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    UPUMS सैफई में क्लबफुट प्रबंधन पर कार्यशाला:पोंसेटी तकनीक से 95 प्रतिशत मामलों में बिना ऑपरेशन इलाज संभव

    1 hour ago

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    उत्तर प्रदेश आयुर्विज्ञान विश्वविद्यालय सैफई में क्लबफुट यानी जन्मजात टेढ़े पैर की बीमारी के प्रबंधन पर एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। आर्थोपेडिक्स विभाग और क्योर इंटरनेशनल इंडिया ट्रस्ट के संयुक्त सहयोग से आयोजित इस कार्यशाला में आसपास के कई जिलों से आए 100 से अधिक आर्थोपेडिक सर्जनों को आधुनिक पोंसेटी तकनीक के माध्यम से क्लबफुट की पहचान और उपचार के बारे में प्रशिक्षण दिया गया। कार्यक्रम में विशेषज्ञों ने बताया कि इस तकनीक से अधिकांश बच्चों का इलाज बिना ऑपरेशन के संभव है। कार्यशाला का शुभारंभ शनिवार 11 बजे कार्यक्रम का शुभारंभ विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. डॉ. अजय सिंह ने मां सरस्वती की प्रतिमा के समक्ष दीप प्रज्वलित कर किया। उन्होंने कहा कि पोंसेटी तकनीक की मदद से अधिकतर बच्चों के टेढ़े पैर केवल प्लास्टर के माध्यम से ठीक किए जा सकते हैं और बहुत कम मामलों में सर्जरी की जरूरत पड़ती है। उन्होंने जन्म के समय ही इस बीमारी की पहचान कर समय पर उपचार शुरू करने पर जोर दिया। साथ ही कहा कि पीएचसी, सीएचसी, आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और स्वास्थ्य कर्मियों के सहयोग से जनजागरूकता बढ़ाकर बच्चों के माता पिता तक सही जानकारी पहुंचाई जा सकती है। अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञ ने दी उपचार की जानकारी कार्यक्रम में अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त क्लबफुट विशेषज्ञ डॉ. मैथ्यू वर्गीज, सेंट स्टीफन हॉस्पिटल नई दिल्ली, गेस्ट ऑफ ऑनर के रूप में शामिल हुए। उन्होंने बताया कि पोंसेटी विधि क्लबफुट के इलाज की सरल, सुरक्षित और प्रभावी तकनीक है। इस पद्धति से 95 प्रतिशत से अधिक मामलों में बिना ऑपरेशन के सफल उपचार किया जा सकता है। आर्थोपेडिक्स विभागाध्यक्ष डॉ. सुनील कुमार ने बताया कि लगभग हर 1000 नवजात शिशुओं में से एक में क्लबफुट की समस्या पाई जाती है, जिसमें एक या दोनों पैर टेढ़े हो सकते हैं और पोंसेटी तकनीक से बिना चीरा और बिना रक्तस्राव के इसका उपचार संभव है। बच्चों को मिलेगा मुफ्त इलाज कार्यक्रम के दौरान क्योर इंटरनेशनल इंडिया ट्रस्ट और यूपीयूएमएस सैफई के बीच एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए गए। इसके तहत क्लबफुट और अन्य अंग विकृतियों से पीड़ित बच्चों का निःशुल्क उपचार विश्वविद्यालय के आर्थोपेडिक्स विभाग में किया जाएगा। कार्यक्रम में डॉ. हरीश कुमार ने प्रतिभागियों को क्लबफुट की गंभीरता के आकलन के लिए पिरानी स्कोरिंग प्रणाली के महत्व की जानकारी दी। इस अवसर पर प्रो वाइस चांसलर डॉ. रामाकांत यादव, डीन डॉ. आदेश कुमार, सीएमएस डॉ. एसपी सिंह, रजिस्ट्रार दीपक कुमार और मेडिकल सुपरिटेंडेंट डॉ. अमित सिंह सहित कई वरिष्ठ अधिकारी, फैकल्टी सदस्य और रेजिडेंट्स मौजूद रहे। कार्यक्रम के सफल संचालन में सह आयोजक सचिव डॉ. ऋषभ अग्रवाल की महत्वपूर्ण भूमिका रही, जबकि आयोजन सचिव डॉ. राजीव कुमार ने अंत में सभी अतिथियों और प्रतिभागियों का आभार व्यक्त किया।
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