टर टीपी सिंह को दिखया था। डॉक्टर ने पैर में मवाद पड़ने की वजह से छोटा सा ऑपरेशन कराने की सलाह दी। 21 फरवरी की दोपहर 1:30 बजे आरूषी को एडमिट कराया। इसके अलगे दिन 22 फरवरी को दोपहर करीब 1:20 बजे बेटी के पैर का ऑपरेशन किया। पिता राहुल ने आरोप लगाया कि ऑपरेशन के बाद ही बच्ची की तबियत बिगड़ गई थी। उस दौरान हॉस्पिटल में कोई ड्यूटी डॉक्टर मौजूद नहीं था। परिवार के लोग गिड़गिड़ाते रहे। ऑपरेशन करने वाले डॉ. टीपी सिंह को बुलाने की मिन्नत करते रहे, लेकिन किसी ने एक नहीं सुना। बच्ची की हालत बिगड़ती चली गई और करीब 4 घंटे बाद डॉ. टीपी सिंह पहुंचे तब तक बहुत देर हो चुकी थी। बच्ची ने अपनी मां दीपिका की गोद में तड़प-तड़प कर दम तोड़ दिया। पिता राहुल ने बताया कि वह भी रोते हुए हाॅस्पिटल स्टाफ के आगे-पीछे दौड़ते रहे, मिन्नतें करते रहे लेकिन किसी ने एक नहीं सुनी। आरोप है कि बच्ची की मौत के बाद हॉस्पिटल के डॉक्टर और स्टाफ वहां से भाग निकला। ऑपरेशन के बाद से ही हालत बिगड़ी, डॉक्टर ने ध्यान नहीं दिया बच्ची के मामा अभय सिंह ने बताया कि बच्ची के पैर ज्वाइंट के पास पस था। डॉक्टर टीपी सिंह ने नॉर्मल ऑपरेशन करने की बात कही थी। रविवार को दोपहर में ऑपरेशन के बाद वह ऑपरेशन थिएटर से बाहर निकली तब ही उसकी हालत गंभीर थी। स्टाफ नर्स ने कॉल करके डॉक्टर टीपी सिंह को बताया कि बच्ची की हालत गंभीर है, इसके बाद भी डॉक्टर नहीं पहुंचे। कॉल करने के करीब आधा घंटे बाद डॉक्टर पहुंचे, लेकिन तब तक बच्ची की मौत हो गई थी। हॉस्पिटल में कोई भी इंतजाम नहीं है। हॉस्पिटल में आईसीयू नहीं है। बच्ची ने टॉयलेट कर दी तो उसे साफ करने वाला कोई नहीं था। बच्ची का बीपी और पल्स चेक करने का भी कोई प्रबंध नहीं था। बिटिया की हालत गंभीर होने पर डॉक्टर पहुंचे, लेकिन तब तक उसकी मौत हो गई थी। उन्होंने कहा कि शाम 6 बजे के बाद ही दवा देंगे, लेकिन उसकी मौत हो गई। परिवार में कोहराम, कार्रवाई से मांग पिता राहुल ने बताया कि वह प्राइवेट जॉब करके अपने परिवार का पालन-पोषण करते हैं। हॉस्पिटल प्रबंधन ने ऑपरेशन के नाम पर पहले ही 35 हजार रुपए और दवा के नाम पर 26 हजार रुपए जमा कराए थे। 61 हजार रुपए एडवांस में जमा कराने के बाद भी हंसते-खेलते अस्पताल गई बच्ची की लाश हमें वापस मिली। इस तरह के डॉक्टरों और अस्पताल संचालकों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए। गुस्साए परिजनों ने हंगामा काटा बच्ची की मौत के बाद परिवार ने अस्पताल में हंगामा किया। रावतपुर पुलिस को जानकारी दी। सूचना पर पुलिस फोर्स मौके पर पहुंची। परिजनों को कार्रवाई का आश्वासन देकर शांत कराया। जांच के बाद शव को पोस्टमॉर्टम के लिए भेज दिया। डीसीपी वेस्ट बोले- बच्ची की मौत की जानकारी मिली है। परिवार ने इलाज में लापरवाही का आरोप लगाया है। पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट और सीएमओ की जांच रिपोर्ट के बाद मामले में कार्रवाई की जाएगी। -एसएम कासिम आबिदी, डीसीपी वेस्ट -------------------- ये खबर भी पढ़ें… शंकराचार्य पर रविंद्र पुरी बोले-अगर आरोप सही तो दंड मिले:योगेश्वरी ने कहा- छवि खराब करने की कोशिश; बच्चों से कुकर्म पर संत समाज बंटा प्रयागराज की पॉक्सो कोर्ट ने शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के खिलाफ यौन शोषण के आरोपों में FIR दर्ज करने का आदेश दिया है। यह आदेश 2 नाबालिग बच्चों के गंभीर आरोपों के आधार पर है। कोर्ट के इस आदेश के बाद मामला कानूनी और सामाजिक दोनों स्तरों पर चर्चा का विषय बन गया है। पूरी खबर पढ़ें…
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