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    गोंडा में 7 विद्युत खंभो पर फर्जी लाइन लगाई:जांच में 3 लाइनमैन दोषी मिले, सेवा की गई समाप्त; दो एसएसओ को हटाया गया

    3 hours ago

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    गोंडा जिले में बिजली विभाग के कर्मचारियों और अधिकारियों द्वारा 7 विद्युत खंभों पर अवैध रूप से बिजली लाइन बिछाने का मामला सामने आया है। इस गंभीर अनियमितता पर विभाग ने सख्त कार्रवाई की है। जांच रिपोर्ट के आधार पर तीन संविदा लाइनमैनों को बर्खास्त कर दिया गया है, जबकि दो एसएसओ को हटाया गया है। एक अवर अभियंता (जेई) से जवाब मांगा गया है और उपखंड अधिकारी (एसडीओ) को चार्जशीट जारी की गई है। रिपोर्ट में काम अवैध घोषित यह मामला विद्युत वितरण खंड नवाबगंज के अंतर्गत तुलसीपुर मांझा में 894 कोसी परिक्रमा मार्ग के निर्माण के दौरान एक प्लांट के लिए 11 केवी लाइन को अवैध तरीके से स्थानांतरित करने से संबंधित है। शिकायत मिलने के बाद मुख्य अभियंता (देवीपाटन मंडल) यदुनाथ यथार्थ ने मामले की जांच के लिए तीन सदस्यीय समिति का गठन किया था। जांच समिति में अधीक्षण अभियंता संजय गुप्ता, अधिशासी अभियंता राम मोहन पाण्डेय और लेखाधिकारी अखिलेश कुमार शामिल थे। समिति ने अपनी रिपोर्ट में पाया कि लाइन के निर्माण में नियमों की घोर अनदेखी की गई थी और यह कार्य पूरी तरह से अवैध था। 3 लाइनमैन बर्खास्त इस अवैध लाइन निर्माण में सीधे तौर पर संलिप्त पाए गए तीन संविदा लाइनमैन सुग्रीव सिंह, रामबाबू और अशोक को तत्काल प्रभाव से सेवा से बर्खास्त कर दिया गया है। दो संविदा एसएसओ, रामजी और गजेंद्र पाल को उनके वर्तमान पावर हाउस से हटाकर दूसरे स्थान पर स्थानांतरित किया गया है। अवर अभियंता (जेई) अरुण कुमार, जिन्होंने इस मामले में पहले ही एफआईआर दर्ज कराई थी, उन्हें 'नियम 10' के तहत नोटिस जारी कर 10 दिन के भीतर जवाब मांगा गया है। वहीं, उपखंड अधिकारी (एसडीओ) पीयूष सिंह को चार्जशीट थमा दी गई है और उनके विरुद्ध विभागीय कार्रवाई के लिए मध्यांचल मुख्यालय को संस्तुति भेजी गई है। बताया जा रहा है कि बिना किसी विभागीय अनुमति के इन लोगों द्वारा गलत तरीके से कंपनी के कहने पर इन लाइनों को शिफ्ट किया गया था जिसके चलते स्थानीय लोगों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ा था। मुख्य अभियंता, देवीपाटन मंडल यदुनाथ यथार्थ ने इस कार्रवाई की पुष्टि करते हुए स्पष्ट संदेश दिया है कि विभाग में भ्रष्टाचार और अनियमितता के लिए कोई स्थान नहीं है। उन्होंने कहा कि भ्रष्टाचार के विरुद्ध जीरो टॉलरेंस की नीति के तहत यह कठोर कार्रवाई की जा रही है और भविष्य में भी किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा। सभी बिजली विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों को सख्त चेतावनी दी गई है कि दोबारा इस तरीके से कहीं और नहीं होना चाहिए।
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