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    गोंडा पहुंचे निदेशक अभियोजन ललित मुद्गल:कहा- एक साल में दिलाई गई अपराधियों को ऐतिहासिक सजा

    15 hours ago

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    यूपी सरकार की महिला अपराधों के प्रति 'जीरो टॉलरेंस' नीति के तहत, अभियोजन निदेशालय ने पूरे प्रदेश में अपराधियों को कठोर सजा दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। आज मंगलवार गोंडा दौरे पर पहुंचे अभियोजन निदेशालय उत्तर प्रदेश के निदेशक ललित मुद्गल ने गोंडा स्थित संयुक्त निदेशक अभियोजन कार्यालय में अधिकारियों और मुख्य लोक अभियोजन के साथ अभियोजन कार्यों की समीक्षा बैठक की है। बैठक के दौरान, महिला अपराधों के मामलों में अधिक से अधिक सजा सुनिश्चित करने पर जोर दिया गया। निदेशक ललित मुद्गल ने बताया कि 1 अप्रैल 2025 से 31 मार्च 2026 तक की अवधि में पूरे उत्तर प्रदेश में महिला अपराधों से संबंधित मामलों में महत्वपूर्ण सफलता मिली है। पॉक्सो अधिनियम के तहत 12 आरोपियों को फांसी की सजा, 300 को आजीवन कारावास, 1316 को 10 वर्ष या उससे अधिक की सजा और 1706 आरोपियों को 10 वर्ष से कम की सजा दिलाई गई है। उन्होंने आगे बताया कि अन्य महिला अपराध के मामलों में 8 आरोपियों को फांसी, 245 को आजीवन कारावास, 678 को 10 वर्ष या उससे अधिक की सजा और 2689 आरोपियों को 10 वर्ष से कम की सजा दी गई है। इसके अतिरिक्त, नई भारतीय न्याय संहिता के प्रावधानों के तहत भी कठोर दंड सुनिश्चित किए गए हैं। इसके अंतर्गत 6 आरोपियों को मृत्युदंड, 35 को आजीवन कारावास, 36 मामलों में 10 वर्ष या उससे अधिक की सजा और 1174 मामलों में 10 वर्ष से कम की सजा दिलाई गई है। वहीं, 74,701 मामलों में आरोपियों को जुर्माने से दंडित किया गया है। नए कानून के तहत पॉक्सो के 14 ऐसे मामले हैं, जिनमें 1 महीने से काम की अवधि में विचारण पूर्ण कराकर प्रदेश में आरोपियों को कई प्रकार की सजा दिलाई गई है। सबसे बड़ी बात यह है कि नवीन आपराधिक विधि में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से गवाही कराई जाने का प्रावधान उत्तर प्रदेश शासन के निर्देश के अनुक्रम में प्रथम चरण में है। अब तक पुलिस कार्मिक, डॉक्टर और पीड़ितों के लगभग 40161 बयान पूरे उत्तर प्रदेश में कराए गए हैं, जिससे लगभग 20 करोड़ रुपए की बचत उत्तर प्रदेश सरकार की हुई है। इसके साथ ही साथ पूरे उत्तर प्रदेश में एससी/एसटी अधिनियम के अंतर्गत 1073 मामलों में लोगों को दंडित करवा करके के सजा करवाई गई है गैंगस्टर अधिनियम के 1145, आयुध अधिनियम के 7500, गोवध निवारण अधिनियम के 801 मामले में भी आरोपियों को कारावास और अन्य तरीके से दंडित करवाया गया है। निदेशक अभियोजन निदेशालय उत्तर प्रदेश ललित मुद्गल ने कहा कि अगर कोई भी आरोपी ट्रायल प्रक्रिया के दौरान फरार हो जाता है, तो ट्रायल प्रक्रिया आप रुकेगी नहीं बल्कि वह ट्रायल प्रक्रिया चलती रहेगी। हमारी यह भी प्राथमिकता है कि जिन मामलों में छल कपट के माध्यम से पैसा अर्जित किया गया है। उन मामलों में कार्यवाही करके हम लोग पीड़ितों को वापस कारण इसको लेकर के काम किया जा रहा है। हमारा प्रयास है कि पॉक्सो,दुष्कर्म और महिलाओं अपराधों में पीड़ितों की गवाही वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से ही कराई जाए क्योंकि वह वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से बहुत ही सही ढंग से अपने बयान को दे पाते हैं और उन्हें किसी प्रकार की दिक्कत नहीं होती है। अन्य अपराधों में भी प्रयास किया जा रहा है कि ज्यादा से ज्यादा लोग ऑनलाइन वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से गवाही दें क्योंकि वहां पर काफी अच्छा माहौल रहता है और इससे सरकार को कभी फायदा होता है राजस्व ज्यादा नहीं होता है।
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