Search…

    Saved articles

    You have not yet added any article to your bookmarks!

    Browse articles

    GDPR Compliance

    We use cookies to ensure you get the best experience on our website. By continuing to use our site, you accept our use of cookies, Privacy Policies, and Terms of Service.

    Top trending News
    bharathunt
    bharathunt

    गैंगस्टर की 24.77 करोड़ की जमीन सरकारी खाते में दर्ज:मानकों को ताक पर रखकर शौकत ने अपने नाम दर्ज कराई थी सिविल लाइंस की बेशकीमती जमीन

    2 hours ago

    1

    0

    कानपुर जिला प्रशासन ने मानकों को ताक पर रखकर बिल्डर व गैंगस्टर शौकत पहलवान को बेची गई 24.77 करोड़ की जमीन को वापस लिया है। सिविल लाइंस में मौजूद बेशकीमती नजूल की इस जमीन को आवंटियों ने वर्षों से न तो लीज रेंट जमा किया और न ही पट्टे का नवीनीकरण कराया। इसके बावजूद कलेक्टर की अनुमति लिए बिना भूमि को तीसरे पक्ष यानी शौकत अली उर्फ शौकत पहलवान की कंपनी एसए बिल्डर्स को बेच दिया था। जांच में खुलासा होने के बाद डीएम ने सख्त एक्शन लेते हुए इसे वापस नजूल में दर्ज कराया है। शौकत पर गैंगस्टर के बाद शुरू हुई थी जमीन की जांच डीएम जितेन्द्र प्रताप सिंह ने बताया कि मामले का खुलासा एसडीएम सदर, सहायक प्रभारी अधिकारी नजूल और तहसीलदार सदर की संयुक्त जांच में हुआ। जांच में सामने आया कि संबंधित नजूल आवंटियों ने वर्षों से न तो लीज रेंट जमा किया और न ही पट्टे का नवीनीकरण कराया। इसके बावजूद कलेक्टर की अनुमति लिए बिना भूमि को तीसरे पक्ष को बेच दिया गया। अभिलेखों के अनुसार नजूल ब्लॉक 14 के प्लॉट संख्या 3 में स्थित इस भूखंड का आवंटन वर्ष 1982 में केसी बेरी, तरंग बेरी, नीरज बेरी और विकास बेरी के नाम दर्ज है। नजूल मैनुअल के प्रावधानों के अनुसार भवन प्रयोजन के पट्टे सीमित अवधि के लिए दिए जाते हैं और उनका नवीनीकरण आवश्यक होता है, लेकिन संबंधित पट्टाधारकों ने इस दिशा में कोई कार्रवाई नहीं की। जांच के दौरान यह भी सामने आया कि सीता बेरी के उत्तराधिकारियों ने नजूल पट्टे से जुड़े महत्वपूर्ण तथ्यों को छिपाते हुए वर्ष 2012 में गैंगस्टर शौकत अली की कंपनी एसए बिल्डर्स प्राइवेट लिमिटेड को बेच दिया। विक्रय पत्र में भूमि को फ्रीहोल्ड दर्शाया गया, जबकि सरकारी अभिलेखों में इसका कोई प्रमाण नहीं मिला। इसके बाद भूखंड संख्या 14/59-ए सिविल लाइंस पर सरकारी पुनर्प्रवेश का आदेश जारी करते हुए इसे फिर से अनावंटित सरकारी भूमि के रूप में दर्ज करने के निर्देश दिए हैं। वर्तमान सर्किल रेट के अनुसार इस जमीन की कीमत लगभग 24 करोड़ 77 लाख रुपये आंकी गई है। सरकारी खाते में दर्ज, जमीन की होगी निगरानी जिलाधिकारी ने अपने आदेश में स्पष्ट किया है कि बिना लीज रेंट जमा किए, बिना पट्टा नवीनीकरण कराए और बिना कलेक्टर की अनुमति लिए नजूल भूमि का विक्रय करना नियमों का स्पष्ट उल्लंघन है। इस प्रकार शहर के बीचोंबीच स्थित बेशकीमती सरकारी संपत्ति का अवैध रूप से खरीद-फरोख्त की गई है। इसके चलते इस संपत्ति को दोबारा सरकारी खाते में दर्ज करा दिया है। इसकी निगरानी की जिम्मेदारी सहायक प्रभारी अधिकारी नजूल और तहसीलदार सदर को संयुक्त रूप से दी गई है।
    Click here to Read more
    Prev Article
    हमीरपुर में अधिवक्ता ने लगाई फांसी:सुसाइड नोट में लिखा- तुमने 11 साल के रिश्ते में धोखा देकर मुझे बर्बाद कर दिया, अब जीकर क्या करूं
    Next Article
    जमीनी विवाद में हुए खूनी संघर्ष:मुकदमे के बाद पीड़ित पर सुलह करने का दबाव, गांव में ना रहने की भी दी जा रही धमकी

    Related न्यूज Updates:

    Comments (0)

      Leave a Comment