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    फर्रुखाबाद-बदायूं हाईवे डूबा, बैरिकेडिंग लगे:62 गांव के 44 हजार लोग घर छोड़ने को मजबूर; ऐलान हो रहा- गांव खाली करें

    14 hours ago

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    गंगा नदी में आए उफान के बाद फर्रुखाबाद-बदायूं हाईवे डूब गया है। दो जगह पर 100 से 150 मीटर तक दो से तीन फीट पानी भरा है। बैरिकेडिंग लगाकर ट्रैफिक रोक दिया गया है। बाढ़ की वजह से 62 गांव के 44 हजार से ज्यादा लोग घर छोड़ने पर मजबूर हो चुके हैं। जो राहत शिविर बनाए गए थे, उनमें से कुछ में बाढ़ का पानी पहुंचने लगा है। बच्चों और महिलाओं को दूसरे शिविरों में भेजा गया है। गंगा नदी लगातार कटान कर रही है। अपनी मूल धारा से 1.5 किमी दूर बह रही है। इसके असर से अब तक 32 घर ढह चुके हैं। स्थिति बिगड़ती देखकर NDRF (नेशनल डिजास्टर रिस्पॉन्स फोर्स) बुला ली गई है। PAC के जवान नाव और स्टीमर के सहारे पानी के बीच फंसे लोगों को सुरक्षित जगह पहुंचा रहे हैं। बदायूं जाने के लिए 14 किमी ज्यादा चलना पड़ रहा फर्रुखाबाद में जो गांव बाढ़ की चपेट में हैं, उनमें सबसे ज्यादा 27 गांव अमृतपुर तहसील के हैं। वहां के लोग कहते हैं- ‘अमृतपुर की यही निशानी, सड़क के दोनों तरफ पानी।’ हर साल गंगा का जलस्तर बढ़ते ही ये सड़क डूबना तय हो जाती है। 2025 में 15 दिन तक स्टेट हाईवे ब्लॉक रहा था। अभी तक फर्रुखाबाद से बदायूं जाने वाली गाड़ियां राजेपुर तिराहा से होते हुए बदायूं जाती थीं। लेकिन, अभी चित्रकूट गांव के पास स्टेट हाईवे डूब गया है। हाईवे पर पुलिस की ड्यूटी लगा दी गई है, जिससे लोगों को डूब चुकी सड़क पर जाने से रोका जा सके। पुलिस गाड़ियों को डबरा इलाके से बदायूं की तरफ भेज रही है। लोगों को करीब 14 किमी ज्यादा चलना पड़ रहा है। राहत शिविर में आसरा नहीं, वो घरों की छतों पर रह रहे स्टेट हाईवे के नजदीक ही चित्रकूट गांव है। पूरा गांव जलमग्न है। पानी के बीच हमें राजपाल मिले। वह कहते हैं- गांव में चारों तरफ पानी भरा है। इसमें सांप-बिच्छू का खतरा भी रहता है। इन्हीं रास्तों से आना-जाना पड़ता है। गांव के करीब राहत शिविर बनाया गया है। इसमें 10 से 20 लोग ही आते हैं, क्योंकि इतने लोगों के ही नाम लिखे गए। कई लोगों के नाम नहीं लिखे गए। वो मजबूरी में अपने घरों की छत पर रह रहे हैं। इंतजार कर रहे हैं कि पानी कम हो जाए। कुछ अपने रिश्तेदारों के घर में जा चुके हैं। ये स्थिति 10 दिन से बनी हुई है। पिछले साल की बाढ़ 30 दिन तक रही थी। घर छूटा तो सड़क किनारे टेंट बनाए, यहां से भी हटाए गए हमारे करीब खड़े सुखदेव कहते हैं- गांव में कई घर डूब गए। परेशान लोग सड़क किनारे टेंट लगाकर रहने लगे। अभी 2-3 दिन पहले प्रशासन ने ढोल पिटवाया कि यहां भी खतरा है, ये जगह भी छोड़नी होगी। लोगों को राहत शिविर में जाने को कहा गया था। जो लोग घरों की छतों पर फंसे हैं, उन्हें साफ पानी तक पीने को नहीं मिल पा रहा। नाव के सहारे राशन-पानी पहुंचाया तो जा रहा है, लेकिन दहशत बनी ही रहती है। जैसे-तैसे लोग गुजर बसर कर रहे हैं। शिविर में पानी भरने का सवाल सुनकर तहसीलदार भड़के राहत शिविर के माहौल को समझने के लिए हम चित्रकूट गांव के फार्मेसी कॉलेज पहुंचे। यहीं पर राहत शिविर बनाया गया था। गांव के सरकारी स्कूल में पानी भर चुका था। इस वजह से राहत शिविर के एक हिस्से में स्कूल भी चल रहा था। राहत शिविर के बाहर भी धीरे-धीरे