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    फ्लैशलाइट और टॉर्च की रोशनी में खाना बना रहे लोग:सिद्धार्थनगर में रोस्टिंग के नाम पर 6 घंटे तक बिजली कटौती, बच्चों की पढ़ाई रुकी

    1 day ago

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    सिद्धार्थनगर के ग्रामीण इलाकों में बिजली कटौती ने लोगों की दिनचर्या बिगाड़ दी है। ग्रामीणों का आरोप है कि 18 घंटे बिजली आपूर्ति देने के दावे के बावजूद उन्हें मुश्किल से 12 घंटे ही बिजली मिल पा रही है। दिन और रात मिलाकर करीब छह घंटे तक अलग-अलग समय पर रोस्टिंग के नाम पर आपूर्ति बाधित रहती है। सबसे ज्यादा परेशानी शाम के समय होती है, जब बच्चे पढ़ाई की तैयारी करते हैं और घरों में खाना बनाने का काम शुरू होता है। ग्रामीणों के मुताबिक, बिजली कटौती एक साथ नहीं बल्कि अलग-अलग समय पर की जा रही है। बिजली आने-जाने का कोई निश्चित समय नहीं होने से लोगों को यह भी पता नहीं रहता कि कब आपूर्ति बंद हो जाएगी। शाम करीब सात बजे होने वाली कटौती से घरों में अंधेरा छा जाता है। कई परिवारों को मोबाइल की फ्लैशलाइट और टॉर्च की रोशनी में खाना बनाने और दूसरे घरेलू काम करने पड़ते हैं। रात में बिजली आने के बाद भी लोगों को ज्यादा राहत नहीं मिलती। कुछ देर आपूर्ति के बाद फिर कटौती हो जाती है। कई गांवों में लोग देर रात तक बिजली आने का इंतजार करते हैं। इससे बच्चों की पढ़ाई प्रभावित होने के साथ सुबह उन्हें स्कूल भेजने और ग्रामीणों को काम पर जाने में भी परेशानी होती है। लगातार कटौती को लेकर अब सोशल मीडिया पर भी ग्रामीणों की नाराजगी सामने आ रही है। शाम 7 बजे कटौती से सबसे ज्यादा परेशानी ग्रामीणों के अनुसार शाम करीब सात बजे होने वाली कटौती सबसे ज्यादा मुश्किल पैदा करती है। इसी समय बच्चे स्कूल और दूसरे कामों से लौटकर पढ़ाई की तैयारी करते हैं। घरों में खाना बनाने का काम भी शुरू होता है। बिजली गुल होने पर पानी की मोटर, रोशनी और रसोई से जुड़े कई जरूरी काम रुक जाते हैं। रात में भी बार-बार कटौती, देर तक करना पड़ता है इंतजार ग्रामीणों का कहना है कि रात में बिजली आने के बाद कुछ समय तक ही आपूर्ति रहती है। इसके बाद दोबारा बिजली चली जाती है। कई बार देर रात तक बिजली का इंतजार करना पड़ता है। इससे बच्चों की पढ़ाई के साथ सुबह की दिनचर्या भी प्रभावित होती है। ग्रामीण गणेश ने बताया कि बिजली आने और जाने का कोई निश्चित समय नहीं है। शाम को भोजन बनाने के समय ही बिजली कट जाती है। ऐसे में कई बार टॉर्च की रोशनी में खाना बनाना पड़ता है। उनका कहना है कि बिजली कटौती रोज की समस्या बन गई है। सोशल मीडिया पर भी ग्रामीणों ने जताई नाराजगी लगातार बिजली कटौती से परेशान ग्रामीण अब सोशल मीडिया पर भी अपनी समस्या उठा रहे हैं। फेसबुक समेत अन्य प्लेटफॉर्म पर लोग बिजली कटने का समय और कई घंटे तक आपूर्ति बाधित रहने की जानकारी साझा कर रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि यदि रोस्टिंग जरूरी है तो उसका समय निर्धारित किया जाए, ताकि लोग अपने जरूरी काम उसी के अनुसार कर सकें। ग्रामीण बोले- बच्चों की पढ़ाई और घरेलू काम प्रभावित ग्रामीण आशुतोष द्विवेदी ने बताया कि दिन में बिजली रहने के बाद शाम करीब सात बजे आपूर्ति काट दी जाती है। उनके मुताबिक रात करीब 10 बजे बिजली आती है और कुछ देर बाद फिर चली जाती है। इसके बाद करीब दो बजे आपूर्ति आने की स्थिति बनती है। उन्होंने कहा कि शाम की कटौती से बच्चों की पढ़ाई प्रभावित होती है और घर के जरूरी काम भी समय पर नहीं हो पाते। ग्रामीण राजकमल ने कहा कि 18 घंटे बिजली देने की बात कही जाती है, लेकिन वास्तविकता में करीब 12 घंटे ही आपूर्ति मिल रही है। दिन और रात मिलाकर करीब छह घंटे की कटौती से ग्रामीण परेशान हैं। उन्होंने बिजली समस्या के स्थायी समाधान की मांग की। उत्पादन कम, मांग ज्यादा होने से रोस्टिंग अधीक्षण अभियंता सिद्धार्थनगर लाल सिंह ने बताया कि ग्रामीण क्षेत्रों में फिलहाल करीब दो से ढाई घंटे की रोस्टिंग की जा रही है। बिजली का उत्पादन कम और मांग अधिक होने के कारण आपूर्ति प्रभावित हो रही है। उन्होंने कहा कि एक सप्ताह में रोस्टिंग की स्थिति में सुधार किया जाएगा और ग्रामीण क्षेत्रों में 18 घंटे बिजली आपूर्ति देने की व्यवस्था बेहतर की जाएगी। ग्रामीणों का कहना है कि निर्धारित आपूर्ति और वास्तविक बिजली मिलने के समय में अंतर लगातार महसूस हो रहा है। खासकर शाम और रात की कटौती ने परेशानी बढ़ा दी है। अब ग्रामीणों की नजर विभाग की ओर से एक सप्ताह में रोस्टिंग व्यवस्था में सुधार के दावे पर है।
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