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    फर्रुखाबाद में गंगा का जलस्तर खतरे के निशान के करीब:50 से ज्यादा गांवों में बाढ़ का खतरा, चित्रकूट डिप पर आवागमन बंद

    4 hours ago

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    फर्रुखाबाद में गंगा नदी का जलस्तर लगातार बढ़ने से बाढ़ का खतरा बढ़ गया है। नदी का जलस्तर 136.95 मीटर से बढ़कर 137.05 मीटर पहुंच गया है। खतरे का निशान 137.10 मीटर है, यानी गंगा का पानी खतरे के निशान से महज 5 सेंटीमीटर नीचे है। जलस्तर बढ़ने से गंगा किनारे बसे 50 से अधिक गांवों के लोगों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। अमृतपुर तहसील क्षेत्र के 35 से ज्यादा गांव बाढ़ से प्रभावित हैं। कई गांवों के रास्तों पर पानी भर गया है और लोगों को आवागमन के लिए नाव का सहारा लेना पड़ रहा है। ग्रामीणों के सामने पशुओं के चारे की भी समस्या खड़ी हो गई है। पिछले करीब 10 दिनों से कई इलाकों में पानी भरा होने के कारण ग्रामीणों को चारा लाने के लिए कई किलोमीटर दूर जाना पड़ रहा है। चित्रकूट डिप पर दो फीट से ज्यादा पानी बढ़ते जलस्तर के कारण फर्रुखाबाद-बदायूं मार्ग पर स्थित चित्रकूट डिप पर दो फीट से अधिक पानी बह रहा है। प्रशासन ने सुरक्षा को देखते हुए यहां आवागमन पूरी तरह बंद कर दिया है। राजेपुर, जमापुर और चित्रकूट डिप के दोनों ओर बैरिकेडिंग कर वाहनों को रोक दिया गया है। सुरक्षाकर्मी लोगों को पानी से होकर गुजरने से रोक रहे हैं। 35 से ज्यादा गांवों में पहुंचा बाढ़ का पानी अमृतपुर तहसील क्षेत्र के कई गांव बाढ़ की चपेट में हैं। इमादपुर सोमवंशी से अलीगढ़ जाने वाले मार्ग पर भी तेजी से पानी बह रहा है। पिछले साल भी बाढ़ के दौरान यह मार्ग कट गया था। पानी बढ़ने से भुड़िया भेड़ा समेत आसपास के गांवों के लोगों को परेशानी हो रही है। अंबरपुर की मड़ैया में कई घरों में पानी भर गया है। रास्तों पर पानी जमा होने के कारण बच्चों और बुजुर्गों का निकलना मुश्किल हो गया है। आशा की मड़ैया, उदयपुर, तीसराम की मड़ैया, मंझा और करनपुर घाट के ग्रामीण नाव से आवागमन कर रहे हैं। चारे के लिए 5 किलोमीटर दूर जा रहे ग्रामीण बाढ़ के कारण गांवों में पशुओं के लिए चारे की समस्या भी गंभीर हो गई है। कई जगह खेत और रास्ते पानी में डूबे होने के कारण ग्रामीणों को चारा लाने के लिए करीब पांच किलोमीटर दूर तक जाना पड़ रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि जलस्तर और बढ़ा तो आवागमन के साथ पशुओं के लिए चारे की व्यवस्था करना भी मुश्किल हो जाएगा। अधिशासी अभियंता दुर्ण कुमार ने बताया कि अब बांध से छोड़े जाने वाले पानी की मात्रा कम कर दी गई है। उनका कहना है कि बुधवार शाम से गंगा का जलस्तर कम होने की उम्मीद है। फिलहाल प्रशासन प्रभावित क्षेत्रों में स्थिति पर नजर रख रहा है।
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