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    फाल्गुन में बच्चों की सेहत का रखें खास ख्याल:डॉ. वंदना पाठक के शिविर में 110 बच्चों को मिला 'स्वर्णप्राशन' का सुरक्षा कवच

    23 hours ago

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    कानपुर में शनिवार को आरोग्य क्लिनिक, CSJM यूनिवर्सिटी स्वास्थ्य केंद्र और राजकीय बाल गृह में विशेष स्वास्थ्य शिविर का आयोजन किया गया। वरिष्ठ आयुर्वेदाचार्य डॉ. वंदना पाठक के निर्देशन में आयोजित इस एक दिवसीय निशुल्क स्वर्णप्राशन संस्कार शिविर में बच्चों के शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाने पर जोर दिया गया। नेशनल इंटीग्रेटेड मेडिकल एसोसिएशन (NIMA) महिला फोरम की सचिव डॉ. पाठक ने इस दौरान लगभग 110 बच्चों को स्वर्णप्राशन की खुराक पिलाई। बीमारियों से लड़ने की शक्ति देता है स्वर्णप्राशन शिविर में अभिभावकों को संबोधित करते हुए डॉ. वंदना पाठक ने कहा कि आयुर्वेद में वर्णित 16 संस्कारों में स्वर्णप्राशन का विशेष स्थान है। यह न केवल बच्चों की रोग प्रतिरोधक क्षमता (इम्युनिटी) को बढ़ाता है, बल्कि उनके मानसिक विकास के लिए भी रामबाण है। उन्होंने बताया कि जिन बच्चों को नियमित रूप से यह खुराक दी जाती है, उनमें मौसम बदलने पर होने वाली बीमारियां बहुत कम देखी जाती हैं। यह औषधि स्वर्ण भस्म, वच, गिलोय, ब्राह्मी, शुद्ध घी और शहद के मिश्रण से तैयार की जाती है, जो याददाश्त तेज करने में भी सहायक है। फाल्गुन मास में खान-पान का रखें विशेष ध्यान ऋतु परिवर्तन के इस दौर पर जानकारी देते हुए डॉ. पाठक ने बताया कि फाल्गुन का महीना शीत ऋतु के विदाई और वसंत के आगमन का समय होता है। आयुर्वेद के अनुसार इस समय शरीर में कफ दोष बढ़ने की आशंका रहती है, इसलिए खान-पान में सावधानी बरतना जरूरी है। उन्होंने अभिभावकों को सलाह दी कि वे बच्चों को हल्का और सुपाच्य भोजन दें। इस मौसम में पुराने चावल, जौ, गेहूं और मूंग की दाल का सेवन लाभकारी होता है। साथ ही मेथी, पालक और बथुआ जैसी हरी सब्जियों को डाइट में शामिल करना चाहिए। कफ के संतुलन के लिए गुनगुने पानी और अदरक वाले काढ़े का प्रयोग भी बेहतर बताया गया है। मानसिक स्वास्थ्य के लिए स्नेहपूर्ण वातावरण जरूरी डॉ. पाठक ने बच्चों के पालन-पोषण के मनोवैज्ञानिक पहलू पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने चेतावनी दी कि बच्चों को बार-बार डांटना या शारीरिक दंड देना उनकी सेहत पर बुरा असर डालता है। इससे न केवल उनका मानसिक स्वास्थ्य प्रभावित होता है, बल्कि उनकी शारीरिक रोग प्रतिरोधक क्षमता भी कमजोर पड़ जाती है। बच्चों के बेहतर विकास के लिए घर में प्यार और सकारात्मकता का माहौल होना अनिवार्य है। शिविर के इस आयोजन में राजकीय बाल गृह की शिक्षिका सुमन, स्वास्थ्य केंद्र की सिस्टर ऊषा, आरोग्य क्लिनिक से धर्मेंद्र, सावित्री, निशा और शेखर उपस्थित रहे। शिविर के अंत में अभिभावकों को बासी भोजन, अधिक ठंडी वस्तुओं और तले-भुने खाने से परहेज करने की सख्त हिदायत दी गई।
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