पानी भरने लगा है। एसडीएम श्वेता साहू और तहसीलदार शशांक सिंह यहां पहुंचे थे। हमने तहसीलदार से पूछा- यहां बाढ़ का पानी भरने लगा है, क्या तैयारी है? वह गुस्से में कहते हैं- जो लोग शिविर में आएंगे, वो अंदर रहेंगे या कि बाहर घूमेंगे। अंदर तो पानी नहीं है न…। हमने पूछा- अन्य जरूरतों के लिए तो बाहर निकलेगा। तहसीलदार कहते हैं- आप ही बता दीजिए कि हम क्या करें, क्योंकि हमें कुछ पता नहीं। कोटेदार बोले- 14 साल बाद बांध बना, वो कुछ महीने भी नहीं चला फर्रुखाबाद सदर तहसील के 12 गांव में बाढ़ है। रामपुर दफरपुर में कटान की वजह से कई घर नदी में समा गए। इस गांव की तरफ जाने वाली नाव में गांव के कोटेदार सुभाष चंद्र मिले। वह कहते हैं- 2012 से ऐसा हर साल होता है कि गंगा में जलस्तर बढ़ने के बाद बाढ़ आ जाती है। लोगों ने अधिकारियों से कहा कि बांध बनवा दें, तो पूरे गांव कटने से बच जाए। सिंचाई विभाग ने बांध बनवाया, लेकिन वह कुछ महीने भी नहीं चला। कुछ अनाज सरकार की तरफ से भिजवाया गया था, वह बाढ़ में फंसे लोगों में बंटवाया जा रहा है। ‘एक घर बह गया, दूसरा बचा है इसलिए उसे तोड़ रहे’ गंगा नदी की तेज धार से करीब 50 मीटर की दूरी पर मीरावती रिश्तेदारों के साथ अपने टूटे मकान का मलबा नाव पर रखवा रही थीं। वह कहती हैं- इसी गांव में हमारा पुराना घर था। 4 दिन पहले ही नदी में समा गया। एक दूसरा घर यहां बनवा रहे थे, लेकिन अब यह भी डूबने जा रहा है। इसे तोड़कर ईंट लेकर जा रहे हैं। यहां सब परेशान हैं। खाने-पीने का सामान नहीं मिल रहा। हमारा तो खेती से लेकर घर तक सब कुछ चला गया। अब समझ ही नहीं आ रहा कि कहां जाएं? घर में पानी भरा, गाय-बकरी सड़क पर हैं… 56 साल के जबर सिंह पूरा जीवन गांव में रहे और खेती-किसानी की। कहते हैं- हमारे पास गाय और बकरी हैं, घर पानी में समा गया है। जानवर सड़क पर हैं। खेत भी डूब गए हैं। अब जब पानी कम होगा, तब लौटेंगे। यहीं पर दोबारा घर बनाएंगे। हर साल बाढ़ आती है, मदद की भी खूब बात होती है, लेकिन सच्चाई ये है कि हम जैसे लोगों को चवन्नी भी नहीं मिलती है। न जाने प्रशासन किसकी मदद करता है? 'यहां सिर्फ बाढ़ नहीं, जमीन कटना भी बड़ी समस्या' मड़ैया गांव के संतोष बताते हैं- हमारे इलाके में सिर्फ बाढ़ की समस्या नहीं है, गंगा की धारा जमीन भी काट रही है। पिछले साल तो बहुत भयानक स्थिति हो गई थी। पूरा पृथ्वीपुर गांव ही कट गया था। इन लोगों ने बांध जरूर बनाया। लेकिन, गंगा की धार में वह टिक नहीं पाया। लोग परेशान हो चुके हैं, सिर्फ जीवन कट रहा है। बाढ़ की 3 स्थितियां, तस्वीरों में देखिए… 1. गंगा नदी का कटान- लोग खुद ही मकान तोड़ रहे - फसलें डूबीं - फर्रुखाबाद प्रशासन क्या मदद कर रहा, ये जानिए ------------------------------- ये ग्राउंड रिपोर्ट भी पढ़ें - ‘बेटी की शादी थी, घर गंगा में बह गया’, महिला बोली- जिंदगीभर की कमाई डूबी, ये दर्द कैसे सहें ‘पिछले साल गंगा नदी की कटान में मेरा घर ढह गया। कर्जा लेकर दूसरा बनवाया, वो भी नदी में समाने वाला है। मेरी बेटी की शादी होनी है, मगर कुछ बचा ही नहीं…।’ ये कहते हुए ज्ञानदेवी की आंखों में आंसू आ गए। वह आगे कुछ नहीं कह सकीं। नजदीक ही उनकी बेटी भी सुबक रही थी। ज्ञानदेवी फर्रुखाबाद से करीब 10 किमी दूर बिलावलपुर गांव में रहती हैं। उनके घर से सिर्फ 50 मीटर की दूरी पर गंगा नदी का पानी बह रहा था। पढ़िए पूरी खबर...
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