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    फूस के छप्पर से निकला इंटरमीडिएट टॉपर:लखीमपुर-खीरी के उमाशंकर ने परीक्षा में टॉप कर हासिल की सफलता

    2 hours ago

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    लखीमपुर खीरी में शारदा नदी के किनारे बसे एक छोटे से गांव से निकली यह कहानी बताती है कि अगर मन में लगन और जुनून हो, तो विपरीत परिस्थितियां भी सफलता के आगे झुक जाती हैं। जिले के रमियाबेहड़ ब्लॉक की ग्राम पंचायत रामनगर बगहा के रहने वाले छात्र उमाशंकर जायसवाल ने इंटरमीडिएट परीक्षा में 93.6 प्रतिशत अंक हसिल कर जिला टॉप किया है और पूरे इलाके का नाम रोशन कर दिया है। संसाधनों की कमी, लेकिन हौसले बुलंद उमाशंकर की जिंदगी संघर्षों से भरी रही है। वह एक साधारण झोपड़ी में रहते हैं, जहां पढ़ाई के लिए न तो पर्याप्त सुविधा है और न ही आधुनिक साधन। घर में पढ़ने के लिए कुर्सी-टेबल तक नहीं है, और न ही एंड्रॉयड मोबाइल जिससे वह इंटरनेट का सहारा ले सकें। इसके बावजूद उन्होंने अपनी मेहनत और अनुशासन के दम पर इतिहास रच दिया। घाघरा की कटान ने बदली किस्मत कभी परिवार के पास तीन बीघा जमीन थी, लेकिन घाघरा नदी की कटान में वह पूरी तरह बह गई। इसके बाद परिवार आर्थिक संकट से जूझने लगा। आज उनका पूरा परिवार 30×40 की झोपड़ी में रहकर जीवन यापन कर रहा है। ऐसे हालात में पढ़ाई जारी रखना किसी चुनौती से कम नहीं था, लेकिन उमाशंकर ने हार नहीं मानी। परिवार की जिम्मेदारियों के बीच पढ़ाई परिवार में माता-पिता के साथ बड़े भाई ओमप्रकाश हैं, जिनकी पढ़ाई आर्थिक तंगी के कारण आठवीं तक ही हो पाई। बड़ी बहन पूजा की भी पढ़ाई सीमित रह गई और अब उनका विवाह हो चुका है, जबकि छोटी बहन ममता भी संसाधनों के अभाव में आगे की पढ़ाई नहीं कर पा रही है। इन परिस्थितियों में उमाशंकर ने पढ़ाई को ही अपना लक्ष्य बनाकर लगातार मेहनत की। रोजाना घंटों की मेहनत लाई रंग उमाशंकर रोजाना कई घंटों तक पढ़ाई करते थे और समय का विशेष ध्यान रखते थे। उन्होंने सीमित साधनों में भी अपनी पढ़ाई को कभी बाधित नहीं होने दिया। शिक्षकों के मार्गदर्शन और परिवार के हौसले ने उनकी मेहनत को नई दिशा दी। पढ़ाई के साथ रचनात्मकता भी उमाशंकर को पढ़ाई के साथ-साथ कविता लिखने और खेलकूद में भी रुचि है। उनका मानना है कि पढ़ाई के साथ मानसिक संतुलन और रचनात्मकता भी जरूरी है। रिजल्ट के बाद उन्होंने अपनी लिखी कविता सुनाकर सभी को भावुक कर दिया। बने पूरे क्षेत्र के लिए प्रेरणा उमाशंकर की सफलता ने यह साबित कर दिया कि गरीबी और अभाव सफलता की राह में बाधा नहीं बन सकते। उनकी उपलब्धि अब पूरे जिले के छात्रों के लिए प्रेरणा बन गई है। गांव के लोग, शिक्षक और परिजन उनकी इस कामयाबी पर गर्व महसूस कर रहे हैं और उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना कर रहे हैं।
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